Saturday, 29 October 2022

How to overcome depression

Depression is nothing but only your own state of mind,nothing can trouble you more than your own thougts and once your thought process started, it continues to think negative and takes a person to the depths of negativity, to one’s own imaginary world, which actually does not exist .

A few suggestions to overcome depression are

Breaking up of the pattern of negative thought process by deep breathing or pranayam.

Taking up a hobby like listening music, singing, dancing, reading. or any of one’s own interest.

Writing one’s all thoughts that troubled a person in a diary .

Walking or jogging do help to overcome depression

Do meditation atleast for fifteen minutes,It's very helpful and trains the mind to be in present than to be in past or in future with unnessary thoughts.

Try to accept challenges in life and be resposible for whatsoever is happening in one’s life instead of blaming others.

Life is like a wave with highs and lows and is to be lived and one should ive happily, success and failure are two faces of same coin in everyones life and evryone has to go through it So be happy and make others happy.

Rekha Joshi

Tuesday, 28 June 2022

छन्द प्रज्ञा मुक्तक

मुक्तक

सुन्दर काया, झूमो गाओ ,देखो प्रीत बढाएंगे
सब को हँसाओ, आओ साथी ,दोनो रीत निभाएंगे
प्रियतम मेरे, मीठी वाणी, डाली कोयलिया बोले
सुमधुर बोली,गाती भाती, गोरी की सखियां बोलें

रेखा जोशी




Saturday, 25 June 2022

गुनगुनाता हूँ गीत नया गाता हूँ

गुनगुनाता हूँ  
गीत नया गाता हूँ

भले ही कठिन
हैं राहें ज़िन्दगी की
हर पल मुस्कुराता हूँ
ज़िंदगी  जीना चाहता हूँ
गुनगुनाता हूँ  
गीत नया गाता हूँ

कितना मनमोहक
है सौंदर्य प्रकृति का
बिखरा चहुँ ओर मेरे
खूबसूरत नजारों का
आंनद लेना चाहता हूँ
गुनगुनाता हूँ  
गीत नया गाता हूँ

दो दिन की ज़िंदगी में
फूल खुशियों के
बिखेरना चाहता हूँ
गुनगुनाता हूँ  
गीत नया गाता हूँ

रेखा जोशी


गीतिका आधार छन्द हीर

गीतिका

रूठ न हमसे प्रियतम ,आज यह क्या किया
हां सच यह  प्रीत सजन ,तोड़ दिल क्यों दिया

आज खिल उठा मधुबन मौसम  तड़पा रहा
गीत मधुर गा कर मन,झूम  खिल उठा हिया

बादल अँगना घिर जल ,आकर बरसा रहा
साजन मनभावन पिया, लागे न सजना जिया

शाम सुबह गीत मधुर,  कोयल अब गा रही
आज महकता उपवन ,फूल खिल गए पिया

हार हम गए  साजन, जीत तुम पिया गए
छोड़ कर चले प्रियतम, आज तुम हमें पिया

रेखा जोशी




Sunday, 19 June 2022

पितृ दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

पिता प्रणेता
सुरक्षा कवच ज़िंदगी का 
रहती हूँ निर्भय मै 
साया सिर पर जब होता उसका

गोदी में अपनी खिलाया
ऊँगली पकड़ चलना सिखाया
धन्य हुई पा कर
आपार स्नेह अपने पिता का
मिला है बल मुझे उनसे सदा

शत शत नमन उस ईश्वर का 
जो अवतरित हुआ 
इस धरती पर 
दिखाया जिसने अपना रूप 
बन कर मेरे प्यारे पिता

रेखा जोशी

Friday, 17 June 2022

बाल कविता

बाल कविता 

चलो आज आसमाँ की 
करते हैं सैर 
बादलों के रथ पर 
हो के सवार
निकल पड़े नन्हें मिया 
थाम किताबें  हाथ
कल्पना की सीढ़ी से
पहुंचे चंदा के द्वार
देख अद्भूत  नजारा 
गगन का 
हुआ दिल बाग बाग 
क्या सुहाना था मौसम 
मुस्करा रहा था चांद 
चाँदनी रात और शीतल हवा 
कितना सुन्दर था सपना सुहाना 
खुल गई नींद लेकिन 
आँखों में अभी भी थे वो 
सुन्दर नजारे 
वो बादल, आसमाँ 
और 
मुस्कराता चांद 

