Friday, 28 April 2017

वफ़ा का दिया फिर जलाना सजन

122. 122. 122.  12

जला प्यार में दिल दिवाना सजन
मिला खाक में आशियाना सजन
चले तुम गये हो हमें छोड़ के
वफ़ा का दिया फिर जलाना सजन

रेखा जोशी


दुनिया की भीड़ में हर ओर बिखरते रिश्ते
है जीवन की भाग दौड़  में सिसकते रिश्ते
कठिन बहुत जीवन मे निभाना इन रिश्तों को
पत्थरों   के  शहर   में  देखो  टूटते    रिश्ते

रेखा जोशी

Wednesday, 26 April 2017

प्यार से पुकार लो मिला हमे सँसार है

छन्द- चामर
मापनी - 21 21 21 21 21 21 21 2 

मीत आज ज़िन्दगी हमें  रही पुकार है
रूप देख ज़िन्दगी खिली यहाँ बहार है
,
पास पास  हम रहें मिले ख़ुशी हमें सदा
छा रहा गज़ब यहाँ खुमार ही खुमार है

छोड़ना न हाथ साथ साथ हम चले सदा
प्रीत रीत जान ज़िन्दगी यहाँ हमार है
,
मिल गया जहाँ हमें मिले हमें सजन यहाँ
पा लिया पिया यहाँ करार ही करार है
,
दूर हम वहाँ चलें  मिले  जहाँ धरा गगन
प्यार से पुकार लो  मिला हमे सँसार है

रेखा जोशी

हद से ज्यादा सुन्दर उसने बनाई यह दुनिया
विभिन्न रंगों से फिर उसने सजाई यह दुनिया
भरे क्यों फिर उसमें उसने ख़ुशी और गम के रँग
हर किसी को उसकी नज़र से दिखाई यह दुनिया

रेखा जोशी

Tuesday, 25 April 2017

प्यार हमारा सजन अफसाना हो गया

तुमसे  मिले  प्रियतम  हमे जमाना हो गया
प्यार हमारा अब सजन अफसाना हो गया
क्या  करें हम  तो  हैं  दिलके हाथों मजबूर
रोका  दिल को  कमबख्त दीवाना हो गया

रेखा जोशी

निर्मल

चंचल  चितवन कंचन तन
नही छल कपट निर्मल मन
कोई  नही  तुम  सा   यहाँ
भाये  अब   यह  भोलापन
,,

मलिन
गले  लगाती   दीन  हीन
पाप सब कर  लेती लीन
पाप  धो  कर  पापियों  ने
गंगा  को कर दिया मलिन

रेखा जोशी

बरस रहा अंगार नभ से

सूखी  नदियाँ  सूखे  ताल
जीना हुआ अब तो मुहाल
बरस  रहा  अंगार  नभ से
है धरती पर पड़ा  अकाल

रेखा जोशी

Friday, 21 April 2017

है   याद  आती   बार बार
दिल  कर  रहा अब  इंतज़ार  
हाल ए दिल दिखाते प्रियतम 
जो  तुम  आ  जाते  एक बार
...........................
मापनी पर आधारित मुक्तक

2122  2122.  212

आज फिर मौसम सुहाना आ गया 
प्यार में दिल को लुभाना आ गया
मिल गई हमको ख़ुशी आये पिया 
ज़िंदगी  को  मुस्कुराना  आ गया 

रेखा जोशी 


Thursday, 20 April 2017

आज फिर मौसम सुहाना आ गया


2122  2122.  212

आज फिर मौसम सुहाना आ गया 
प्यार में दिल को लुभाना आ गया
मिल गई हमको ख़ुशी आये पिया 
ज़िंदगी  को  मुस्कुराना  आ गया 

रेखा जोशी 

प्यार किया उनसे तो यह रिश्ता है निभाना

करते हम प्यार उनको दुश्मन है ज़माना
ढूंढते रहते  नित   मिलने   का है बहाना

ऐसा नही कि उन से मोहब्बत नही रही
मोहब्बत  में अब   रूठना या है मनाना
,
चलते  रहेंगे  साथ  साथ  हम  सदा यूँही
प्यार किया उनसे तो यह रिश्ता है निभाना
,
है चाहते हम उनको जी जान से अपनी
हो जाये  कुछ भी उन्हें अपना है बनाना
,
करना न कभी भी हमारे दिल से दिल्लगी
तुमसे   ही   ज़िन्दगी  कोई  ना है फ़साना

