Monday, 29 August 2016

चांदनी रात है कहाँ हो तुम


शौक से आप दिल यहाँ रखिए 
प्यार में आप बस वफा रखिए

...
चाँद भी आज ढूँढता तुम को 
रात तेरे लिए सजा  रखिए
....
बात दिल की किसे बताए हम
दर्द दिल मे सदा छुपा रखिए
....
साथ तेरा हमें मिला साजन 
आस से यूँ  भरा जहाँ रखिए 
... 
चांदनी रात है कहाँ हो तुम 
खूबसूरत यहाँ फ़िज़ा  रखिए 

रेखा जोशी 

मन ही देवता मन ही ईश्वर

मन ,जी हाँ मन ,एक स्थान पर टिकता ही नही पल में यहाँ तो अगले ही पल न जाने कितनी दूर पहुंच जाता है ,हर वक्त भिन्न भिन्न विचारों की उथल पुथल में उलझा रहता है ,भटकता रहता है यहाँ से वहाँ और न जाने कहाँ कहाँ ,यह विचार ही तो है जो पहले मनुष्य के मन में उठते है फिर उसे ले जाते है कर्मक्षेत्र की ओर । जो भी मानव सोचता है उसके अनुरूप ही कर्म करता है ,तभी तो कहते है अपनी सोच सदा सकारात्मक रखो ,जी हां ,हमें मन में उठ रहे अपने विचारों को देखना आना चाहिए ,कौन से विचार मन में आ रहे है और हमे वह किस दिशा की ओर ले जा रहे है ,कहते है मन जीते जग जीत ,मन के हारे हार ,यह मन ही तो है जो आपको ज़िंदगी में सफल और असफल बनाता है ।
ज़िंदगी का दूसरा नाम संघर्ष है ,हर किसी की ज़िंदगी में उतार चढ़ाव आते रहते है लेकिन जब परेशानियों से इंसान घिर जाता है तब कई बार वह हिम्मत हार जाता है ,उसके मन का विश्वास  डगमगा जाता है और घबरा कर वह सहारा ढूँढने लगता है ,ऐसा ही कुछ हुआ था सुमित के साथ जब अपने व्यापार में ईमानदारी की राह पर चलने से उसे मुहं की खानी पड़ी ,ज़िंदगी में सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ने की जगह वह नीचे लुढ़कने लगा ,व्यापार में उसका सारा रुपया डूब गया ,ऐसी स्थिति में उसकी बुद्धि ने भी सोचना छोड़ दिया ,वह भूल गया कि कोई उसका फायदा भी उठा सकता ,खुद पर विश्वास न करते हुए ज्योतिषों और तांत्रिकों के जाल में फंस गया ।
जब किसी का मन कमज़ोर होता है वह तभी सहारा तलाशता है ,वह अपने मन की शक्ति को नही पहचान पाता और भटक जाता है अंधविश्वास की गलियों में । ऐसा भी देखा गया है जब हम कोई अंगूठी पहनते है या ईश्वर की प्रार्थना ,पूजा अर्चना करते है तब ऐसा लगता है जैसे हमारे ऊपर उसका सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है लेकिन यह हमारे अपने मन का ही विश्वास होता है । मन ही देवता मन ही ईश्वर मन से बड़ा न कोई ,अगर मन में हो विश्वास तब हम कठिन से कठिन चुनौती का भी सामना कर सकते है |

रेखा जोशी 

Sunday, 28 August 2016

बैर भाव त्याग कर ले सब से प्यार

छोटा सा जीवन दिन गिनती के चार
बैर भाव  त्याग  कर ले  सब से प्यार
दीन  दुखी  को  अपने  गले  लगा ले
प्रीत   प्रेम  से  तू    जीवन  ले  सँवार

रेखा जोशी 

Saturday, 27 August 2016

सूरज निकला जब ,है पुष्पित उपवन ,बगिया उड़ी तितली ,खिलती कली कली

हुई रौशनी इधर,उजियारा आसमान,महका आँगन अब, यहाँ बगिया खिली
सूरज निकला जब ,है पुष्पित उपवन  ,बगिया उड़ी तितली  ,खिलती कली कली
दस्तक दी सुबह ने , नभ में उड़ते पंछी ,चिड़िया चहक रही , अब सखियाँ मिली
आया दिवाकर अब   ,हर्षित लालिमा लिये ,आसमान  मुस्कुराया  , पवन मनचली


