Monday, 27 February 2017

गोकुल में मुरली  मधुर बजाये  कान्हा
है  गोपियों   के संग रास रचायें कान्हा
धुन  मुरली की सुन बाँवरी  हुई   राधा
देख सूरत मन्द मन्द मुस्काये कान्हा

रेखा जोशी

सफलता का मूलमंत्र

प्रिया ने सुबह सुबह अपनी पड़ोसन को मुहँ अँधेरे अपने घर से बाहर निकलते  देखा ,इससे पहले वह उससे कुछ पूछती उसकी पड़ोसन जल्दी जल्दी कहीं चली गई |प्रिया को उसका इस तरह जाना कुछ अजीब सा लगा ,इतना तो वह जानती थी कि आजकल उनके घर के हालात कुछ ठीक नही चल रहे ,उसके पति काफी समय से बीमार चल रहे थे और उसके बेटे की कमाई भी कुछ ख़ास नही थी और वह अंधाधुंध ज्योतिष्यों और तांत्रिकों के पीछे भाग रही थी ,उसकी सोच पर प्रिया को  बहुत दुःख होता था ,क्या ऐसे पाखंडियों के पास कोई जादू का डंडा था जो घुमा दिया तो सारी मुसीबतें खत्म ,बस ''खुल जा सिम सिम ''की तरह  उनकी किस्मत का ताला भी खुल जाए गा और वो पाखंडी बाबा उनका घर खुशियों से भर देगा प्रिया इस तरह के अंधविश्वासों को बिलकुल नही मानती थी ,बल्कि उसका कई बार मन होता था की वह अपनी पड़ोसन को समझाये कि इन सब ढकोसलों से उसे कुछ भी हासिल होने का नही और वह व्यर्थ में इन पोंगे पंडितों पर अपनी खून पसीने की कमाई लुटा रही थी |

इस संसार में हर इंसान की जिंदगी में अच्छा और बुरा समय आता है ,लेकिन  बुरे  वक्त में  इंसान  अक्सर घबरा जाता है और उन परस्थितियों का सामना करने में अपने आप को असुरक्षित एवं  असमर्थ पाता है उस समय उसे किसी न किसी के सहारे या संबल की आवश्यकता महसूस होती है ,जिसे पाने के लिए वह इधर उधर भटक जाता है ,जिसका भरपूर फायदा उठाते है यह पाखंडी पोंगे पंडित |अपनी लच्छेदार बातों में उलझा कर वह शातिर लोग उन्हें बेवकूफ बना कर अपना उल्लू सीधा करते है ,पता नही हमारे देश के कितने लोग ऐसे पाखंडियों के बहकावे में आ कर अपनी  जिंदगी भर की कमाई उन्हें सोंप कर अंत में बर्बाद हो कर बैठ जाते है |अपने बुरे वक्त में अगर इंसान विवेक से काम ले तो वह अपनी किस्मत को खुद बदलने में कामयाब हो सकता है ,आत्म विश्वास,,दृढ़ इच्छा शक्ति ,लगन और सकारात्मक  सोच किसी भी इंसान को सफलता प्रदान कर आकाश की बुलंदियों तक पहुंचा सकती है ।

कुछ दिन पहले प्रिया की मुलाकात एक बहुत ही कामयाब इंसान से हुई थी ,यूँ ही प्रिया ने बातों बातों में उससे उसकी सफलता के पीछे किसका हाथ है ,पूछ लिया ,उसके उत्तर ने प्रिया को बहुत प्रभावित किया ,उसने कहा था कि  अपनी जिंदगी में उसने बहुत कठिन परस्थितियों का सामना किया था लेकिन  जब कभी भी उसे कुछ कर दिखाने का कोई अवसर दिखाई देता  , वह  आगे बढ़ कर उस अवसर को सुअवसर में बदल देता था और उसके पीछे रहती थी उसकी अनथक लगन ,भरपूर आत्मविश्वास और सफलता पाने का दृढ संकल्प ,बस  जैसे ही उन रास्तों पर  चलना शुरू करता ,मंजिलें अपने आप मिलने लग गई थी ,बस यही राज़ था उसके सफलता के द्वार के खुलने का |तभी प्रिया को सामने से अपनी पड़ोसन आती दिखाई दी और वह उससे मिलने और जीवन में  सफलता पाने का मूलमंत्र बताने के लिए उसकी तरफ  चल पड़ी | 