रेखा जोशी

लाल बहादुर ,गांधी से बेटे अब है कहाँ


क्या यही हमारे सपनों का है देश भारत
पूछ रही आ  स्वप्न में मुझसे माँ भारती
,
घूम रही गली गली लिये तिरंगा हाथ मे
स्नेह भरे नैनों में वोह  मूरत ममतामयी
,
है पूत अपने ही नोच खा रहे उसे आज
घौटालों  की जंजीरों में दी जकड़ी गई
,
लाल बहादुर ,गांधी  से बेटे अब है कहाँ
आँसू भर  आंखों  में पूछ शहीदों से रही
,
भूल प्यार जाने क्यों  भाई भाई लड़ रहे
देख लड़ते अपने बच्चों को वोह थी दुखी

रेखा जोशी

Wednesday, 19 April 2017

फेंका पाँसादाव पेच से


शकुनि का खेल समझ न पाया
धर्मराज    युधिष्ठिर    भरमाया
फेंका   पाँसा    दाव   पेच   से
जुआ  खेलने  को    उकसाया

रेखा जोशी

रचयिता


रचती रही माँ माटी से
अपनों   के लिये  सपने
घड़ती  रही कहानियाँ
घट वह  घडते घडते
रचयिता थी वह बच्चों की
कच्ची  माटी से बच्चे
सँवारनी थी ज़िन्दगी उनकी
है बसे   घट घट में
बच्चों के सपने रंग बिरंगे

रेखा जोशी


यह दिल सनम तुम्हे दीवाना न लगे


है  हकीकत  कोई  फ़साना न लगे
मिलने का सजन से बहाना न लगे
कैसे दिखाऊँ दिल अपना मै पिया
यह दिल सनम तुम्हे दीवाना न लगे

रेखा जोशी

Tuesday, 18 April 2017

चलो भूलें सभी गम प्यार से की लें यहाँ हर दम


आधार छंद - विधाता (मापनीयुक्त मात्रिक)
मापनी - 1222 1222 1222 1222
सामान्त - आयी <> पदान्त - है।

खिले है फूल अंगना शाम प्यार करने की आई है
कहीं है प्यार का मौसम   कहीं  मिलती जुदाई है
कभी मिलती यहाँ खुशियाँ कभी मिलते यहाँ पर गम
चलों भूलें सभी गम प्यार से जी लें यहाँ हर दम

रेखा जोशी

Sunday, 16 April 2017

प्यार में यूँ दगा नही करते

प्यार में यूँ दगा नहीं करते
राह अपनी जुदा नहीं करते
,
आप को प्यार का सबब मिलता
जान तुमसे जफ़ा नहीं करते
,
काश आते न ज़िन्दगी में तुम
ज़िन्दगी से हम गिला नही करते
,
यार से क्या गिला करें अब हम
ज़िन्दगी यूँ जिया नहीं करते
,
छोड़ दो बीत जो गई बाते
ज़िक्र क्यों आज का नहीं करते

रेखा जोशी

क्रोध ,क्षणिक पागलपन}

अमित अपने पर झल्ला उठा ,”मालूम नहीं मै अपना सामान खुद ही रख कर क्यों भूल जाता हूँ ,पता नही इस घर के लोग भी कैसे कैसे है ,मेरा सारा सामान उठा कर इधर उधर पटक देते है ,बौखला कर उसने अपनी धर्मपत्नी को आवाज़ दी ,”मीता सुनती हो ,मैने अपनी एक ज़रूरी फाईल यहाँ मेज़ पर रखी थी ,एक घंटे से ढूँढ रहा हूँ ,कहाँ उठा कर रख दी तुमने ?गुस्से में दांत भींच कर अमित चिल्ला कर बोला ,”प्लीज़ मेरी चीज़ों को मत छेड़ा करो ,कितनी बार कहा है तुम्हे ,”अमित के ऊँचे स्वर सुनते ही मीता के दिल की धड़कने तेज़ हो गई ,कहीं इसी बात को ले कर गर्मागर्मी न हो जाये इसलिए वह भागी भागी आई और मेज़ पर रखे सामान को उलट पुलट कर अमित की फाईल खोजने लगी ,जैसे ही उसने मेज़ पर रखा अमित का ब्रीफकेस उठाया उसके नीचे रखी हुई फाईल झाँकने लगी ,मीता ने मेज़ से फाईल उठाते हुए अमित की तरफ देखा ,चुपचाप मीता के हाथ से फाईल ली और दूसरे कमरे में चला गया ।

