Saturday, 10 November 2018

छठ पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं

छठ पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं

कर सवार
सात घोड़ों के रथ पर
अपनी लालिमा से
दिवाकर ने रंग दिया आसमान

चलो सखी नदिया के नीर
करने प्रणाम
मिला जिससे हमें जीवन दान

आओ दें अर्ध्य 
सूरज की
प्रथम मचलती रश्मियों को
लहराती झूमती
तरंगिनी की लहरों पर
चलो सखी नदिया के नीर
थाली सजा के पूजने
सूरज के रथ को
प्रणेता जीवन का
जिसके
आगमन से हुई आलौकिक धरा
जीवन दाता हमारा
है उससे ही तन में प्राण

चलो सखी नदिया के नीर
करने प्रणाम
मिला जिससे हमें जीवन दान

रेखा जोशी

Friday, 2 November 2018

न्याय

है हल्ला बोलता दुनिया में अन्याय
आँखों  पे  पट्टी  बांधे  खड़ा  न्याय
घिस जाते  जूते  न्याय की आस में
न्याय मिले जल्दी नहीं कोई उपाय

रेखा जोशी

Monday, 29 October 2018

कभी तो मुस्कुराओ  तुम

1222 1222

कभी तो गुनगुनाओ तुम
कभी तो मुस्कुराओ  तुम
.
रहो गुमसुम न तुम हरदम
पिया अब गीत गाओ तुम
.
नहीं  अब  ज़िंदगी   तन्हा
हमारे  पास  आओ   तुम
.
खिली उपवन कली साजन
उसे  अपना  बनाओ   तुम
.
हमारी    ज़िंदगी    तुमसे
इसे प्रियतम सजाओ तुम

रेखा जोशी

Friday, 26 October 2018

करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाएं


करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाएं

सजधज कर सजना आज सोलह सिंगार करूँ
माथे सजा बिंदिया चाँद का दीदार करूँ
.
तुमसे ही  है प्रियतम रंग जीवन में मेरे
प्रार्थना प्रभु से तेरे लिए बार बार करूँ
.
खुशनसीब हूँ जिंदगी में तुम आए मेरे
सपने अपने पिया तुमसे ही साकार करूँ
.
जन्म जन्‍म में साथी रहों तुम साजन मेरे
हर जन्‍म में पिया तुमसे ही सदा प्यार करूँ
.
खुशियाँ सदा मिलती ही रहें जीवन में तुम्हें
वारी जाऊँ जीवन यह तुम पर निसार करूँ

रेखा जोशी

Wednesday, 24 October 2018

खुशियाँ लेकर आई दिवाली


फुलझड़ी  से निकले अंगारे
हवा में  ज्यों नाचते  सितारे
खुशियाँ लेकर आई दिवाली
खिले बच्चों  के चेहरे  प्यारे

रेखा जोशी

Tuesday, 23 October 2018

शरद  के चाँद  से  बरसे

शरद  के चाँद  से  बरसे
अमृत सी रस की किरणें
बिखरी चाँदनी  धरा पर
तन मन को शीतल  करे

Monday, 22 October 2018

ईमानदारी और नैतिकता


ईमानदारी और नैतिकता

वंदना अपनी नन्ही सी बेटी रीमा की ऊँगली थामे  बाज़ार जा रही थी तभी उसे रास्ते में चलते चलते एक रूपये का सिक्का जमीन पर पड़ा हुआ मिल गया,उसकी बेटी रीमा ने  झट से उसे उठा कर ख़ुशी से उछलते हुए  वंदना से कहा ,''अहा,मम्मी मै तो इस रूपये से टाफी लूंगी,आज तो मज़ा ही आ गया ''| अपनी बेटी के हाथ में सिक्का देख वंदना उसे समझाते हुए बोली  ,''लेकिन बेटा यह सिक्का तो तुम्हारा नही है,किसी का इस रास्ते पर चलते हुए गिर गया होगा  ,ऐसा करते है हम  मंदिर चलते है और इसे भगवान जी के चरणों में चढ़ा देते है ,यही ठीक रहे गा ,है न मेरी प्यारी बिटिया ।

'वंदना ने अपनी बेटी को  ईमानदारी का पाठ तो पढ़ा दिया लेकिन इस देश में ईमानदारी और नैतिकता जैसे शब्द खोखले,  निरर्थक और अर्थहीन हो चुके है,एक तरफ तो हम अपने बच्चों से  ईमानदारी ,सदाचार और नैतिक मूल्यों की बाते करते है और दूसरी तरफ जब उन्हें समाज में पनप रही अनैतिकता और भ्रष्टाचार का सामना करना पड़ता है तब  हमारे बच्चे ,इस देश के भविष्य निर्माता टूट कर बिखर जाते है ,अपने परिवार  से मिले आदर्श संस्कार उन्हें अपनी ही जिंदगी में आगे बढ़ कर समाज एवं राष्ट्र हित के लिए कार्य करने में मुश्किलें पैदा कर देते है  और कुछ लोग सारी जिंदगी घुट घुट कर जीते है | 

हमारे देश में हजारों , लाखों युवक और युवतिया बेईमानी ,अनैतिकता ,घूसखोरी के चलते क्रुद्ध ,दुखी और अवसादग्रस्त हो रहे है ,लेकिन क्या नैतिकता के रास्ते पर चल ईमानदारी से जीवन यापन करना पाप है ?

  रेखा जोशी