Monday, 4 November 2024

चिंतन मनन जरुरी है...,


 चिंतन मनन जरुरी है...,

लक्ष्य प्राप्ति के लिए 
शांत मन से चिंतन मनन जरुरी है

मनन कर मन हमारा बन जाता दोस्त
दृढ विचार दृढ मन दृढ संकल्प 
है पथ प्रकाशित करते 
सफलता की मंजिल का 
लक्ष्य प्राप्ति के लिए 
शांत मन से चिंतन मनन जरुरी है

चिंता मत करना रे भैया 
चिंता तो चिता सामान है 
रोगग्रस्त कर देगी तुम्हें जीवन भर 
मन से चिंतन मनन कर  देख 
जीवन सफल हो जायेगा 
लक्ष्य प्राप्ति के लिए 
शांत मन से चिंतन मनन जरुरी है

रेखा जोशी 


Thursday, 25 July 2024

मैं चलता ही गया

करता रहा सामना
मुश्किलों का
जिंदगी के सफर में
और
मैं चलता ही गया

रुका नहीं, झुका नहीं
ऊँचे पर्वत गहरी खाई
मैं लांघता गया
और
मैं चलता ही गया

कभी राह में मिली खुशी
मिला गले उसके
कभी दुखों का टूटा पहाड़
रोया बहुत पर
खुद को संभालता गया
और
मैं चलता ही गया

जीवन के सफर में
कई साथी मिले चल रहे हैं साथ कुछ
यादें अपनी देकर कुछ छोड़ चले गए
और
बंधनों से घिरा
मैं चलता ही गया

चलता ही जा रहा हूँ
और
चलता ही रहूँगा
जीवन के सफर में
अंतिम पड़ाव आने तक
अंतिम पड़ाव आने तक

रेखा जोशी

Wednesday, 3 July 2024

वीराने से रास्ते

प्राकृतिक पहाड़ों के 
आँचल में खूबसूरत हरी भरी 
सुनसान घाटीयां
शहर के शोर ओ गुल से दूर
है कर देती हैं तर ओ ताज़ा
दिल और दिमाग़ को 
सादगी और सकून भरे 
उन वीरान से रास्तों की चुप्पी से 
लगता है अनजाना सा भय भी 
दिल के किसी कोने में 
इतने शांत और निर्मल वातावरण में भी 
कभी कभी दूर बैठे कौवे की 
कांव कांव भी 
डरा जाती है भीतर तक
लेकिन फिर भी वीरान से रास्तों पर 
चलना अच्छा लगता है 

रेखा जोशी 

 

आंखे मिलाने से

जब आंखो ही आंखो से होती है बात 
तब धड़कने लगता है दिल बेचारा 
नासमझ पगला यूँही दीवाना हो जाता है 
आंखे मिलाने से 

है आंखो ही आंखो में जब होते इशारे 
नहीं रह पाता दिल बस में हमारे 
बेबस हो जाता यह दिल बेचारा
चाहने लगता प्रियतम का सहारा 
इक हूक इक कसक उठती है सीने में 
ख्वाब हजारों लगते हैं सजने 
है जग जाती आस मिलन की
दिल दीवाने को 
नासमझ पगला यूँही दीवाना हो जाता है 
आंखे मिलाने से 

रेखा जोशी 




Wednesday, 26 June 2024

सर्वगुण सम्पन्न लाडली

माँ बाप नें 
अपनी लाडली बिटिया को 
देकर संस्कार अच्छे 
बना दिया लाडली को सर्वगुण सम्पन्न 
..
पढ़ाया लिखाया उसे
निपुण बनाया घर के काम काज में 
छोटे बड़ों का आदर भी 
करना सिखाया उसे 
सिखाया जिंदगी जीने का हुनर भी
बना दिया लाडली को सर्वगुण सम्पन्न  
..
दक्ष थी लाडली उनकी हर कार्य में 
उतार लाती वो स्वर्ग घरा पर 
बना देती घर को जन्नत 
लेकिन मिली ससुराल में रुसवाई
उसकी सर्वगुण सम्पन्नता 
किसी को रास नहीं आई 

रेखा जोशी 





Tuesday, 25 June 2024

बिखरा संगीत प्रकृति के कण कण में

है बिखरा संगीत प्रकृति के कण कण में
गूंज रही ध्वनि ओम की 
ब्रह्माण्ड के सुर ताल में 
 
करती शांत मन सबका 
झरने की सुरीली ताल 
नवयौवना की मस्त चाल सी 
लहराती बलखाती गुनगुनाती 
अठखेलियां लुभाती नदी की 
टिप टिप बरसता अंबर से पानी 
झूम झूम जाता है मनुआ 
नाचे मोर वन उपवन में 
चहके पंछी कोयलिया कुहूके
गुनगुन भंवरे गुनगुनाते 
है बिखरा संगीत प्रकृति के कण कण में
गूंज रही ध्वनि ओम की 
ब्रह्माण्ड के सुर ताल में 

रेखा जोशी 





Monday, 27 May 2024

बहुत करीब से देखा है तुम्हेंजिंदगी

बहुत करीब से देखा है तुम्हें

जिंदगी

बच्चों के पेट की खातिर

देखा है माँ को मजबूर होते हुए

न चाहते हुए भी बिक जाती वो

बहुत करीब से देखा है तुम्हें

जिंदगी

..

देखा है नन्हें नन्हें हाथों को

पुस्तकों की जगह

ढो रहे बोझ अपने घर का

किसी को हँसाती और किसी को

रुलाती

किसी के हिस्से बांटे खुशिया

किसी के नसीब में ग़मों का साया

बहुत करीब से देखा है तुम्हें

जिंदगी