Friday, 22 February 2013

बहार

गीत

मेरे जीवन में तुम आ जाना ;
बन के बहार छा जाना

दूँढू  तुझे इन गलियों में ;
देखूं तुझे इन कलियों में
इन्ही राहों को महकाते हुए
सूनी बाँहों में तुम आ जाना

मेरे दिल में है धडकन तेरी
मेरी आँखों में तेरे आंसू है
मैं तुझमे समां जाऊं
तू मुझमे समां जाना

मेरे जीवन में तुम आ जाना ;
बन के बहार छा जाना

10 comments:

  1. MAIN TUJH MEIN KHO JAAOON
    TOON MUJH MEIN KHO JAANAA ....
    DHOONDHE KOI TO SIRF
    MAIN TERE DIL MEIN
    TOON MER DIL MEINMILNAA ...

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    1. उत्साह वर्धन हेतु आपका आभार राजेंद्र जी

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  2. बहुत ही सुन्दर प्रस्तुति.

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    1. राजेंद्र जी उत्साह वर्धन हेतु आपका आभार

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  3. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (24-02-2013) के चर्चा मंच-1165 पर भी होगी. सूचनार्थ

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    1. धन्यवाद अरुण ,आभार

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  4. बहुत उम्दा ..भाव पूर्ण रचना .. बहुत खूब , अच्छी रचना इस के लिए आपको बहुत - बहुत बधाई
    मेरी नई रचना
    खुशबू
    प्रेमविरह

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    1. हार्दिक धन्यवाद दिनेश जी

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  5. रेखा जी सुन्दर भाव ...
    बधाई

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  6. उत्साहवर्धन हेतु और मेरी साईट पर आने के लिए आपका हार्दिक आभार प्रवीन जी

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