Thursday, 30 January 2025

खिलौना (लघुकथा )

खिलौना 

मीनू और अजय अपनी छोटी सी गुड़िया दीप्ती के साथ घर का कुछ जरूरी सामान लेने डी मार्ट स्टोर पहुँच गए वहां एक रैक में बहुत आकर्षक ढंग से खिलौने सज रहे थे जिन्हें देखते ही दीप्ती की आँखें चमक उठी, वह वहीं खड़ी होकर एक एक खिलौने को अपने नन्हें नन्हें हाथों से छू कर देखने लगीl

अजय की नौकरी छूट जाने के कारण आजकल उनका हाथ कुछ तंग था इसलिए वह एक ट्रॉली में घर में इस्तेमाल होने वाला बहुत ही जरूरी सामान सोच समझ कर रख रहे थेl घर के हालात से बेखबर दीप्ती एक छोटी सी लाल रंग कार जिसे बच्चे खुद चलाते हैँ लेने की ज़िद्द करने लगीl. अजय नें बड़े प्यार से उसे गोद में उठा लिया और समझाने की कोशिश करने लगा कि अगले महीने उसे वह बहुत बढ़िया गाड़ी खरीद देगा, लेकिन बाल हठ कहाँ कुछ सुनता है l वह उस कार को लेने के लिए और भी मचल उठी और ज़ोर ज़ोर से रोने लगी l वह मीनू और अजय की बात ही नहीं सुन रही थी बस रोये जा रही थीl 

मीनू रोती हुई दीप्ती को खींचते हुए स्टोर से बाहर आ गई और अजय सामान के बिल का भुगतान करने लगा l स्टोर से बाहर आते ही अजय नें नन्ही सी लाल रंग की चाबी से चलने वाली कार अपनी प्यारी बिटिया के हाथ में थमा दी उसे देखते ही दीप्ती के मासूम चेहरे पर मुस्कान आ गई और अजय नें भी राहत की सांस ली l

रेखा जोशी 

Wednesday, 22 January 2025

उनकी यादों से कहो


बहार आई मेरे उपवन , फूल खिलाते रहिए 
उनकी यादों से कहो ह्रदय,को महकाते रहिए
..
साथ तेरा जो मिला हमको,पा लिया जहां हमनें 
गम नहीं कोई सजन हमको, यूँहि बुलाते रहिए
.
साज़ बजने लगेअब दिल के,आप आए हो यहाँ 
चाँद की चाँदनी में साजन, यूँहि नहाते रहिए 
..
यूँहि चलते रहे दोनों अब , लेकर हाथ में हाथ
साथ छूटे न कभी अपना , कदम मिलाते रहिए 
..
खुशियाँ घर बरसी अपने,अब रोशन है दुनिया
जगमगाये घर अँगना दीप ,यूँहि जलाते रहिए

रेखा जोशी