रेखा जोशी 

Saturday, 25 February 2017

आ गई  बहार जो आये हो तुम
चहकने लगी बुलबुल अब दिल की

फूलों पर भंवरे  भी लगे मंडराने
महकने लगा अब आलम सब ओर

तरसती थी निगाहें तुम्हे देखने को
भूल गये अचानक वो रस्ता इधर का

मुद्दते हो चुकी थी देखे हुए उनको
भर दी खुशियों से आज झोली उसी ने

महकती रहे बगिया मेरे आंगन की
खुशिया ही खुशिया बनी रहे दिल में

आ गई  बहार जो आये हो तुम
चहकने लगी बुलबुल अब दिल की

फागुन


 है खिल खिल गये उपवन महकाते संसार
 फूलों  से  लदे  गुच्छे   लहराते  डार   डार
सज रही रँग बिरँगी पुष्पित सुंदर  वाटिका
भँवरें  अब   पुष्पों  पर  मंडराते  बार  बार
......
छाई   चहुँ   ओर  बहार  ही  बहार  है
महकता चमन भी अपना गुलज़ार है
छलकती खुशियाँ अब आँगन  में मेरे
चलती फागुन की जब मस्त बयार है

रेखा जोशी

कन्या पूजन

संवाद ,नारी

शीर्षक  कन्या पूजन
कलाकार
सास
शिखा
राजू(शिखा का पति)

स्टेज पर सास का प्रवेश
सास ,शिखा कहाँ हो तुम,जल्दी आओ हमें अभी जाना है
शिखा  का स्टेज पर आना
शिखा (तौलये से हाथ साफ़ करते हुए)
क्या है माँ ,कहाँ जाना है?
सास ,डॉक्टरनी के पास ,पता है वो मंदिर वाले पंडित जी के पास गई थी   कुंडली लेकर ,पता है उन्होंने कुंडली देखा कर क्या बताया
शिखा ,क्या?
सास,अरे पगली ,उन्होंने कहा था कि मै अगर नवरात्रि में पूरे नौ दिन तक  उपवास करूँ और हर रोज नौ कन्या की पूजा करूँ तो मेरे मन की मुराद अवश्य पूरी होगी ,बस अभी मैं उद्यापन कर के आई हूं।
शिखा,(आश्चर्य से ) पर आप तो डॉक्टरनी के पास जाने को कह रही हो
सास ,ओफ़ हो ,तुम तो  मेरे मन की बात भी नहीं समझती,कैसी मोटी बुद्धि
से पाला पड़ गया
सास , मै तो बस मरने से पहले अपने पोते का मुहँ देखना चाहती हूँ और कुछ नही चाहिए मुझे ,देख लेना की बार तेरे बेटा ही होगा ,चल अब जल्दी ,बतियाती ही रहे गी क्या ,?
राजू का प्रवेश
राजू ,माँ ओ माँ क्या बताया डाक्टरनी ने ?
सास का प्रवेश ,मुहँ लटका हुआ और बहुत उदास
सास ,बेटा हमारे तो भाग ही फूटे हैं ,लड़की है ससुरी के पेट में ,अबके न आने देंगे इसे ,मैने  डाक्टरनी से बात कर ली है ,बेटाा कल ही सफाई करवा देते है
राजू ,है माँ यह ठीक रहेगा
शिखा का प्रवेश
शिखा ,यह तुम क्या कह रहे हो राजू,माँ तो नासमझ है और तुम पढ़लिख कर भी ....
राजू ,देखो शिखा माँ ठीक कह रही है ,मुझे भी बेटा ही चाहिए,तुम कल माँ के साथ  लेडी डॉक्टर के पास चली जाना
शिखा ,लेकिन राजू मेरे पेट में तुम्हारा अंश है ,नहीं मैं इसे जन्म दूँगी
सास ,चुप रह नासपीटी ,बहुत बोल लिया तुमने ,कह दिया न चल जाना है तो जाना है ,एक शब्द भी और नहीं
शिखा ,माँ तुम कैसी बात कर रही हो ,एक तरफ तो तुमने पूरे नवरात्रे देवी माँ के लिए उपवास किया ,हर रोज़ नौ कन्याओं का पूजन किया और जब देवी माँ कन्या के रूप में हमारे घर आना चाह रही है तो तुम उसे मार कर क्यों पाप करना चाहती हो

सास और राजू दोनों शिखा की तरफ हैरानी से देखते है

शिखा ,नही मै यह अपराध नहीं करूंगी और न ही किसी और को इस पाप की भागीदार बनने दूँगी ,हमारी बेटी इस दुनिया में आएगी और अवश्य आएगी
सास से,क्यों माँ बोलो अब ,जिस देवी माँ की तुमने पूजा की हैवह अब तरे पास आ रही है तो  क्या तुम देवी माँ का गला घोंट दोगी
सास ,अरे शिखा बेटा ,तुम सच कह रही हो  मै यह कैसा  पाप करने जा रही थी ,मुझे माफ कर दो, तुमने तो मेरी आँखे खोल दी ,हम अपनी बेटी को बेटे जैसे पालेंगे उसे खूब पढ़ाएंगे ,डाक्टरनी बनाएंगे
राजू ,हां माँ शिखा ठीक कह रही है

