Friday, 14 September 2018

हिंदी हमारी शान

हिंदी हमारी शान
है हमारा स्वाभिमान
मातृभाषा हमारी
समेटे स्वयं में ज्ञान
प्रेमचंद की कहानि‍यां
महाकवि निराला जी की
निराली रचनाएँ
है मंत्र मुग्ध कर देती
जयशंकर प्रसाद जी की
अनुपम रचनाएँ कविताएँ
किस किस का नाम लिखूँ
अनमोल रतन है सारे
सहज सरल भाषा में लिख दिए
जज़्बात जो
सीधे  उतरते दिल में हमारे
महादेवी वर्मा, पंत, दिनकर
है सभी जगमगाते सितारे
वंदन करते हम उनका
चमकेंगे वो युगों युगों तक
ज्यूँ अंबर में चंदा तारे
ज्यूँ अंबर में चंदा तारे

रेखा जोशी

माँ  भारती


पूजा की थाली  से करें आरती
तेरी  रक्षा के लिए  माँ  भारती
...
चलते चलें आगे आगे  हम सदा
दुश्मन से नहीं  डरते  माँ भारती
..
रुकें नहीं बढ़ते हुए कदम अपने
वार  देंगे   सर  तुझपे माँ भारती
..
वीर  सेनानी है खड़े सीमा पर
सर्दी  गर्मी  झेलते  माँ  भारती
...
परवाह नहीं अंजाम की हम करें
वतन के लिए मर मिटे माँ भारती

रेखा जोशी

Thursday, 13 September 2018

हिंदी दिवस


सभी  मित्रजनों को हिन्दी दिवस की ढेर सारी बधाईयां

जान अपनी
पहचान अपनी
है हिंदी भाषा
.................
खाते कसम
हिंदी दिवस पर
है अपनाना
.................
हिंदी हमारी
मिले सम्मान इसे
है मातृ भाषा
.................
शान यह है
भारत हमारे की
राष्ट्र की भाषा
.................
मित्र जनों को
हिंदी दिवस पर
मेरी बधाई

रेखा जोशी

Thursday, 30 August 2018

नदिया

लहरें गुनगुनाती किनारों के बीच
मचलती लहराती किनारों के बीच
.
हिमालय से निकली कल कल मधुर स्वर
है नाचती गाती किनारों के बीच
...
है बहती नदिया अठखेलियाँ करती 
सरिता खिलखिलाती किनारों के बीच
.
लहर लहर बेताब मिलने सागर से
नदी शोर मचाती किनारों के बीच
...
नदिया सी बहती है यह जीवन धारा
है जीना सिखाती किनारों के बीच

रेखा जोशी

मुक्तक


आँखों  से छलकता तेरे  प्यार है 
लब से करते फिर कैसे  इन्कार है 
चंचल  नयन  ढूंढें  तुम्हें यहाँ वहाँ
कर  रहे  तुम्हारा  हम  इंतज़ार  है

रेखा जोशी

Tuesday, 28 August 2018

दौड़ी आई राधिका (गीत)

दौड़ी आई राधिका छोड़ सब काम धाम
जादू कर डाला तेरी बांसुरी ने श्याम
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भूल गई सुध बुध सुन मुरली की धुन
खिची चली आई बजे पायल रुनझुन
छेड़ दी कैसी तूने  ये तान  मनमोहन
बावरी भई प्रीत होंठो पे तेरा नाम

दौड़ी आई राधिका..
.
आँख मिचौली यूँ मत खेलो भगवन
जाओगे कहाँ छोड़ मोरा ये मन
रूप सलोना सजे पीताम्बर तन
वारी जाये कान्हा पर राधा सुबह शाम
.
दौड़ी आई राधिका छोड़ सब काम धाम
जादू कर डाला तेरी बांसुरी ने श्याम

रेखा जोशी