Sunday, 16 April 2023

कहानी हमारी रही अनकही है (गीत )

गीत 

आधार छंद  भुजंगप्रयात
122 122 122 122
कहानी हमारी रही अनकही  है 
किसी को हमारी खबर ही नहीं है 

अधूरे रहे आज सपने हमारे 
चले संग अपने गगन चांद तारे 
मगर घर यहां चाँदनी भी नहीं है 
किसी को हमारी खबर ही नहीं है 

खुशी थी बहुत जिंदगी साथ पा कर 
डुबाया हमें आज मझधार ला कर 
किनारे लगी आज नैया नहीं  है 
किसी को हमारी खबर ही नहीं है 

कहानी हमारी रही अनकही है 
किसी को हमारी खबर ही नहीं है 














Monday, 10 April 2023

पेड़ की व्यथा

शीर्षक। पेड़ की व्यथा 

किसे सुनाऊँ मैं व्यथा अपनी 
किस हाल में हूँ मैं अब 
कभी था  मैं  भी जीवंत 
झूम उठती थी तब हरी भरी  
फूलों फलो से लदी डालियाँ मेरी 

खड़ा था सीना तान कर अपना 
नहीं डरा तूफ़ानों से कभी 
परिंदों के  घरौंदों से भरा था तन मेरा
था  गूँजता पंछियों का कलरव 
सुबह शाम 
चिड़ियों की चहक, कोयल की कुहूक
थिरकता था मधुर संगीत 
शीतल हवाओं में 
झूम उठती थी  तब हरी भरी  
फूलों फलो से लदी डालियाँ मेरी 

भरी दोपहरी में कभी 
शीतल छाया से मेरी  
पथिक कोई थका हारा र
घड़ी दो घड़ी कर विश्राम 
पा कर सकून 
निकल पड़ता राह अपनी 
झूम उठती थी तब हरी भरी  
फूलों फलो से लदी डालियाँ मेरी 

दिया अपना सब कुछ 
मानव तुम्हें 
काट काट कर जंगल तुमने 
अंग भंग कर दिया मेरा 
किसे सुनाऊँ मैं व्यथा अपनी 
किस हाल में हूँ मैं अब 
कभी था मैं भी जीवंत 
झूम उठती थी तब हरी भरी  
फूलों फलो से लदी डालियाँ मेरी 

रेखा जोशी 

Saturday, 8 April 2023

करेंगे याद तुमको हम उमर भर

1222 1222 122
हमारी ज़िंदगी हमसे खफा है
ज़माना ज़िन्दगी पीछे पड़ा है
,,
नही चाहा कभी हम दूर जायें
करें क्या प्यार लेता इम्तिहाँ है
,,,
न आयें हम यहाँ पर लौट कर फिर
नही तुम भूलना हमको पिया है
,,,
करेंगे याद तुमको हम उमर भर
करेंगे फिर नही तुमसे गिला है
,,,
गई है अब उजड़ दुनिया हमारी
नहीं कोई खुशी ग़म ही मिला है 


रेखा जोशी

Saturday, 1 April 2023



आधार छंद- राधेश्यामी छंद 
32 मात्रा, 16 16 मात्रा पर यति, 

समान्त- ,आरी 
पदान्त है 

तोता मैना तो बहुत सुने ,अब तेरी मेरी बारी है 
हम संग संग रहेंगे सदा ,यह तो कहानी हमारी है
..
जियेंगे संग संग मरेंगे ,साथ हम तुम दोनों रहेंगे 
अब तो कदमों तले हमारे, साजन दुनिया यह सारी है
,
राहें जुदा हो  ना हमारी, चलते रहें हमसफर यूँही 
सूरज की तपिश हो कहीं या, छाई कहीं घटा कारी है
,
मिलकर संग चलेंगे दोनों,कदम से कदम मिलाकर सदा 
बहका बहका मौसम प्यारा ,कुहुके कोयल हर डारी है
,
गुंजित भँवरे कली मुस्काए, है उपवन उपवन फूल खिले
प्यार का हमें उपहार मिला, महकने लगी फुलवारी है

रेखा जोशी