अक्सर ऐसा देखा गया है कि जब हमारी इच्छानुसार कोई कार्य नही हो पाता तब क्रोध एवं आक्रोश का पैदा होंना सम्भाविक है ,या छोटी छोटी बातों या विचारों में मतभेद होने से भी क्रोध आ ही जाता है |यह केवल अमित के साथ ही नही हम सभी के साथ आये दिन होता रहता है | ऐसा भी देखा गया है जो व्यक्ति हमारे बहुत करीब होते है अक्सर वही लोग अत्यधिक हमारे क्रोध का निशाना बनते है और क्रोध के चलते सबसे अधिक दुख भी हम उन्ही को पहुँचाते है ,अगर हम अपने क्रोध पर काबू नही कर पाते तब रिश्तों में कड़वाहट तो आयेगी ही लेकिन यह हमारी मानसिक और शारीरिक सेहत को भी क्षतिग्रस्त  करता है ।

क्रोध  क्षणिक पागलपन की स्थिति जैसा है जिसमे व्यक्ति अपने होश खो बैठता है और अपने ही हाथों से जुर्म तक कर बैठता है और वह व्यक्ति अपनी बाक़ी सारी उम्र पछतावे की अग्नि में जलता रहता है ,तभी तो कहते है कि क्रोध मूर्खता से शुरू हो कर पश्चाताप पर खत्म होता है |

मीता की समझ में आ गया कि क्रोध करने से कुछ भी हासिल नही होता उलटा नुक्सान ही होता है , उसने कुर्सी पर बैठ कर लम्बी लम्बी साँसे ली और एक गिलास पानी पिया और फिर आँखे बंद कर अपने मस्तिष्क में उठ रहे तनाव को दूर करने की कोशिश करने लगी ,कुछ देर बाद वह उठी और एक गिलास पानी का भरकर मुस्कुराते हुए अमित के हाथ में थमा दिया ,दोनों की आँखों से आँखे मिली और होंठ मुस्कुरा उठे |

रेखा जोशी

Thursday, 13 April 2017

निष्ठुर कैसा है साजन यह तुम्हारा मन

करता सदा याद प्रियतम तुम्हे प्यारा मन
तुमसे मिलने  को मचल  उठा हमारा मन
,
आ भी जाओ सजन अब औऱ न तड़पाओ
कब तक भटकोगे लिये तुम आवारा मन
,
बैठे  हम  राह  में  अपने  नैन  बिछाये
निष्ठुर कैसा है साजन यह तुम्हारा मन
,
टूट जायेंगे हम  अगर  की   बेवफाई
अब प्यार तेरे में साजन यह हारा मन
,
थके नयन हमारे इंतज़ार में  प्रियतम
आँसू बहा अब हार  गया बेचारा मन

रेखा जोशी

Wednesday, 12 April 2017

देती दुहाई सूखी धरा

देती दुहाई सूखी धरा
करती रही पुकार
आसमाँ पर  सूरज फिर भी
रहा बरसता अँगार
सूख गया अब रोम रोम
खिच  गई लकीरें तन  पर
तरसे जल को प्यासी धरती
क्या पंछी क्या जीव जंतु
सबका हुआ बुरा हाल
है प्यासा तन मन
प्यासी सबकी काया
क्षीण हुआ  सबका  श्वास
सूख गया है जन जीवन
सूख गया संसार
है फिर भी मन में आस
उमड़ घुमड़ कर आयेंगे
आसमान में बदरा काले
होगा  जलथल चहुँ ओर फिर से
जन्म जन्म की प्यासी धरा पे
नाचेंगे मोर फिर से
हरी भरी धरा का फिर से
लहरायें गा रोम रोम
बरसेंगी अमृत की बूदें नभ से
होगा धरा पर नव सृजन
नव जीवन से
अंतरघट तक प्यासी धरा
फिर गीत ख़ुशी के गायेगी
हरियाली चहुँ ओर छा जायेगी
हरियाली चहुँ ओर छा जायेगी

