Friday, 14 November 2025

खूब जला वो दिया

खूब जला वो दिया पर

अँधेरा दूर न कर सका

किया भी तो कुछ पल के लिए

दो दिन की रोशनी नें एहसास दिलाया

शायद अब न आएगा अंधियारा

..

दिया जलता रहा जलता रहा

था ह्रदय में विश्वास

वह रोशन करेगा संसार

थी उम्मीद और आस भी

किया संकल्प उसने

दी अपनी ज्योति

असंख्य दियों को उसने

फैलाई रोशनी चहुँ ओर उसने

मिटाया अंधकार हुआ चमत्कार

जगमगाने लगे सब ओर

दिये ही दिये

उजियारा हुआ पूरा संसार

उजियारा हुआ पूरा संसार

रेखा जोशी

7 comments:

  1. ज्योत से ज्योत जलते चलो.. अकेले नहीं पर असंख्य दीयों को जलाने से हुआ उजाला। उत्तम विचार।

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  2. सुंदर सृजन

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  3. बहुत सुंदर

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  4. आप एक छोटे से दिए के जरिए बड़ी बात कह देते हैं। शुरुआत में दिया अँधेरे से लड़ता दिखता है, फिर वही दिया कई और दियों को रोशनी देता है। मैं पढ़ते समय लगा कि इसी तरह इंसान भी ऐसे ही दूसरों में उम्मीद जगा सकता है।

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