रेखा जोशी


Friday, 26 August 2016

तुम बिन जी पायेंगे कैसे , तुमसे ही मेरा जीवन

तुम बिन  जी  पायेंगे कैसे  , तुमसे  ही मेरा जीवन
दोनों की इक मंज़िल साथी  तुम ही हो मेरे साजन  
धीरे  धीरे  बन  जायेगी ,तेरी मेरी फिर जोड़ी 
जीतेंगे  हम तब  जग सारा, सबसे प्यारा यह बन्धन 

रेखा जोशी 

हाइकु [बाढ़ पर ]

हाइकु [बाढ़ पर ]

जल प्रलय
टूट गई उम्मीद
बहते घर
...
जाये किधर
मंज़िल न ठिकाना
उजड़ा घर
....
दिल में अग्न
रक्षा करो हमारी
हे  भगवन
....
साथी बिछड़े
कोई नही अपना
ढूंढते उन्हें
...
 पानी बहता
बह गई दुनिया
दिल दुखता
...
रेखा जोशी




Thursday, 25 August 2016

आधार छंद --- चौपाई मात्रा भार --- 16 
मापनी मुक्त
अंत में जगण (121) वर्जित |
अंत में गुरु गुरु ( अर्थात 22 / 1111 / 112 / 211) अनिवार्य |

मुरली मधुर भाये मुरारी
श्याम पर गोपियाँ  बलिहारी
..
मोर पँख  पीताम्बर सोहे
राधा लगे कृष्णा  को प्यारी
..
गोपियों संग रास रचाये
गोकुल में गिरधर  गिरधारी
..
गेंद खेलन ग्वाले आये
कालिया पर कन्हैया भारी
...
माखनचोर माँ को  सताये
कान्हा पर यशोदा वारी

रेखा जोशी


Wednesday, 24 August 2016

”हैप्पी बर्थडे कृष्णा ” [कृष्ण जन्माष्टमी विशेष ]


हैप्पी बर्थडे कृष्णा(जन्माष्टमी पर विशेष)

बचपन में एक फ़िल्मी भजन सुना करते थे ,”बड़ी देर भई नन्दलाला ,तेरी राह तके ब्रज बाला ,ग्वाल बाल इक इक से पूछे कहाँ है मुरलीवाला ”| सच में कहाँ छुप कर बैठाहै वह देवकी नन्दन , नन्दकिशोर ,माँ यशोदा का प्यारा ,गोपियों का दुलारा,सुदामा अर्जुन का सखा , द्रोपदी की लाज बचाने वाला ,अन्याय के विरुद्ध शंखनाद करने वाला ,न्याय का रक्षक ,निडर ,कर्म का पाठ पढाने वाला हमारा कृष्णा कहाँ है ?आज कलयुग अपनी चरम प्रकाष्ठा पर है ,सब ओर अधर्म ही अधर्म ,कालिया नाग सा ज़हर फैला रहा है ,द्रोपदी जैसी कई बालाओं का आज हर घड़ी चीर हरण हो रहा है ,असत्य का बोलबाला है ,कई सुदामा गरीबी से झूझते हुये आज अपने प्रिय सखा को पुकार रहें है ,कान्हा कहाँ हो तुम ?हे प्रभु तुमने तो वचन दिया था कि अधर्म का नाश करने और धर्म को स्थापित करने तुम हर युग में आओगे |

हर वर्ष भाद्रपद माह की अष्टमी को पूरा भारत तुम्हारा हैप्पी बर्थडे ”कृष्ण जन्माष्टमी ” के रूप में धूमधाम से मनाता है |जगह जगह मन्दिरों को सजाया जाता है ,तुम्हारी लीलाओं की झांकियाँ निकाली जाती है .हिंडोले सजते है और तुम्हारा यशगाण किया जाता है ,ख़ास तौर पर तुम्हारा जन्मस्थल और तुम्हारी जन्मभूमि मथुरा में इस दिन देश विदेश से तुम्हारे भक्त इकट्ठे होकर हर्षोल्लास से तुम्हारा जन्मदिवस मनाते है लेकिन तुम्हारी लीलाओं में छुपे हुये सन्देश और श्रीमद भगवत गीता में जो उपदेश तुमने दिए है अगर हम उन्हें अपने जीवन में उतारने का प्रयत्न करें तो हम अपना जीवन सफल बना सकते है |बाल्यावस्था से लेकर महाभारत तक तुम्हारा सम्पूर्ण जीवन ही से प्रेरणा से भरा हुआ है|फल की इच्छा न करते हुये कर्म करने की महिमा को तुमने बखूबी से श्रीमद भगवत गीता के माध्यम से बताया है बचपन में कालिया मर्दन किया ,अपने मामा कंस को मार कर तुमने अन्याय के प्रतिरोध में लड़ना सिखाया ,महाभारत में धर्म का साथ दिया और अधर्म को मिटाया |