रेखा जोशी

था चाहा जो  वोह ज़िन्दगी से  मिल गया
चाहत हमारी को    नाम तुमसे मिल गया
लग गये अब पँख हमारे ख्वाबों को आज
ज़िन्दगी में  तुम्हारा  प्यार  हमें मिल गया

रेखा जोशी

श्रम ही हमारी ज़िंदगी


चलते   रहना सुबह  शाम
है करना अब  बहुत काम
श्रम   ही  हमारी  ज़िन्दगी
श्रम ही हमारा   अब धाम

रेखा जोशी

Monday, 10 April 2017

याद तुम्हारी तन्हाई हमारी को महका जाती है

रूप  अनुपम  देख  चाँद  सा  चाँदनी  शरमा जाती है
याद   तुम्हारी  तन्हाई   हमारी  को   महका   जाती है
दिल मे छुपा कर रखा सदा हमने  प्यार अपना लेकिन
दिल  की  बातें  कभी  कभी होंठों पर भी आ जाती है

रेखा जोशी

खेली तेरी गोद बीता बचपन सुहाना

मन क्यों भया उदास, खिली ज़िन्दगी धूप सी
है  टूटी  अब  आस ,चाह  तेरी  अनूप  सी
खेली तेरी  गोद ,बीता  बचपन सुहाना
वह चली गई छोड़, माँ फिर से लौट आना

रेखा जोशी

Friday, 7 April 2017

छोड़ दुनिया वो गये क्या याद कर भर नैन आये

2122  2122  2122  2122

ज़िन्दगी  में अब चली है आज कैसी यह हवायें
राह में क्यों आज मेरे यह कदम फिर डगमगाये
प्यार की अब ज़िन्दगी में खो गई उम्मीद थी जो
छोड़ दुनिया वो गये क्या याद कर भर नैन आये

रेखा जोशी

Thursday, 6 April 2017

नमनकरें उस महात्मा को


अजब सा माहौल
था वोह
दुश्मनों का खौफ
था ओफ
दोस्त भी बन रहे
थे दुश्मन
चमक रहे थे ख़ंजर
तलवारे
था फैल रहा धुआं धुआं
जहर से भरा भरा
शांति दूत
बन आया धरा पर
अहिंसा का पुजारी
जहर से जैसे वो
अमृत निकाल देता है
हर जन को गले लगा कर
प्रीत का पाठ
पढ़ाता वोह
था देवदूत राष्ट्रपिता
वोह
हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई
सबको अपना बनाता
वोह
ईश्वर अल्लाहके नाम
पैगाम पहुंचाता
वोह
नमन करें उस महात्मा को
प्रेम पथ पर चलना
सिखाया जिसने

रेखा जोशी

नैन के दीप जलते रहे


बाग  में  फूल  खिलते रहे
नैन   के  दीप  जलते  रहे
पर यहाँ तुम न आये पिया
रात  भर ख्वाब सजते रहे

रेखा जोशी

Wednesday, 22 March 2017

है यही जीवन

चींटियाँ हमें
है देती सन्देश
श्रम ही जीवन
मिलजुल कर
करते चलो काम
सुबह शाम
रुकना नही थकना नही
बढ़ते जाना
निरन्तर
है यही जीवन
है यही जीवन

रेखा जोशी

बच्चों की परवरिश

बच्चों की परवरिश

कहते है कि बच्चे मन के सच्चे होते है ,बच्चे ईश्वर का रूप होते है ,सीधे साधे सरल स्वभाव के ,मन में कोई छल कपट नही होता ,वह कच्ची मिट्टी के समान  होते हैं। हम उन्हें जैसा बनाना चाहें, बना सकते हैं। उनके अच्छे भविष्य और उन्हें बेहतर इंसान बनाने के लिए सही परवरिश जरूरी है।हर बच्चा अलग होता है। हर बच्चे की परवरिश का तरीका भी अलग अलग होता है।

