Friday, 18 August 2017

थोथा चना बाजे घना


शांत  गहरे सागर रहते
झर झर झर झरने छलकते
,
ज्ञानी मौन यहां पर रहें
पोंगे पण्डित ज्ञान  देवें
,
थोथा चना बाजे घना
गुणगान करे अपना यहां
,
कुहू कुहूक कोयल गाए
राग गाता  कागा जाए
,
आधा अधूरा ज्ञान लिए
गुणों का अपने गान करे

रेखा जोशी

Wednesday, 16 August 2017

बहारें ज़िन्दगी में प्यार ले कर आप आयें है

विधाता छंद
1222. 1222. 1222. 1222

बहारें ज़िन्दगी में प्यार ले कर आप आयें हैं
कलम से खींच सपने आज काग़ज़ पर सजायें हैं
,
निगाहों में हमें तेरी दिखा है प्यार ही साजन
मिले जो तुम हमें तो फूल अंगना में खिलायें हैं
,
कहेंगे बात दिल की अब निगाहों ही निगाहों से
सजन अब बात दिल की हम यहां तुमको सुनायें हैं
,
खुशी अपनी पिया कैसे बतायें आज हम तुमको
पिया हम संग दिल में प्यार भर कर आज लायें हैं
,
हवाएं भी यहां पर आज हमको छेड़ती साजन
कहे जोशी नज़ारों  से पिया दिल में समायें है

रेखा जोशी

काली अँधेरी रात
छूटा साये  का भी साथ
धड़कता दिल कांपते हाथ

लगता क्यों
न जाने
कोई है मेरे साथ
चल रहा संग मेरे
जगाता दिल में मेरे
इक आस
रख कर हिम्मत
बढ़ता चल न डर
झाँक दिल में अपने
थरथराती लौ दिये की
दिखा रही राह
स्याह अँधेरे में
लेकिन
फिर भी रहा मेरा
धड़कता दिल कांपते हाथ

भीतर ही भीतर
हो रही उजागर
राह मंज़िल की
थामे अपनी साँसे
नहीं दी बुझने
वह थरथराती लौ
रखती रही पग अपने
संभल संभल कर
लेकिन
फिर भी रहा मेरा
धड़कता दिल कांपते हाथ

रेखा जोशी

Monday, 14 August 2017

कुकुभ छंद

 छंद कुकुभ
यह चार पद का अर्द्धमात्रिक छन्द है. दो चरणों के हर पद में 30 मात्राएँ होती हैं और यति १६,१४ पर होती है, पदां त में दो गुरु आते है।

हे माखनचोर नन्दलाला ,है मुरली मधुर बजाये 
धुन सुन  मुरली की गोपाला ,राधिका मन  मुस्कुराये
चंचल नैना चंचल चितवन, राधा को मोहन  भाये  
कन्हैया से  छीनी मुरलिया  ,बाँसुरिया  अधर लगाये

छंद पर आधारित मुक्तक 

हे माखनचोर नन्दलाला ,है मुरली मधुर बजाये 
धुन सुन  मुरली की गोपाला ,राधिका मन मुस्कुराये 
चंचल नैना चंचल चितवन,  गोपाला से प्रीत लगी
कन्हैया से छीनी मुरलिया  , बाँसुरिया अधर लगाये 

रेखा जोशी 

Sunday, 13 August 2017

हिंडोले

हिंडोले
संस्मरण ( कृष्ण जन्माष्टमी पर)

मै और मेरी दादी दोनों हर त्यौहार मिल कर अलग ही अंदाज में मनाया करते थे ।मै बहुत ही भाग्यशाली हूं कि मुझे अपनी दादी का भरपूर स्नेह मिला।बात  कृष्ण जन्माष्टमी की है ।अमृतसर का एक बजार जिसके कोने में एक कुआं है ,जो " सुनियारा वाला खुह" के नाम से जाना जाता है,उसी बाज़ार में हम किराए के मकान में रहा करते थे ,मै बहुत छोटी थी लेकिन उस घर की और बजार की अमिट  यादें अभी भी मेरे  मानस पटल पर अंकित है।हमारे घर के आस पास बहुत से मंदिर हुए करते थे , कृष्ण जन्माष्टमी पर सांझ ढलते ही  सभी मंदिर खूबसूरत लाइट्स से जगमगाने लगते थे, औरमै अपनी दादी की ऊंगली थाम कर एक मन्दिर से दूसरे ,और दूसरे से तीसरे ,घर के आस पास कितने भी मन्दिर हुआ करते थे, सभी मंदिरों में हिंडोले(झांकियां) देखने जाया करती थी

हिंडोले देख कर बहुत अच्छा लगता था,लेकिन उससे भी अच्छा लगता था हर झांकी में छुपी कृष्ण की लीलाओं की  कहानी ,जिसे मेरी दादी बहुत खूबसूरत अंदाज में सुनाया  करती थी  । जैसे ,कान्हा का जन्म ,माखन चुराना ,गोपियों को सताना,कलिया नाग मर्दन,जितनी झांकियां देखती उतनी ही कहानियां । मेरी दादी रात को कृष्ण के जन्म लेने के बाद ही प्रसाद ग्रहण करती थी,और तब तक उनकी कहानियों का सिलसिला चलता रहता था। देर रात को हम घर आते थे और मै कृष्ण की कहानियों में डूबी कब सो जाती थी पता ही नहीं चलता  था ।

रेखा जोशी

Friday, 11 August 2017

खुशी से गीत साजन गुनगुनाना है


हमे तो अब  ख़ुशी से खिलखिलाना है 
सुमन उपवन पिया अब तो खिलाना है
मिली  है  ज़िन्दगी अब  मुस्कुराओ तुम
ख़ुशी  से  गीत  साजन   गुनगुनाना  है 
,

मीत आज ज़िन्दगी हमें  रही पुकार है
रूप देख ज़िन्दगी खिली यहां बहार है
पास पास  हम रहें मिले ख़ुशी हमें सदा
छोड़ना न हाथ आज छा रहा खुमार है

रेखा जोशी 

Thursday, 10 August 2017

प्रीति की लौ जलाने की बात कर


प्रीत की लौ जलाने की बात कर
साजन  प्यार निभाने की बात कर
,
पल दो पल की ज़िन्दगी अब जी लें
यूं न अब दिल दुखाने  की बात कर
,
खुला आसमां  बुला  रहा है हमें
जहां से दूर जाने की बात कर
,
बहुत रोये है जीवन में हम अब
ज़िन्दगी  मुस्कुराने की बात कर
,
अाई है चमन में  बहारें सजन
अब गीत गुनगुनाने की बात कर

रेखा जोशी