हे गोवर्धनधारी ,मनमोहन ,कन्हाई ,बंसीधर तेरी लीला अपरम्पार है ,बाल्यकाल में माँ यशोदा को माटी मुख में रख सम्पूर्ण ब्रह्मांड के दर्शन करवाने वाले हमारी प्रार्थना स्वीकार करें ,अपने सखा अर्जुन को विराट रूप दिखाने वाले प्रभु हमारी प्रार्थना स्वीकार करें ,हम भारतवासियों पर अपनी अनुकम्पा करे और हम सब तुम्हारे बताये हुये मार्ग पर चल कर स्वयं को ,समाज को और देश को उत्थान की ओर लेकर जायें| ”हैप्पी बर्थडे कृष्णा ” तुम्हारे जन्मोत्सव पर आप हमारी यह प्रार्थना स्वीकार करें |

रेखा जोशी

……..….............…

भागती रही धूप के पीछे

झाँक रहा सूरज
फिर
बादलों की ओट से
और
धूप फिसलती रही
यहाँ वहाँ
आकर पास मेरे
न जाने क्यों
फिर
छिटक जाती
इधर उधर
..
ख़्वाब मेरे
तैरते रहे आँखों में
कल्पनाओं में मेरी
उड़ती रही तितलियाँ
भागती रही धूप के पीछे
खुलते ही आँखे
न जाने क्यों
बिखर गये ख्वाब
सब
इधर उधर
..
ढूँढ रही भीड़ में
चाहते अपनी
खो गई न जाने कहाँ
भटकती आँखे
देख रही
इधर उधर
..
रेखा जोशी
……........................

गीतिका 

रहेगी देश की अब शान आँखों पे
तिरंगे का करें सम्मान आँखों पे
जहाँ में देश चमकेगा सदा भारत
ज़ुबा पर अब रहेगा नाम आँखों पे
करें हम नमन भारत के जवानों को
शहीदों का रखेंगे मान  आँखों पे
....
करेंगे खत्म घोटाले सभी मिल कर
रखेंगे देश का अभिमान आँखों पे
 मिला कर कदम चलते ही रहेंगे हम
रखेंगे देश की अब आन आँखों पे
रेखा जोशी 

जूही चमेली संग महक रहे रंग बिरंगे फूल

पवन  के झोंकों  ने हौले  से फूलों को सहलाया 
गुनगुना रहे भौरों ने  भी मधुर गीत गुनगुनाया 
जूही  चमेली  संग  महक  रहे  रंग बिरंगे  फूल 
फूलों पर नाच रही तितली ने भी उत्सव मनाया 

रेखा जोशी 

Tuesday, 23 August 2016

साहस

नीले नभ पर 
उड़ चले पंछी 
इक लम्बी उड़ान
संग साथी लिए 
निकल पड़े सब
तलाश में अपनी 
थी मंजिल अनजान 
अनदेखी राहों में
जब हुआ सामना
था भयंकर तूफ़ान
घिर गए चहुँ ओर से 
और फ़स गए वो सब
इक ऐसे चक्रव्यूह में 
अभिमन्यु की तरह 
निकलना था मुश्किल 
पर बुलंद हौंसलों ने 
कर दिया नवसंचार 
उन थके हारे पंखो में 
भर दी इक नयी ताकत 
उस कठिन घड़ी में 
मिलकर उन सब ने 
अपने पंखों के दम पे 
टकराने का तूफान से 
था साहस दिखलाया
अपने फडफडाते परों से
था तूफ़ान को हराया 
हिम्मत और जोश लिए
बढ़ चले वह फिर से
इक अनजान डगर पे 

रेखा जोशी 

Monday, 22 August 2016

नन्ही सी चिड़िया

हो रही बेताब
छूने को आसमान
नन्ही सी चिड़िया
है फड़फड़ा रहे पँख
भरने को उड़ान
सीने में अग्न
हौंसले बुलन्द
जाग जाते अरमान
देखते ही गगन
लेकिन खींच लेते
नीचे नीड़ पर
चहकते उसके बच्चे
पुकारते उसे
थम जाते वहीं उसके
फड़फड़ाते पँख
नेह नैनों में लिए
भर लेती उन्हें
अंक में अपने
सिमट आते नन्हे मुन्हे
उसके फड़फड़ाते पँखों में