सबसे पहले हमें अपने घर का माहौल खुशगवार और प्रेम से परिपूर्ण रखना  चाहिए  ,घर में अगर पति पत्नी के बीच या किसी अन्य सदस्य से कोई मनमुटाव हो तो उसको बच्चों के सामने नहीं लाना चाहिए  और न ही कोई झगड़ा करना चाहिए इसका उनके कोमल ह्रदय पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है । कहते है बच्चे वो ही करते है जो उनके माँ बाप करते है,यह माता पिता का कर्तव्य है कि वह अपने बच्चों को अच्छे संस्कार दें,बड़ों का सम्मान करना अनुशासन का महत्व आदि ,यह सब बच्चे अपने घर से ही सीखते हैं।

दूसरी बात ,माता पिता को अपने बच्चों  के साथ समय बिताना चाहिए ,उनके साथ खेलना चाहिए ,उनके साथ कठोर नही बल्कि मित्रतापूर्वक व्यवहार करना चाहिए ताकि वह उनके साथ अपने दिल की सारी बातें कर सके और माता पिता भी उन्हें खेल खेल में सही गलत का ज्ञान करवा सकें।

आजकल कम्पीटिशन का ज़माना है ,हर माँ बाप की चाहत  है कि हर क्षेत्र में उनका ही बच्चा सबसे आगे रहे ,जिसके कारण बच्चे अक्सर तनावग्रस्त
रहने लगते है और कई बार तो तनाव इतना गहरा जाता है कि बच्चे अवसाद की स्थिति में भी पहुंच जाते है और वह आत्महत्या तक भी कर बैठते है ,इसलिए बच्चों पर पढाई का या किसी अन्य प्रकार का अनावश्यक दबाव नहीं डालना चाहिए ,हाँ उनका मार्गदर्शन अवश्य करना चाहिए लेकिन निर्णय लेने का अधिकार बच्चे को ही देना चाहिए ,अगर मान लो उसने गलत  निर्णय ले भी लिया लेकिन वह खुद अपनी गलती से सबक सीख सकेगा ।इससे उसमे निर्णय लेने की क्षमता भी आ जाएगी ।

बच्चे जब किशोरावस्था में में पदार्पण करते है तो का समय माँ बाप की ज़िम्मेदारी और भी बढ़ जाती है,उनमे आये  शारीरिक परिवर्तन और उसके मानसिक विकास उन्हें जिन्दगी के कई अनदेखी राहों के रास्ते दिखाने शुरू कर देता है  |बच्चों की किशोरावस्था के इस नाज़ुक दौर  के चलते अभिभावकों के लिए यह उनके धैर्य एवं समझदारी की परीक्षा की घड़ी है  |किशोरों के शरीर  में हो रही हार्मोंज़ की  उथल पुथल जहां उन्हें व्यस्क के रूप में नवजीवन प्रदान करती  है ,वही उनका बचकाना व्यवहार ,उन्हें स्वयं की और माँ बाप की नजर में अजनबी सा बना देता है |माँ बाप से उनका अहम टकराने लगता है ,हर छोटी सी बात पर अपनी प्रतिक्रिया देना ,उनकी आदत में शामिल हो जाता है |किशोरों को  इस असमंजस की स्थिति से माँ बाप अपने विवेक और धेर्य से ही बाहर निकालने में मदद कर सकते है ,उनकी हर  छोटी बड़ी बात को महत्व दे कर ,उनका मित्रवत व्यवहार अपने लाडले बच्चों को जहां गुमराह होने से बचाते है वहीँ उनमे विश्वास कर के उन्हें एक अच्छा  नागरिक बनने में भी सहायता भी कर सकते है '।

रेखा जोशी

Tuesday, 21 March 2017

हाथ जोड़ कर शीश झुकाये कर प्रभु सिमरन
धरम   करम कर  चार दिन की चांदनी जीवन
छूट  जायेंगे   मोह    माया   के  चक्र  से फिर
कर  जाप   प्रभु  का  बन्दे  कट  जायेगे बंधन