सभी, बेटी बचाओ ,बेटी पढ़ाओ

रेखा जोशी

Wednesday, 22 February 2017

लालच की अंधी दौड़ में


अंधा कर देती चमक
पैसे की
लालच की अंधी दौड़ में
लगाता जाता दाव पे दाव
जुआ
जीतने की होड़ में
थी लगाई द्रोपदी दाव पर
युधिष्ठर ने
सब कुछ हार जाने के बाद
हुआ युद्ध का शंखनाद
था कांप उठा कुरुक्षेत्र का
मैदान
थी मिली द्युत क्रीड़ा से
जन जन को पीड़ा
सर चढ़ कर जब बोले
जुनून इसका हो जाता तब
बर्बाद इंसान

रेखा जोशी

Tuesday, 21 February 2017

महाशिवरात्रि के अवसर पर

शायद मेरी आयु पूर्ण हो गई

देहरादून की सुंदर घाटी में स्थित प्राचीन टपकेश्वर मन्दिर , शांत वातावरण और उस पावन स्थल के पीछे कल कल बहती अविरल पवित्र जल धारा, भगवान आशुतोष के इस निवास स्थल पर दूर दूर से ,आस्था और विश्वास  लिए ,पूजा अर्चना करने हजारो लाखों श्रदालु हर रोज़ अपना शीश उस परमेश्वर के आगे झुकाते है और मै इस पवित्र स्थान के द्वार पर सदियों से मूक खड़ा हर आने जाने वाले की श्रधा को नमन कर रहा हूँ |लगभग पांच सौ साल से साक्षी बना मै वटवृक्ष इसी स्थान पर ज्यों का त्यों खड़ा हूँ ।

|आज मेरी शाखाओं से लटकती ,इस धरती को नमन करती हुई ,मेरी लम्बी लम्बी जटायें जो समय के साथ साथ मेरा स्वरूप बदल रहीं है , मुझे अपना बचपन याद दिला रही है ,उस बीते हुए समय की,जब इस पवित्र भूमि का सीना चीर कर ,मै अंकुरित हुआ था ,अनगिनत आंधी तूफानों ,जेष्ठ आषाढ़ की तपती गर्मियों और सर्दियों की लम्बी ठंडी सुनसान रातों की सर्द हवाओं के थपेड़े सहते सहते मै आज भी वहीँ पर,चारो ओर ,अपनी लम्बी जड़ों के सहारे ,टहनियां फैलाये हर आने जाने वाले भक्तजन को ,चाहे तपती धूप हो या बारिश हो ,कैसा भी मौसम हो ,उनको अपनी घनी शाखाओं की ठंडी छाया देता हुआ अटल सीना ताने खड़ा हूँ |

मैने माथे पर बिंदिया लगाये ,सजी धजी उन सुहागनों की पायल की झंकार के साथ वह हर एक पल जिया था जिन्होंने अपने सुहाग की दीर्घ आयु की कामना करते हुए भोले बाबा के इस मंदिरमें नतमस्तक होकर भगवान शंकर का आशीर्वाद प्राप्त किया था और आज भी पायल की सुरीली धुन पर अनगिनत सुंदर सजीले चेहरे मेरे सामने अपने आंचल में श्र्धाकुसुम लिए छम छम करती 'ॐ नमः शिवाय 'के उच्चारण से इस शांत स्थल को गुंजित कर मंदिर के भीतर जाने के लिए एक एक सीढ़ी उतरते हुए उस पभु ,जो देवों के देव महादेव है उनके चरणों में अर्पित कर अपनी सारी मनोकामनाएं पूर्ण करने का आशीर्वाद लेते देख रहा हूँ |कोई नयी नवेली दुल्हन अपने पति संग ,अपनी होने वाली संतान की आस लिए और कोई अपने प्रियतम को पाने की आस लिए ,हर कोई अपने मन में कल्याण स्वरूप भगवान विश्वनाथ की छवि को संजोये उस प्राचीन मंदिर के पावन शिवलिंग पर टपकती बूंद बूंद जल के साथ दूध और जल अर्पित कर विश्वास और आस्था को सजीव होते हुए मै सदियों से देख रहा हूँ |

आज जब मै बूढ़ा हो रहा हूँ ,एक एक कर मेरी शाखाओं के हरेभरे पत्ते दूर हवा में उड़ने लगे है, और वह दिन दूर नही जब मै धीरे धीरे सिर्फ लकड़ी का एक ठूठ बन कर रह जाऊं गा और पता नही कब तक मे अपनी चारों तरफ फैलती जड़ों के सहारे जीवित रह सकूँ गा ,शायद अब मेरी आयु पूरी हो चली है लेकिन मुझे इस बात का गर्व है कि मैने अपनी जिंदगी के पांच सौ वर्ष इस पवित्र ,पावन प्राचीन शिवालय कि चौखट पर एक प्रहरी बन कर जिए है ,मेरा रोम रोम आभारी है उस परमपिता का जिन्होंने मुझे सदियों तक अपनी दया दृष्टि में रखा ,मुझे पूर्ण विश्वास है कि सबका कल्याण करने वाले भोलेनाथ बाबा एक बार फिर से मुझे अपने चरणों में स्थान देने की असीम कृपा करेंगे |

रेखा जोशी