रेखा जोशी 
आज का छंद - हरिगीतिका (28 मात्रा, 16,12 पर यति उत्तम, 5,12,19,26 पर लघु) 
मापनी - 2212 2212 2212 2212

दीपक जला कर प्रेम का संदेश हम देंगे यहाँ 
इक दिन सभी जन प्रेम और'प्यार समझेंगे यहाँ 
कुछ भी नही है ज़िंदगी में प्रेम प्रीति ' के सिवा 
हम आज सबको प्यार से अपना बना लेंगे यहाँ 

रेखा जोशी


है छू रही बेटियाँ भी आज आकाश को

खेल  कूद   में  आगे  आती  बेटियाँ  यहाँ
लाज भारत की अब बचाती  बेटियाँ  यहाँ
है  छू रही  बेटियाँ  भी आज  आकाश  को
ऑलम्पिक्स  में पदक लाती बेटियाँ यहाँ

रेखा जोशी 

Saturday, 20 August 2016

आखिर क्यों आता है गुस्सा ?[पूर्व प्रकाशित रचना ]

आखिर क्यों आता है गुस्सा ? 

अमित अपने पर झल्ला उठा ,”मालूम नहीं मै अपना सामान खुद ही रख कर क्यों भूल जाता हूँ ,पता नही इस घर के लोग भी कैसे कैसे है ,मेरा सारा सामान उठा कर इधर उधर पटक देते है ,बौखला कर उसने अपनी धर्मपत्नी को आवाज़ दी ,”मीता सुनती हो ,मैने अपनी एक ज़रूरी फाईल यहाँ मेज़ पर रखी थी ,एक घंटे से ढूँढ रहा हूँ ,कहाँ उठा कर रख दी तुमने ?गुस्से में दांत भींच कर अमित चिल्ला कर बोला ,”प्लीज़ मेरी चीज़ों को मत छेड़ा करो ,कितनी बार कहा है तुम्हे ,”अमित के ऊँचे स्वर सुनते ही मीता के दिल की धड़कने तेज़ हो गई ,कहीं इसी बात को ले कर गर्मागर्मी न हो जाये इसलिए वह भागी भागी आई और मेज़ पर रखे सामान को उलट पुलट कर अमित की फाईल खोजने लगी ,जैसे ही उसने मेज़ पर रखा अमित का ब्रीफकेस उठाया उसके नीचे रखी हुई फाईल झाँकने लगी ,मीता ने मेज़ से फाईल उठाते हुए अमित की तरफ देखा ,चुपचाप मीता के हाथ से फाईल ली और दूसरे कमरे में चला गया ।
अक्सर ऐसा देखा गया है कि जब हमारी इच्छानुसार कोई कार्य नही हो पाता तब क्रोध एवं आक्रोश का पैदा होंना सम्भाविक है ,या छोटी छोटी बातों या विचारों में मतभेद होने से भी क्रोध आ ही जाता है |यह केवल अमित के साथ ही नही हम सभी के साथ आये दिन होता रहता है | ऐसा भी देखा गया है जो व्यक्ति हमारे बहुत करीब होते है अक्सर वही लोग अत्यधिक हमारे क्रोध का निशाना बनते है और क्रोध के चलते सबसे अधिक दुख भी हम उन्ही को पहुँचाते है ,अगर हम अपने क्रोध पर काबू नही कर पाते तब रिश्तों में कड़वाहट तो आयेगी ही लेकिन यह हमारी मानसिक और शारीरिक सेहत को भी क्षतिग्रस्त  करता है ,अगर विज्ञान की भाषा में कहें तो इलेक्ट्रोइंसेफलीजिया [ई ई जी] द्वारा दिमाग की इलेक्ट्रल एक्टिविटी यानिकि मस्तिष्क में उठ रही तरंगों को मापा जा सकता है ,क्रोध की स्थिति में यह तरंगे अधिक मात्रा में बढ़ जाती है | जब कोई व्यक्ति पूरी तरह से अपना मानसिक संतुलन खो बैठता है तब मस्तिष्क तरंगे बहुत ही अधिक मात्रा में बढ़ जाती है और चिकित्सक उसे पागल करार कर देते है | क्रोध भी क्षणिक पागलपन की स्थिति जैसा है जिसमे व्यक्ति अपने होश खो बैठता है और अपने ही हाथों से जुर्म तक कर बैठता है और वह व्यक्ति अपनी बाक़ी सारी उम्र पछतावे की अग्नि में जलता रहता है ,तभी तो कहते है कि क्रोध मूर्खता से शुरू हो कर पश्चाताप पर खत्म होता है |
मीता की समझ में आ गया कि क्रोध करने से कुछ भी हासिल नही होता उलटा नुक्सान ही होता है , उसने कुर्सी पर बैठ कर लम्बी लम्बी साँसे ली और एक गिलास पानी पिया और फिर आँखे बंद कर अपने मस्तिष्क में उठ रहे तनाव को दूर करने की कोशिश करने लगी ,कुछ देर बाद वह उठी और एक गिलास पानी का भरकर मुस्कुराते हुए अमित के हाथ में थमा दिया ,दोनों की आँखों से आँखे मिली और होंठ मुस्कुरा उठे |

