Friday, 14 December 2012

आईना झूठ बोलता है

कहते है कि आईना कभी झूठ नहीं बोलता,आईने की इसी खूबी के कारण  , बेचारी नन्ही सी राजकुमारी स्नो वाईट को ,अपनी सौतेली माँ के ज़ुल्मों का शिकार होना पड़ा|  जितनी बार  उसकी माँ आईने से  पूछती ,''आईने, आईने बता सबसे सुंदर कौन ,' आईना बेचारा कैसे झूठ बोलता  ,वो हर बार यही कहता ,''स्नो वाईट और उसकी माँ के गुस्से का पहाड़ टूट पड़ता उस नन्ही सी जान पर | शुक्र है कि उसे सात बौने मिल गए ,जिन्होंने उसकी दुष्ट माँ से उसकी रक्षा की,वरना  वह   उसे मरवा ही देती |स्नो वाईट को तो बौनों ने बचा लिया ,मगर आईना बेचारा परेशान और दुखी हो गया कि उसके कारण प्यारी सी स्नो वाईट को कैसे कैसे दुःख और मुसीबतें झेलनी पड़ी ,वो कुछ कुछ सावधान हो गया, जब  विभिन्न विभिन्न मुखौटे ओढ़े  तरह तरह के लोग उसके सामने आते तो वह थोडा धुंधला जाता और उन लोगों की असलियत को छिपा जाता | झूठ की चादर लपेटे लोग भी सत्यवादी कहलाने लगे |धोखेबाज़ दुष्ट और फरेबी लोगो का बोलबाला होने लगा क्यों कि आईने ने अब सच का दामन छोड़ दिया था |मेरी तरह के गिने चुने लोग चिल्ला चिल्ला कर कहते ,'आईना झूठ  बोलता है ,आईना झूठ बोलता है '',लेकिन सब बेकार ,आईना तो सबूत था उनकी सच्चाई का | अभी हाल ही में मेरी मुलाकात हुई ,ऐसे ही एक करोडपति सज्जन पुरुष से ,जो एक लम्बी बीमारी से उठे थे ,वो जब भी मिलते ,यही कहते ,'',मैने मौत को बहुत करीब से देखा है ,अस्पताल में सारा दिन बिस्तर पर पड़ा पड़ा यही सोचा करता था ,कि मेरे जैसा मूर्ख दुनिया में कोई नहीं ,जो मै पैसे का घमंड करता रहा ,आज मेरे पास इतनी दौलत होने पर भी मै अपने को नहीं बचा पाया तो क्या फायदा'',और वो खूब धर्म करम की बाते किया करते |मै भी उनकी बातो में आ गयी ,सोचा शायद बीमारी में आईने ने इन्हें इनका असली चेहरा दिखा दिया हो ,चलो देर आये दुरुस्त आये ,वह किसी आश्रम में भी जाने लगे |एक दिन वो फिर मुझे मिले ,जनाब नई औडी गाडी में सवार थे ,वही पुराने रंग ढंग ,वही पैसे का गरूर |इंसान की फितरत को इतनी जल्दी रंग बदलते देख मै दंग रह गयी | ओफ हो, अब समझी उनके पैसे के गरूर और घमंड से आईना फिर से धुंधला पड़ गया,वह उन सज्जन को वही दिखाने  लगा जो वह देखना चाहते थे |, अब आप लोग भी सावधान हो जाइए ,आगे से जब भी आप आईने में देखे तो ,उसे पहले  साफ़ कपड़े से जरूर पोंछ लीजिये ताकि आईना झूठ न बोल सके |

6 comments:

  1. मित्रों!
    13 दिसम्बर से 16 दिसम्बर तक देहरादून में प्रवास पर हूँ!
    इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (16-12-2012) के चर्चा मंच (भारत बहुत महान) पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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  2. आदरणीय डा रूपचन्द्र शास्त्री मयंक जी ,प्रतिक्रिया और साईट पर आने के लिए हार्दिक धन्यवाद ,चर्चा मंच पर मेरी रचना की प्रविष्टि पर हार्दिक आभार

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  3. sundar prastuti अब आप लोग भी सावधान हो जाइए ,आगे से जब भी आप आईने में देखे तो ,उसे पहले साफ़ कपड़े से जरूर पोंछ लीजिये ताकि आईना झूठ न बोल सके |

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  4. APKA HARDIK DHNYVAAD MADHU JI ,AISE HI UTSAAH BADHAATE RAHIYE ,ABHAR

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  5. आईने में देखे तो ,उसे पहले साफ़ कपड़े से जरूर पोंछ लीजिये ताकि आईना झूठ न बोल सके ...सही सीख

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    1. धन्यवाद रश्मि जी उत्साह बढ़ाने के लिए ,आप मेरी साईट पर आई बहुत अच्छा लगा ,आभार

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