Wednesday, 26 June 2024

सर्वगुण सम्पन्न लाडली

माँ बाप नें 
अपनी लाडली बिटिया को 
देकर संस्कार अच्छे 
बना दिया लाडली को सर्वगुण सम्पन्न 
..
पढ़ाया लिखाया उसे
निपुण बनाया घर के काम काज में 
छोटे बड़ों का आदर भी 
करना सिखाया उसे 
सिखाया जिंदगी जीने का हुनर भी
बना दिया लाडली को सर्वगुण सम्पन्न  
..
दक्ष थी लाडली उनकी हर कार्य में 
उतार लाती वो स्वर्ग घरा पर 
बना देती घर को जन्नत 
लेकिन मिली ससुराल में रुसवाई
उसकी सर्वगुण सम्पन्नता 
किसी को रास नहीं आई 

रेखा जोशी 





Tuesday, 25 June 2024

बिखरा संगीत प्रकृति के कण कण में

है बिखरा संगीत प्रकृति के कण कण में
गूंज रही ध्वनि ओम की 
ब्रह्माण्ड के सुर ताल में 
 
करती शांत मन सबका 
झरने की सुरीली ताल 
नवयौवना की मस्त चाल सी 
लहराती बलखाती गुनगुनाती 
अठखेलियां लुभाती नदी की 
टिप टिप बरसता अंबर से पानी 
झूम झूम जाता है मनुआ 
नाचे मोर वन उपवन में 
चहके पंछी कोयलिया कुहूके
गुनगुन भंवरे गुनगुनाते 
है बिखरा संगीत प्रकृति के कण कण में
गूंज रही ध्वनि ओम की 
ब्रह्माण्ड के सुर ताल में 

रेखा जोशी 





Monday, 27 May 2024

बहुत करीब से देखा है तुम्हेंजिंदगी

बहुत करीब से देखा है तुम्हें

जिंदगी

बच्चों के पेट की खातिर

देखा है माँ को मजबूर होते हुए

न चाहते हुए भी बिक जाती वो

बहुत करीब से देखा है तुम्हें

जिंदगी

..

देखा है नन्हें नन्हें हाथों को

पुस्तकों की जगह

ढो रहे बोझ अपने घर का

किसी को हँसाती और किसी को

रुलाती

किसी के हिस्से बांटे खुशिया

किसी के नसीब में ग़मों का साया

बहुत करीब से देखा है तुम्हें

जिंदगी

Tuesday, 21 May 2024

तेरे मेरे प्यार में कुछ तो कमी थी

गीत 

टूट गए दिल अपने आँख में नमी थी 
तेरे  मेरे  प्यार  में  कुछ  तो कमी थी
..
चाहा हमें तुमने , हमने भी चाहा 
प्यार  तेरे  को था हमने  सराहा 
तुम  आसमान  थे और मैं ज़मीं  थी 
तेरे  मेरे  प्यार  में  कुछ तो कमी थी
..
चली  तेरे  पीछे  तुम  रहे  आगे
लाचार हुए हैं तकदीर के आगे 
न जाने क्यों अपनी किस्मत थमी थी 
तेरे   मेरे  प्यार  में  कुछ  तो कमी थी
..
टूट गए दिल अपने आँख में नमी थी 
तेरे  मेरे  प्यार  में  कुछ  तो कमी थी

रेखा जोशी 



Monday, 6 May 2024

कुछ हसीन पल

 भर देते असीम खुशियाँ अंतस में 
अक्सर यादों के वोह खूबसूरत लम्हें 
मत खोना उन्हें 
संभाल के रखा कीजिए 
बहुत अनमोल होते हैँ जीवन के 
वोह कुछ हसीन पल 
..
बचपन की हसीन यादें 
गुदगुदा देती हैँ तन मन को 
वोह सखियों सहेलियों से 
लड़ना झगड़ना फिर मान जाना 
वोह  छोटी छोटी सी बातों पर 
हंसना खिलखिलाना 
मत खोना उन्हें 
संभाल के रखा कीजिए 
बहुत अनमोल होते हैँ जीवन के 
वोह कुछ हसीन पल 

रेखा जोशी 

Saturday, 4 May 2024

अब तो अंधेरा भी छाने लगा है

छंदमुक्त रचना 

तुम तो न आए पिया 
तेरे इंतज़ार में 
खोई रही मैं यादों में तेरी 
सुबह से लेकर अब शाम हो गई 
घर आजा सजन प्रीत मैंने निभाई 
दीपक प्यार का भी बुझने लगा है 
अब तो अंधेरा भी छाने लगा है 

गगन की लालिमा दे रही दुहाई
दिख रही मुझसे 
दूर होती मेरी ही परछाई 
डूब रहा सूरज ढल रही शाम 
क्षतिज का सूरज भी जाने लगा है
आ भी जाओ सजन 
अब तो अंधेरा भी छाने लगा है  

रेखा जोशी 


Tuesday, 30 April 2024

छंदमुक्त रचना

छंद मुक्त रचना 

हाल ए दिल क्या कहें अपना 
जो हाल तुम्हारा है 
यही हाल इधर भी है 

न दिन को चैन पाते हैं 
तुम से मिलने की
इक हूक सी उठती है
करवटे बदलते राते गुजरती है
हर धड़कन लेती है नाम तुम्हारा 
मेरी सांसों में समाये रहते हो 
उधर बैचैन तुम हो
इधर बैचन हम हैँ 

हाल ए दिल क्या कहें अपना 
जो हाल तुम्हारा है 
यही हाल इधर भी है 

रेखा जोशी