रेखा जोशी 


पैसा ही बस दीन ईमान पैसा ही सब कुछ

दुनिया में इक दूजे से सबको जलते देखा
स्वार्थी इंसानों को आपस में  छलते देखा
पैसा ही बस दीन ईमान पैसा ही सब कुछ
पैसों की खातिर सब रिश्तों को बदलते देखा

रेखा जोशी

कान्हा मुरलिया खूब बजाये रे

कान्हा मुरलिया खूब बजाये रे
राधा को कृष्णा खूब सताये रे
,
है मोर मुकुट पीताम्बर धारी
छवि मोहन की सभी को भाये रे
,
बलिहारी जाए मैया यशोदा
मोहन की मोहक खूब अदाएं रे
,
छाया सब ओर बंसी का जादू
कान्हा राधिका रास रचाए रे
,
झूमें गोपियां ग्वाले भी संग
धूम गोकुल में सभी मचाये रे

रेखा जोशी

Thursday, 16 June 2022

गाय

देती  अमृत  सा  दूध  हमें  ऐसी  गौ  माता है
दूध दही और घी मक्खन हम सबको भाता है
धन्य  धरती भारत  की पूजी  गाय जाती जहाँ
सेवा  करे  जो  इसकी  भवसागर तर जाता है

रेखा जोशी






  

ओम की गुंजन

ओम की गुंजन

ओम के जाप से हो जाता शान्त मन
गूंज से इसकी  हो जाता कंपित तन

वेदों में  बतलाया ओम का स्वरूप
महिमा ओम की है सदा सत्य सनातन

ओ उ  म में है समाया  सारा ब्रह्माण्ड
गूंगा भी करता है ओम का उच्चारण

जप कर ओम ओम कल्याण होगा सबका
ओम  ही   साकार   रूप   ओम ही  निर्गुण

ओम  नाम  से कट  जाते  सभी के पाप 
है कण कण में  समाई ओम की गुंजन

रेखा जोशी

Thursday, 2 June 2022


शीर्षक  "शर्माता है चाँद"(नवगीत)


रात में चमकता चाँद

चांदनी बिखेरता सागर के आंचल पर 

झिलमिलाता है चाँद

,,

आ गए हम कहाँ

परियों के देश में

धवल चाँदनी यहाँ

राह पर बिखराता है चाँद

..

दीप्त चाँदनी सा दमकता

सुन्दर चेहरा तेरा 

ज्यों गगन पर

जगमगाता है चाँद
..

आये महफ़िल में तेरी सजन

संग संग टिमटिमाते तारे लिए

उतर आया धरती पर

अब मुस्कुराता है चाँद

,,

सुंदर चेहरा

छिपा लिया बंद पलकों में हमने

देख  हमें

यहाँ शर्माता है चाँद

रेखा जोशी

Tuesday, 31 May 2022

मेरी कुछ अधूरी ख्वाहिशें

उड़ रही,रंग बिरंगी तितलिया

मेरी ख़्वाहिशों की बगिया में

झूला रही मदमस्त पवन

फूलों से लदी डालियाँ

महकने लगी 

मेरी  कुछ अधूरी ख्वाहिशें

,,

ठिठकती कभी पेड़ों की झुरमुट पे

पूरा होने पर

थिरकती कभी  नाचती अँगना में 

ख्वाहिशें मेरी ख्वाहिशें

चूमती श्रृंखलाएं कभी पर्वत की

लौट आती कहीं पर  छोड़ गूंज अपनी

मेरी कुछ अधूरी ख्वाहिशें

,

बादलों सी गरजती कभी

बरसती बरखा सी कभी

भिगो जाती तन मन मेरा

बिखर जाती धरा पर कभी

नित नई ख्वाहिशें

बुनती रहती ताना बाना

रंग भरती, रस बरसाती

जीवन में मेरे

मेरी कुछ अधूरी ख्वाहिशें

रेखा जोशी

Monday, 2 May 2022

हाइकू

हाइकु

जय गणेशा

हे सिद्धि विनायक

विघ्न  हरता
,
हे गजानन

हमें दो रिद्धि सिद्धि

अभिनंदन
,
गौरी नंदन

हे गणपति देवा

तुम्हे नमन
,
एक दंत हो

मनभावे मोदक

पूजें तुमको


रेखा जोशी

Thursday, 14 April 2022

क्षणिकाएं

क्षणिकाएं

मौत का 
सामान लिए हम
खेलते रहे
जी भर ज़िन्दगी से
उफ न की कभी
यूँही मुस्कुराते रहे
,
उम्र भर
प्यार किया
आग के शोलों से
चिंगारियों से
जलते रहे
कसम खुदा की
प्यार निभाया हमने

