Tuesday, 17 April 2018

खुशियों के रंग अब जीवन में भर लें


भूल  गए  हम नहीं  है यहाँ ठिकाना
चलो  गायें  हम मिलकर नया तराना
खुशियों के रंग अब जीवन में भर लें
यूँही    बुनते  रहे  हम   ताना   बाना

रेखा जोशी

Sunday, 15 April 2018

बाल गीत

आई  है   बिटिया  अँगना  में  मेरे
घर   की  दीवारें  लगी  है  महकने

देखती  हूँ   मै  जब नन्ही परी  को  
बचपन   झूमें  फिर   नैनों   में  मेरे
पापा  की प्यारी  मम्मी  की दुलारी
लौटा  के लाई  वो पल छिन  प्यारे
..
वो  चोटी  लहराये   पहन के साड़ी
चहके  मटके  वो  अँगना   में खेले
माँ  के  दुपट्टे  से  खुद  को  सजाये
सुबह और शाम वह सबको नचाये

भरी  दोपहर  वो अँगना  में  छुपना
गुडिया के संग वो  घर  घर  खेलना
चहकने  लगा  है  घर   आँगन  मेरा
मधुर हंसी से जब वो  खिलखिलाये

आई   है   बिटिया  अँगना  में   मेरे
घर   की  दीवारें   लगी  है  महकने

रेखा जोशी 

Thursday, 12 April 2018

भर उमंग जीवन में अपने

नहीं कटता अकेले
जिंदगी का सफर
किसे सुनाएँ
हाल ए दिल अपना
कंटक इक सीने में चुभता
फिर भी
मुस्कुरा कर चल मुसाफिर

सुख दुख जीवन के
दो पहलू
आते जाते
फ़िर क्यों हम
ग़म में डूब जाते
किस बात का हम
ग़म मनाते
जीवन है इक
छोटा सा सफर
जी ले जीवन का हर पल
फिर यहां सदा
मुस्कुरा कर चल मुसाफिर
भर उमंग जीवन में अपने
और फिर
मुस्कुरा कर चल मुसाफिर

रेखा जोशी

Wednesday, 11 April 2018

अजब है प्रकृति की माया

खिल  ही  जाते हैं फूल
सूखी चाहे हो धरा
अजब है प्रकृति की माया
हैं रँग इसके निराले
विषम प्रस्थितियों में भी
जीवंत हो उठता है जीवन
हो जाता है फूटाव पौधों का
चीर के सीना
कड़ी से कड़ी चट्टानों का भी
अंत महकेगा सफर जीवन का
संघर्ष है जीवन हमारा
सिखलाती प्रकृति हमें
संघर्ष से ही खिलेगा
हर लम्हा जीवन का

रेखा जोशी

Monday, 9 April 2018

माँ

माँ

है बरकत माँ के हाथों में
भर देती अपने बच्चों की झोली
खुशियों से
रह जाती सिमट कर दुनिया सारी
उसकी अपने बच्चों में
करती व्रत अपने परिवार के
कल्याण के लिए
चाहती सदा उन्नति उनकी
लेकिन अक्सर नहीं समझ पाते
बच्चे मां के प्यार को
जो चाहती सदा भलाई उनकी
नहीं देखा भगवान को कभी
लेकिन रहता माँ के दिल में
वोह

रेखा जोशी

Saturday, 7 April 2018

हो रहा गरीबों  पर यह अत्याचार है
आरक्षण के दरअसल वो हकदार है
पीढ़ी दर  पीढ़ी  ले रहे जो आरक्षण
बनते  जा  रहे   भारत  में दमदार है
,
हुआ जहां नारी का सम्मान है
बसा उस घर मे तो भगवान है
दे सँस्कार  परिवार  को  नारी
परिवार नारी  का अभिमान है

रेखा जोशी

Friday, 6 April 2018

दो मुक्तक


सबकी बात न  माना कर 
सही गलत को जाना कर 
मत   आना   बहकावे  में 
सच  को भी पहचाना कर
.
न जाने यह ज़िन्दगी की राह कब कहाँ ले जाये गी
आज गम है तो कल इस जीवन में खुशी भी आये गी 
इस ज़िन्दगी में सुख और दुख तो सब है समय का फेर 
न हो उदास रात के बाद सुबह भी जरूर आये गी 

रेखा जोशी