Friday, 13 March 2026

नव भोर

शीर्षक  नव भोर

"आज भी कोई मछली जाल में नही आई "राजू ने उदास मन से अपने साथी दीपू से कहा l दोनों मछुआरे अपनी छोटी सी नाव में सवार सुमुद्र में मछलियाँ पकड़ने सुबह से  ही घर से निकले हुए थे l उनके  पास थोड़ा सा खाना और पीने का पानी था, जो शाम होते होते खत्म हो चुका था, तभी राजू को सुमुद्र में फैंके जाल में हलचल महसूस हुई और जाल भारी भी लगा, उसके चेहरे पर ख़ुशी की लहर आ गई l वह जोर से चिल्लाया,"दीपू हमारी मेहनत सफल हो गई, लगता है जाल में काफी मछलियाँ फंस गई हैँ, आओ दोनों मिलकर जाल ऊपर खींचते हैँ l

 मछलियों को देख दोनों ख़ुशी से उछल पड़े, लेकिन जैसे उनकी ख़ुशी को किसी की नज़र लग गई, आसमान में घने बादल छा गए, तेज होती हवाओं से उनकी नाव लड़खड़ाने लगी और उनकी ज़िन्दगी में तूफान दस्तक दे चुका था, शाम ढलने को थी,लहरों पर तेज़ी से झूलती नाव हिचकोले खाने लगी और कश्ती  में सुमुद्र  का का पानी भरने लगा, राजू और दीपू के चेहरे की रंगत बदल गई, आज उनकी परीक्षा की घड़ी थी l दोनों बाल्टी से नाव में भरते पानी को निकाल सुमुद्र में फेंक रहे थे और जी जान से नाव को संभालने की कोशिश करने लगे, लेकिन प्रकृति के आगे उनके हौसले कमजोर पड़ गए l 

वह दिशा भटक गए थे, अँधेरी रात, बारिश, दिशाहीन लड़खड़ाती नाव और तेज तूफान में वह दोनों फंस चुके थे l उसी आंधी तूफान में दीपू को दूर एक चमकीली रोशनी दिखाई दी, सुमुद्र की ऊँची ऊँची लहरों के थपेड़ों से उनकी कश्ती चरमराने लगी थी, फिर भी दीपू ने दम लगा कर नाव का रुख उस "लाइट हाउस" की ओर मोड़ दिया, दोनों बुरी तरह से थक चुके थे, हार कर उनके हाथ से पतवार छूट गई  उस भयंकर तूफान से लड़ते लड़ते वह दोनों बेहोश हो गए, कब रात बीती कब सुबह हुई, वह दोनों बेखबर नाव में ही गिर हुए थे l 

तेज सूरज की रोशनी से जब राजू की आँख खुली तो उनकी नाव सुमुद्र के किनारे पर थी और तूफान थम चुका था, कुछ लोग उनकी नाव के पास खडे थे, उन लोगों ने उन्हें उस टूटी नाव से बाहर निकाला दीपू और राजू सहित वहाँ खडे सभी लोग हैरान थे की वह इतने भयंकर तूफान से कैसे बच गए दोनों ने उगते सूरज को प्रणाम किया, यह सुबह उनके जीवन की इक नव भोर थी उन्हें नया जीवन जो मिला था l

रेखा जोशी

Tuesday, 10 March 2026

क्या आप overthinking करते हो?

#“अगर आप overthinking करते हो तो ये सुनो, यह message आपके लिए है 
“आप जितना सोचते हो, वह सब आपके दिमाग की अपनी creation है, imaginary है और Overthinking हमें उस दर्द, पीड़ा में ले जाती है जो हुआ ही नहीं।”,
दरअसल आपका दिमाग है न,यही आपको डराता रहता है 
इसलिए आज से थोड़ा सोचना कम कीजिए 
और जिंदगी जीना शुरू कीजिए, present मे रहिए, महसूस कीजिए जिंदगी सचमें बहुत खूबसूरत है 
“अगर आप भी overthink करते हो
तो comment में लिखो — Stop Thinking”

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Friday, 6 February 2026

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Friday, 14 November 2025

खूब जला वो दिया

खूब जला वो दिया पर

अँधेरा दूर न कर सका

किया भी तो कुछ पल के लिए

दो दिन की रोशनी नें एहसास दिलाया

शायद अब न आएगा अंधियारा

..