रेखा जोशी 

आँखों ही आँखों से बात कह देते हैं
ख्यालों में अक्सर मुस्कुरा वह देते है
बसे है  वोह  मेरी धड़कनों में हरदम
जज़्बात हमारे क्यों दर्द असह देते है

रेखा जोशी

Monday, 20 March 2017

गर्मी के मौसम में आपकी बगिया ठंडी ठंडी कूल कूल।

गर्मी के मौसम में आपकी बगिया ठंडी ठंडी कूल कूल

बसंत ऋतु जाने को है और ग्रीष्म ऋतु का पदार्पण हो चुका हैऔर तेज़ धूप में  फूल पौधे मुरझा जाते हैं,लेकिन अच्छे से देखभाल कर हम गर्मियों में भी अपने बगीचे को सुंदर सुन्दर फूलों से सजा सकते है ।

1सबसे पहले क्यारियों में  मिटटी की अच्छी तरह गोड़ाई कर उसमें गोबर की खाद डाल कर कुछ दी तो के लिए उसे खुला छोड़ दें ।

2 अधिक ऊँचाई वाले पौधे जैसे कि कॉसमॉस, सेलेसिया कोचिया,और सूरजमुखी (जो की सभी गर्मियों में लगाये जाने वाले पौधे है )बगीचे की क्यारी  के बाहरी किनारे पर लगायें । कॉसमॉस पर पीले या नारंगी रंग के फूल आते है,सूरजमुखी देखने में तो आकर्षक लगता है और अधिक देखभाल की भी आवश्यकता नही पड़ती ।कोचिया हर गोल आकार का पौधा आँखों को ठंडक देता है।

3 मध्यम ऊँचाई वाले पौधे जैसेकि गेलार्डिया,ज़ीनिया आदिल ऊंचाई वाले पौधे के आगे को ओर क्यारियो में लगायें।

4सबसे बाद में कम ऊंचाई वाले पौधे जैसे पोर्टुलेका पौधा जो पूरे गर्मी के मौसम में खिला-खिला रहता है।इसके फूल धूप में खिलते हैं ।

पौधों के लिए गर्मी में पानी लगाना आवश्यक है। लेकिन इतना ही पानी डालें कि नमी रहे, जरूरत से ज्यादा पानी डालना ठीक नहीं। जब पौधे थोड़े बड़े हो जाएं तो उनमें थोड़ी पोटाश डाल दे ,इससे पौधों की जड़े मजबूत होती है ।लीजिये तैयार हो गई आपकी रंग बिरंगी  बगिया ,जो गर्मियों में आपको रखेगी ठंडा ठंडा कूल।कूल

रेखा जोशी

बीता जाये पल पल जीवन

दिल विल,प्यार मोहब्बत ,कसमें यह सब दुनियादारी है
कितना  भी रोके हम इसको पर चलन  इसका जारी है
बीता  जाये  पल  पल जीवन  मत  करो बर्बाद इसे तुम
जीवन   जीना   सीखने में   ही   हमारी  समझदारी  है

रेखा जोशी

छंद - पदपादाकुलक
16,16 मात्रा के 4 चरण । आदि में 2 तथा अंत में 22

माता तुमसे संसार  मेरा
दाती ले लो प्रणाम  मेरा
शीश झुकायें दर पर तेरे
झोली भरती दर  पर तेरे
,
चाँद निकला अंगना मेरे
आये  जो  सांवरिया मेरे
शीतल पवन मिले हिचकोले
पीहू आज  पपीहा बोले

रेखा जोशी

Friday, 17 March 2017

जो पाया तुमको पाई सारी दुनिया

22. 22. 22. 22. 22. 2

सपने तेरे सोई आँखें मेरी हैं
यादें  तेरी रोई  आँखें मेरी हैं
जो पाया तुमको पाई सारी दुनिया
चाहत तेरी खोई ऑंखें मेरी है