रेखा जोशी

Saturday, 2 April 2022

सभी मित्रों को ''नवरात्रि ,नव संवत नव वर्ष "की हार्दिक शुभकामनाएँ 

जय माता दी

एक नाम ,एक ओमकार ,एक ही ईश्वर और हम सब उस परमपिता की संतान है जिसने हमे इस दुनिया में मनुष्य चोला दे कर भेजा है और धर्म एक जीवन शैली का नाम है ,धर्म के पथ पर जीवन यापन कर हम उस परमपिता परमात्मा को पा सकते है |''|रिलिजियन धर्म  का पर्यायवाची हो ही नही सकता ,जहाँ रिलिजियन में विभिन्न विभिन्न सुमदाय के लोग अपने ही ढंग से ईश्वर की पूजा आराधना करते है ,वहां धर्म जिंदगी जीने के लिए मानव का सही  मार्ग दर्शन कर इस अनमोल जीवन को सार्थक बना देता है |हमारे वेदों में  भी लिखा है ,''मानवता ही परम धर्म है '',और हम सब ईश्वर के बच्चे क्या एक दूसरे के साथ प्रेम से नही रह सकते ?क्यों हम विभिन्न सुमदायों में बंट कर रह गये है ?सोचने का विषय है |

जय माता दी

रेखा जोशी

Saturday, 26 March 2022

विद्यार्थी जीव्न और सच्चाई

विद्यार्थी जीव्न और सच्चाई

विद्यार्थी जीवन किसी भी  व्यक्ति के जीवनकाल का सुनहरा समय होता है जिसमे वह ज्ञान प्राप्ति के  साथ साथ अपने चरित्र का भी  निर्माण करता है।विद्यार्थी जीवन का सबसे बड़ा दुश्मन आलस है,इस समय उसे आलस्य त्याग कर मानसिक एवं शारीरिक परिश्रम करना चाहिए . परिश्रमशील छात्र का जीवन ही सदा सुखमय रहता है । विधार्थियों को इस समय में पूर्ण अनुशासित होकर अपने गुरुओं का आदर कर अपने जीवन को आदर्श जीवन बनाना चाहिए।

इस समय शिक्षकों और अभिभावकों का भी कर्तव्य है कि वह भावी पीढ़ी का चरित्र निर्माण कर उन्हें सच्चाई के मार्ग पर चलना सिखाये ,भले ही इस राह पर चलने के उन्हें कई कठिनाईयो का सामना करना पड़ सकता है ,लेकिन अंत में जीत सच्चाई की ही होती है ।एक सच्चा व्यक्ति जीवन में सदा नैतिकता की राह पर चलेगा और सब  बुराईयों से दूर रहेगा ।सच्चाई के मार्ग पर चलने वाला विद्यार्थी  सदा समाज और देश के हित के बारे में ही सोचेगा और वैसा ही कर्म भी करेगा देश के उत्थान की नींव विद्यार्थी जीवन में ही पड जाती है क्योकि आज का विद्यार्थी ही कल को देश का कर्णधार होगा ।

रेखा जोशी

Friday, 18 March 2022

होली की हार्दिक शुभकामनाएं

होली पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं


उपवन सजा हुआ है अब फूल मुस्कुराएं 

हम  आज  गीत  गाएँ  होली मिल मनाएं

.. 

छाई  बहार मौसम भी है खिला खिला सा

है  रंग छलकते भूलें शिकवे गले लगाएं 

.. 

नीले. हरे   सभी  सुन्दर चेहरे   रंगे  हैं

होली सखी खेलों पिचकारी पिया चलाएँ 

.. 

नाचे सभी मचायें हुड़दंग बहार आई 

भीगा पिया बदन और मदमस्त हैं फिजाएं


आया मधुमास सखी है आस पिया मिलन की

देखो बुला रही प्रियतम  शीतल ये हवाएं



रेखा जोशी 



 


Tuesday, 1 March 2022

नारी उत्थान

नारी उत्थान (महिला दिवस पर विशेष) 

एक सवाल आज मै नारी तुम से ही पूछती हूँ ,"बता कैसे होगा तेरा उत्थान" ,बलात्कार हो या यौन शोषण,अपने तन ,मन और आत्मा की पीड़ा को अपने अंदर समेटे सारी जिंदगी अपमानित सी घुट घुट कर कब तक जीती रहोगी ,मत कर इंतज़ार राम का ,आज कोई राम नही आएगा अहल्या को तारने ,तुम्हे अपने अंदर की दुर्गा को ,चंडी को जगाना होगा,तुम्हे खुद ही आगे आ कर अपना संघर्ष करना होगा ।