रेखा जोशी 

अब करें पुष्प अर्पित विधा गीतिका

गीतिका
रस भरी भाव गुंजित विधा गीतिका। रस भरी गीत गुंजित विधा गीतिका
...
साज़  बिखरा  रहे धुन सुरीली यहाँ 
तान यह छेड़ हर्षित विधा गीतिका
.... 
शीश मंदिर झुका कर करें हम नमन 
अब  करें  पुष्प अर्पित विधा गीतिका
... 
हर्ष मन में भरे अंग  पुलकित ह्रदय 
दे खुशियाँ प्रफुल्लित विधा गीतिका
... 
सुर सुरीले बजें तार दिल के बजे 
गीत संगीत मोहित विधा गीतिका

रेखा जोशी 

Thursday, 18 August 2016

तार राखी में भर नेह बहना

जब  करूँ याद तुम चले आना 
छोड़ बहना कभी  नहीं  जाना 
..
बाँध लो प्यार तुम कलाई पर 
प्यार  उपहार संग  तुम लाना  
... 
भूल जाना न बहन  को  भैया 
 रिश्ता यह खास भैया निभाना
...  
माँगती  दुआ बहन तेरे लिये 
साल  अगले तुम  हमे बुलाना 
... 
तार राखी में  भर नेह  बहना 
टीका  माथे  अपना सजाना 

रेखा जोशी 

प्यार उपहार संग तुम लाना

जब  करूँ याद तुम चले आना 
छोड़ बहना कभी  नहीं  जाना 
बाँध लो प्यार तुम कलाई पर 
प्यार  उपहार संग  तुम लाना  

रेखा जोशी 

Wednesday, 17 August 2016

छोटी सी ज़िन्दगी में अरमान बहुत है


कहने को तो ज़िन्दगी  आसान बहुत है
यूँ  तो  यहाँ  जीने  के सामान बहुत है
दर्द  दिल  में छिपा कर जीना नहीं मुमकिन
छोटी सी ज़िन्दगी में अरमान बहुत है

रेखा जोशी

मनभावन रिश्ता प्यारा त्यौहार रक्षाबंधन

सभी भाई बहनों को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं

प्यार से भरे  यह  राखी  के तार  रक्षाबंधन
नेह  बंधन भाई  बहन का  प्यार रक्षाबंधन 
बचपन का अटूट साथ बंधा कच्चे धागों से 
मनभावन  रिश्ता प्यारा त्यौहार रक्षाबंधन 

रेखा जोशी 

Tuesday, 16 August 2016

तन्हाईयों में अपनी भीतर ही भीतर सुलगती रही

पूछती है सवाल
अक्सर
मेरी तन्हाईयाँ
मुझसे
गुनगुनाती जब
धूप आँगन में
गुमसुम सी तब
क्यों खोयी खोयी सी
तन्हाईयों में अपनी
भीतर ही भीतर
सुलगती रही
,,,
जीवन के सफर में
साथी मिले
कुछ अपने कुछ पराये
पराये अपने बने
कभी अपने पराये
पर पीड़ा अंतस की
तन्हाईयों में अपनी
भीतर ही भीतर
सुलगती रही
,,
महकते रहे फूल
मुस्कुराती रही कलियाँ
बगिया में
पर मुरझाती रही
लेती रही सिसकियाँ
तन्हाईयों में अपनी
भीतर ही भीतर
सुलगती रही
,,
पूछती है सवाल
अक्सर
मेरी तन्हाईयाँ
मुझसे
जीवन में
न ख़ुशी न गम
क्यों फिर
तन्हाइयों में अपनी
भीतर ही भीतर
सुलगती रही