रेखा जोशी

Thursday, 16 March 2017

दिल हमारे को खिलौना जान कर


देख हमको खिलखिलाकर चल दिये
आग सीने में लगा कर चल दिये
,,
रात में वो चाँद छुप कर खो गया 
चाँदनी भी वो  चुरा कर चल दिये
,,
राह में हमको अकेला छोड़ कर
आसमाँ  से तुम  गिराकर चल दिये
,,
दिल हमारे को खिलौना जान कर
तोड़ इसको मुस्कुरा कर चल दिये
,,
ज़िन्दगी ने  है दिखाये गम हमें 
दर्द में हमको डुबा कर चल दिये

रेखा जोशी

Wednesday, 15 March 2017

 
दर्द दिल का न कभी प्यार दिखाया हमने
तार  टूटा  न   कभी  साज़  बजाया  हमने
अधर  खामोश  रहे  सजन हमारे तो  क्या
राज़  इक  यह ज़िन्दगी से छिपाया हमने

रेखा जोशी

Tuesday, 14 March 2017

चौपाई
राम नाम हृदय  में बसाया,कुछ नहीं अब हमे है भाया
राम नाम के गुण सब गायें ,नाम बिना कुछ नहीं सुहाये
...
सीताराम भजो मन प्यारे ,दुखियों के सब कष्ट  निवारे
 भगवन जिसके ह्रदय समाये ,पीड़ा रोग पास ना  आये
,
दीन बंधु सबका रखवाला ,कर कृपा अपनी नंदलाला
एक ही सहारा प्रभु  नाम का ,पी ले प्याला राम नाम का

चौपाई

चौपाई
राम नाम हृदय  में बसाया
कुछ नहीं अब हमे है भाया
..
राम नाम के गुण सब गायें 
नाम बिना कुछ नहीं सुहाये
...
सीताराम भजो मन प्यारे 
दुखियों के सब कष्ट  निवारे
..
 भगवन जिसके ह्रदय समाये 
 पीड़ा रोग पास ना  आये

दीन बंधु सबका रखवाला 
कर कृपा अपनी नंदलाला
..
एक ही सहारा प्रभु  नाम का 
पी ले प्याला राम नाम का
....
राम नाम घट घट का वासी 
चारो धाम ह्रदय में काशी
..
मन के तार प्रभु से मिला ले 
है भक्तों के राम रखवाले

दुःख निवारे हरे सब पीड़ा 
राखो  मन अपने रघुवीरा
.
दे दो प्रभु  तुम हमे सहारे 
मीत  बनो तुम ईश  हमारे

रेखा जोशी

आया होली का त्यौहार

आया   होली  का त्यौहार
भूलें  सब  गिले  करें प्यार
रंगे   प्यार   में    तेरे   हम
जीवन अपना लिया सँवार

रेखा जोशी 

Thursday, 9 March 2017

पुकारे तुन्हें अँगना अपना


राह निहारे बांवरे नयन
प्रतीक्षा में हूँ  बैठी सजन
पुकारे तुम्हे अँगना अपना
बैठे कहाँ अपने में मगन
,
आया गाता मधुमास सखी
आये ना साजन पास सखी
महकी बगिया झूमे सारे
प्रियतम मिलने की आस सखी

रेखा जोशी



लाल गुलाल से रंग ली राधा

भर पिचकारी कान्हा ने मारी
भीगी चुनरी  राधा की  सारी
लाल गुलाल से रंग ली राधा
न मारो श्याम अब तो पिचकारी।

रेखा जोशी

बगिया छाई अब फिर से बहार है

आँखों  से छलकता तेरे  प्यार है 
लब से करते फिर कैसे  इन्कार है 
... 
महक प्यार की ढूंढते यहां वहां 
अब तो ज़िन्दगी हमसे बेज़ार है 
... 
आई अंगना धूप  खिली खिली सी
हमें  तुम्हारा  कब  से इंतज़ार  है
...
खोये रहते तेरी यादों में हम
करेंगे प्यार तुमसे बेशुमार है 
....
खूबसूरत नज़ारे तुम्हे पुकारे
बगिया छाई अब  फिर से बहार  है

रेखा जोशी 

Tuesday, 7 March 2017

नारी उत्थान (महिला दिवस पर विशेष)