जब भी कोई बच्चा चाहे लड़की हो या लड़का इस धरती पर जन्म लेता है तब उनकी माँ को उन्हें जन्म देते समय एक सी पीड़ा होती है ,लेकिन ईश्वर ने जहां औरत को माँ बनने का अधिकार दिया है वहीं पुरुष को शारीरिक बल प्रदान किया ।महिला और पुरुष दोनों ही इस समाज के समान रूप से जरूरी अंग हैं लेकिन हमारे धर्म में तो नारी का स्थान सर्वोतम रखा गया है , नवरात्रे हो या दुर्गा पूजा ,नारी सशक्तिकरण तो हमारे धर्म का आधार है । अर्द्धनारीश्वर की पूजा का अर्थ यही दर्शाता है कि ईश्वर भी नारी के बिना आधा है ,अधूरा है। । इस पुरुष प्रधान समाज में भी आज की नारी अपनी एक अलग पहचान बनाने में संघर्षरत है । जहाँ बेबस ,बेचारी अबला नारी आज सबला बन हर क्षेत्र में पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिला कर चल रही है वहीं अपने ही परिवार में उसे आज भी यथा योग्य स्थान नहीं मिल पाया ,कभी माँ बन कभी बेटी तो कभी पत्नी या बहन हर रिश्ते को बखूबी निभाते हुए भी वह आज भी वही बेबस बेचारी अबला नारी ही है । शिव और शक्ति के स्वरूप पति पत्नी सृष्टि का सृजन करते है फिर नारी को क्यों मजबूर और असहाय समझा जाता है ।

अब समय आ गया है सदियों से चली आ रही मानसिकता को बदलने का और सही मायने में नारी को शोषण से मुक्त कर उसे पूरा सम्मान और समानता का अधिकार दिलाने का ,ऐसा कौन सा क्षेत्र है जहां नारी पुरुष से पीछे रही हो एक अच्छी गृहिणी का कर्तव्य निभाते हुए वह पुरुष के समान आज दुनिया के हर क्षेत्र में ऊँचाइयों को छू रही है ,क्या वह पुरुष के समान सम्मान की हकदार नही है ?तब क्यूँ उसे समाज में दूसरा दर्जा दिया जाता है ?केवल इसलिए कि पुरुष अपने शरीरिक बल के कारण बलशाली हो गया और नारी निर्बल ,नही नारी तुम निर्बल नही हो,तुम असीम शक्ति का भण्डार हो ,तुम्हे खुद को पहचानना है ,अपमें अंदर के आत्मविश्वास को जगाना होगा ,खुद का सम्मान करना होगा ,तुम्हारे उत्थान के रास्ते खुद ब खुद निकल आयेंगे ।

रेखा जोशी

Monday, 31 January 2022

समाचार पत्र


अखबार से मिले हमें,लोकतंत्र का ज्ञान
पढ़ने को नित ही मिलें नेताओं के ब्यान
,,
चोरी डकैत की खबर,भरा पड़ा अखबार 
 लूट खसोट करें कई ,पढ़ें नित समाचार
,,
पेट के लिए बेचते, घर घर सभी द्वार
साईकिल पे घूम कर,  पहुँचाते अखबार
,,
पढ़ो अगर अखबार तो ,भरे ज्ञान भंडार
दुनिया को फिर जान कर,ज्ञान का हो विस्तार
,,
ठंड या गर्म हो हवा, नहीं करें आराम
घर से पड़ते ये निकल, करते अपना काम

रेखा जोशी


Wednesday, 12 January 2022

जी ले ज़िन्दगी अपनी

ख्वाब नहीं है ज़िन्दगी
कहते है अक्सर लोग
माना ज़िन्दगी है हकीकत लेकिन
देखते ही रहते हैं ख्वाब और
ताउम्र लगे रहते हैं
पूरा करने उन्हीं को
,,,
लम्हा लम्हा ज़िन्दगी
रेत सी फिसल रही हाथों से
लम्हा लम्हा बहुत कुछ
है छूट रहा हाथों से
जी ले ज़िन्दगी अपनी
इससे पहले कि छूट जाए
ज़िन्दगी ही हाथों से
,,
कितना प्यारा मौसम है
खुश हैं ज़मी खुश आसमाँ
महकती धरा
छाया सब ओर नशा
बाहें फैलाये पुकारे तुम्हे
कहाँ हो ज़िन्दगी
आ जाओ ना

रेखा जोशी