Thursday, 21 November 2019

जिंदगी के सफर में

करता रहा सामना

मुश्किलों का

जिंदगी के सफर में

और

मैं चलता ही गया

.

रुका नहीं, झुका नहीं

ऊँचे पर्वत गहरी खाई

मैं लांघता गया

और

मैं चलता ही गया

.

कभी राह में मिली खुशी

मिला गले उसके

कभी दुखों का टूटा पहाड़

रोया बहुत पर

खुद को संभालता गया

और

मैं चलता ही गया

.

जीवन के सफर में

कई साथी मिले चल रहे हैं साथ कुछ

यादें अपनी देकर कुछ छोड़ चले गए

और

बंधनों से घिरा

मैं चलता ही गया

…

चलता ही जा रहा हूँ

और

चलता ही रहूँगा

जीवन के सफर में

अंतिम पड़ाव आने तक

अंतिम पड़ाव आने तक

रेखा जोशी

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