एक सवाल आज मै नारी तुम से ही पूछती हूँ ,"बता कैसे होगा तेरा उत्थान" ,बलात्कार हो या यौन शोषण,अपने तन ,मन और आत्मा की पीड़ा को अपने अंदर समेटे सारी जिंदगी अपमानित सी घुट घुट कर कब तक  जीती रहोगी ,मत कर इंतज़ार राम का ,आज कोई राम नही आएगा अहल्या  को तारने ,तुम्हे अपने अंदर की दुर्गा को ,चंडी को जगाना होगा,तुम्हे खुद ही आगे आ कर अपना संघर्ष करना होगा ।

जब भी कोई बच्चा चाहे लड़की हो या लड़का इस धरती पर जन्म लेता है तब उनकी माँ को उन्हें जन्म देते समय एक सी पीड़ा होती है ,लेकिन ईश्वर ने जहां औरत को माँ बनने का अधिकार दिया है वहीं पुरुष को शारीरिक बल प्रदान किया ।महिला और पुरुष दोनों ही इस समाज के समान रूप से जरूरी अंग हैं लेकिन हमारे धर्म में तो नारी का स्थान सर्वोतम रखा गया है , नवरात्रे हो या दुर्गा पूजा ,नारी सशक्तिकरण तो हमारे धर्म का आधार है । अर्द्धनारीश्वर की पूजा का अर्थ यही दर्शाता है कि ईश्वर भी नारी के बिना आधा है ,अधूरा है। । इस पुरुष प्रधान समाज में भी आज की नारी अपनी एक अलग पहचान बनाने में संघर्षरत है । जहाँ बेबस ,बेचारी अबला नारी आज सबला बन हर क्षेत्र में पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिला कर चल रही है वहीं अपने ही परिवार में उसे आज भी यथा योग्य स्थान नहीं मिल पाया ,कभी माँ बन कभी बेटी तो कभी पत्नी या बहन हर रिश्ते को बखूबी निभाते हुए भी वह आज भी वही बेबस बेचारी अबला नारी ही है । शिव और शक्ति के स्वरूप पति पत्नी सृष्टि का सृजन करते है फिर नारी को क्यों मजबूर और असहाय समझा जाता है ।

अब समय आ गया है सदियों से चली आ रही मानसिकता को बदलने का और सही मायने में नारी को शोषण से मुक्त कर उसे पूरा सम्मान और समानता का अधिकार दिलाने का ,ऐसा कौन सा क्षेत्र है जहां नारी पुरुष से पीछे रही हो एक अच्छी गृहिणी का कर्तव्य निभाते हुए वह पुरुष के समान आज दुनिया के हर क्षेत्र में ऊँचाइयों को छू रही है ,क्या वह पुरुष के समान सम्मान की हकदार नही है ?तब क्यूँ उसे समाज में दूसरा दर्जा दिया जाता है ?केवल इसलिए कि पुरुष अपने शरीरिक बल के कारण बलशाली हो गया और नारी निर्बल ,नही नारी तुम निर्बल नही हो,तुम असीम शक्ति का भण्डार हो ,तुम्हे खुद को पहचानना है ,अपमें  अंदर के आत्मविश्वास को जगाना होगा ,खुद का सम्मान करना होगा ,तुम्हारे उत्थान के रास्ते खुद  ब खुद निकल आयेंगे ।

रेखा जोशी 

होली है


दिल में  प्यार  लिये आज आई होली
मस्ती चहुँ और सँग आज लायी होली
,
रंगों  में  उमंग   रंग  है उमंगों भरे 
लाल,  हरे  ,नीले, पीले  रंग  से रंगे
,
लुभा रहें  है  सब आज हो के बदरंग
ढोल   मंजीरा   औ   बाजे    रे  मृदंग
,
है बगिया सूनी   बिन फूलों  के जैसे
अधूरी  है  होली  बिन गाली के वैसे
,
प्यार भरी गाली से ऐसा हुआ कमाल
गाल  हुये गोरी के लाल बिन गुलाल
,
गुलाबों का मौसम है बगिया बहार पे
कुहक रही कोयल अंबुआ की डाल पे
,
थिरक  रहें आज सभी  हर्षौल्लास में
है झूम रहें  सब फागुन की बयार में

रेखा जोशी