Tuesday, 19 October 2021

शरद पूर्णिमा

अमृत रस की किरणें नभ पर शरद का चाँद

निखरी धवल चाँदनी संग सोलह कला चाँद

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तन मन शीतल करे बिखरी चाँदनी धरा पे

रोग सारे दूर करे गगन से निहारता चाँद

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शरद की उज्जवल चाँदनी नभ निकला चाँद

है छाई मदहोशी गगन गुनगुनाता चाँद

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रास रचाये कान्हा आज गोपियों के संग

राधा नाचे निधिवन अम्बर मुस्कुराता चाँद

रेखा जोशी

Monday, 20 September 2021

राही चल अकेला

गीत

राही चल अकेला

आया है सो जाएगा

अजब प्रभु का खेला

अकेला, राही चल अकेला

सुख दुख की ये जीवन राहें

कर ले जो तू करना चाहे

है जीवन दो दिन का मेला

अकेला,राही चल अकेला

बहती जाए वक़्त की धारा

वक़्त से हर कोई हारा

रुके नहीं समय का रेला

अकेला, राही चल अकेला

राही चल अकेला

राही चल अकेला

रेखा जोशी

Thursday, 19 August 2021

मुक्तक

जय शिव शंकर भोलेनाथ दुख हरता
दर्द का  सागर  प्रतिदिन जाता भरता
हलाहल पीना तुम मुझे भी सिखा दो
कर जोड़  अपने  प्रार्थना  प्रभु करता
रेखा जोशी

Friday, 13 August 2021

हिंदोस्तां हमारा,दुनिया से है ये न्यारा

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं

हिंदोस्तां हमारा,दुनिया से है ये  न्यारा
चमके जहां में ऐसे ज्यों आसमान तारा
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उत्तर खड़ा हिमालय आकाश छू रहा है
दुश्मनों को हमारे ये  मात  दे  रहा है
रक्षा  कर रहा ये प्रहरी बना है हमारा, 
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फसलें हरी भरी सी है लहलहा रही
मेहनत किसानों की क्या, खूब रंग ला रही
भरता है पेट सबके सबका है ये प्यारा
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साधु जनों की हस्ती, पावन है इसकी भूमि
है बहती सदा रही यहाँ नदियाँ ज्ञान की
जीवन नया मिला है अमृत की सी धारा
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माटी लगाएं माथे, चूमें धरा हम इसकी
मिलकर गीत गायें  जननी है ये हमारी
अर्पण करेंगे इस पर, जीवन अपना सारा
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हिंदोस्तां हमारा,दुनिया से है ये  न्यारा
चमके जहां में ऐसे ज्यों आसमान तारा



रेखा जोशी

Friday, 30 July 2021

"थाली ". नवगीत

कैसी यह दुनिया, कैसा संसार
रहना यहाँ संभल कर 

दूर रहो ऐसे लोगों से 
लूटते बनाकर जो अपना 
खाते हैं जिस भी थाली में वोह 
करेंगे छेद वहाँ पर

नहीं भरोसे के काबिल 
करते अपना वोह उल्लू सीधा 
लुढकते रहते 
थाली में बैंगन जैसे 
इधर कभी उधर
उधर कभी इधर

चलते बनते वहाँ से वोह 
मतलब निकल जाने के बाद 
जिंदगी में साथ निभाए जो 
थामना हाथ उसका पहचान कर 
मिल जाए जो साथी ऐसा जीवन में
बन जाएगा फिर  सफ़र सुहाना
बन जायेगा फिर सफ़र सुहाना

रेखा जोशी 





Wednesday, 28 July 2021

डूबना इश्क में नहीं हमें किनारा चाहिए

पास रहना तुम सदा तेरा सहारा चाहिए
खूबसूरत जीवन का हमें नज़ारा चाहिए

प्यार में सबने पिया है जाम उल्फत का सजन
डूबना इश्क में नहीं हमें किनारा चाहिए

खूबसूरत ये नज़ारे अब बुला हमको रहें
आज हाथों में हमारे हाथ तुम्हारा चाहिए

चाहतों ने अब हमारी इस कदर मारा हमें
ढूंढ कर तुम उन पलों को फिर दोबारा दीजिए

तुम मिले जो है हमारी खूबसूरत ज़िन्दगी
भूल कर दर्द ओ ग़म जीवन सँवारा कीजिये

रेखा जोशी

Tuesday, 27 July 2021

हाइकु

काली घटाएं
है मौसम सुहाना
मेघा  गरजे
,,
खिली बगिया
हरियाली छा रही
सावन आया
,,
गरजे घन
बदरा बरसते
थिरके तन
,
घिर के आई
है कारी बदरिया
फुहार ठंडी

रेखा जोशी