दिया जलता रहा जलता रहा

था ह्रदय में विश्वास

वह रोशन करेगा संसार

थी उम्मीद और आस भी

किया संकल्प उसने

दी अपनी ज्योति

असंख्य दियों को उसने

फैलाई रोशनी चहुँ ओर उसने

मिटाया अंधकार हुआ चमत्कार

जगमगाने लगे सब ओर

दिये ही दिये

उजियारा हुआ पूरा संसार

उजियारा हुआ पूरा संसार

रेखा जोशी

Friday, 10 October 2025

करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाएं

सज धज के पिया मैंने सोलह सिंगार किया 
माथे सजाई बिंदिया चाँद का दीदार किया 
..
तुझसे ही है प्रियतम सब रंग मेरे जीवन के 
प्रार्थना तेरे लिए रब से सौ बार किया 
..
जीवन में सजन आए मेरी ज़िन्दगी संवारी 
सजाये सपनें मैंने तुमने ही साकार किया 
..
जन्म जन्म के साथी मेरे साजन तुम्हीं तो हो 
हर जन्म तुमसे तो मैंने ही प्यार किया 
..
आती रहें खुशियाँ साजन हमारे अँगना 
जीवन अपना सारा तुम पे ही निसार किया 

रेखा जोशी 

Thursday, 2 October 2025

विजयादशमी की हार्दिक बधाई

विजयादशमी की हार्दिक बधाई

जलता है रावण धू धू कर 
भारत में हर वर्ष हर गली हर शहर 
रावण बुराई का प्रतीक, उसे जला कर
है अच्छाई जाती जीत
क्या वास्तव में रावण के पुतला जलाने पर
बुराई हो जाती भस्म राख बन कर
है रहता रावण हमारे अंतस में
रावण मरता नहीं कभी
अमृत नाभि में उसके है अभी भी
बार बार जीवित हो उठता
हमारे अंतस का रावण
है मिटाना गर बुराई को तो 
झाँक ले अपने भीतर
जला कर अंतस के रावण को 
खाक होंगी बुराई तभी फिर
ध्वज लहराएगा अच्छाई का सब ओर फिर

रेखा जोशी




Tuesday, 9 September 2025

हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

कैसे करूँ यशगान,हिंदी हमारी शान
सबसे निराली भाषा,समेटे स्वयं में ज्ञान

प्रेमचंद की कहानि‍यां
महाकवि निराला की निराली रचनाएँ
मंत्र मुग्ध कर देती जयशंकर प्रसाद जी की 
अनुपम रचनाएँ कविताएँ
किस किस का नाम लिखूँ अनमोल रतन सारे
भारत की संस्कृति  हिंदी, है हमारी पहचान

कैसे करूँ यशगान हिंदी हमारी शान
सबसे निराली भाषा,समेटे स्वयं में ज्ञान

सहज सरल भाषा यह
अनुपम अलंकृत शब्द इसके
सुन्दर अप्रतिम सीधे उतरते दिल में हमारे
यह मातृभाषा हमारी.है हमारा स्वाभिमान

कैसे करूँ यशगान हिंदी हमारी शान
सबसे निराली भाषा,समेटे स्वयं में ज्ञान

महादेवी वर्मा, पंत, दिनकर, जगमगाते सितारे
वंदन अभिनंदन करते हम
चमकेंगे युगों युगों तक ज्यूँ अंबर में चंदा तारे
राष्ट्र भाषा का कब मिलेगा इसे मान सम्मान

कैसे करूँ यशगान हिंदी हमारी शान
सबसे निराली भाषा,समेटे स्वयं में ज्ञान

रेखा जोशी