आधार छंद - वाचिक स्रग्विणी

आधार छंद - वाचिक स्रग्विणी 

वाचिक मापनी - 212 212 212 212 

हर घड़ी ज़िंदगी की चहकने लगी
ज़िंदगी अब हमारी  सँवरने  लगी
खूबसूरत  सजी  ज़िन्दगी है  यहाँ 
आप आओ सजन बन्दगी है  यहाँ

रेखा जोशी 

मुक्तक

मुक्तक 

हर घड़ी ज़िंदगी की चहकने लगी
ज़िंदगी अब हमारी  सँवरने  लगी
झुक गई डालियाँ पुष्प खिलने लगे
अब  उमंगें  यहाँ पर उछलने  लगी
.....
प्यार  में  पिया  से  मिलने लगे
फूल दिल में सजन खिलने लगे
बिछे    शूल   राहों   में    हमारी
ज़ख्म फिर ह्रदय  के जलने  लगे

रेखा जोशी


Monday, 15 August 2016

ध्वजावरोहन समारोह ..एक संस्मरण [वाघा बॉडर ]--पूर्व प्रकाशित रचना

ध्वजावरोहन समारोह  ..एक संस्मरण [वाघा बॉडर ]--पूर्व प्रकाशित रचना 

दिन धीरे धीरे साँझ में ढल रहा था ,हमारी कार अमृतसर से लाहौर की तरफ बढ़ रही थी ,वाघा के नजदीक बी एस एफ के हेडक्वाटर से थोड़ी दूर आगे ही दो बी एस एफ के जवानो ने हमारी कार को रोका ,मेरे पतिदेव गाडी से नीचे उतरे और उन्हें अपना आई कार्ड दिखाया और उनसे आगे जाने की अनुमति ली | कार पार्किंग में ,छोड़ हम भारत पाक सीमा की ओर पैदल ही बढने लगे| सूरज की तीखी धूप सामने से हमारे चेहरों पर पड़ रही थी ,उधर से लाउड स्पीकर पर जोशीला गाना ,”चक दे ,ओ चक दे इण्डिया ”हम सब की रगों में एक अजब सा जोश भर रहा था | जैसे ही हमने सीमा के प्रांगण में कदम रखा ,तो वहाँ कुछ नन्ही बच्चियां और कुछ नवयुवतियां उस जोशीले गाने पर थिरक कर अपना राष्ट्रीय प्रेम व्यक्त कर रही थी |एक बी एस एफ के जवान ने हमें उस प्रांगण की सबसे आगे वाली पंक्ति में बिठा दिया ,ठीक मेरी बायीं ओर भारत पाकिस्तान की सीमा दिखाई दे रही थी ,दोनों ओर के फाटक साफ़ नजर आ रहे थे और बीच में था कुछ खाली स्थान जिसे ,”नो मेन’स लेंड” कहते है |फाटक के बाएं और दायें ओर बी एस एफ के जवान काले जूतों से ले कर लाल ऊँची पगड़ी तक पूरी यूनिफार्म में तैनात थे |

सीमा के इस ओर भारत का तिरंगा लहरा रहा था और सीमा के दूसरी ओर पाकिस्तान का झंडा था |उस समारोह में शामिल लोग  देश प्रेम के गीतों पर जोर जोर से तालियाँ बजा  रहे थे , और शायद उतने लोग सीमा पार ढोलक की थाप पर नाच रहे थे |पाकिस्तान के सीमा प्रहरी काली वेशभूषा में तैनात थे ,शाम के साढ़े पांच बज रहे थे ,समारोह की शुरुआत हुई भारत माता की जय से ,गूंज उठा सीमा का प्रांगण ,वन्देमातरम और हिन्दोस्तान की जय के नारों से ,कदम से कदम मिलाते हुए ,बी एस एफ की दो महिला प्रहरी काँधे पे रायफल लिए मार्च करती हुई सीमा के फाटक की ओर बढती चली गयी |एक ध्वनि लोगों को होशियार करती हुई ”आ आ …….अट” के साथ कदम मिलाते हुए दो जवान फाटक पर पाक सीमा की और मुख किये जोर से अपनी दायीं टांग सीधी उपर कर सर तक लेजाते हुए फिर उसे जोर से नीचे कर ” अट” की आवाज़ के साथ पैर नीचे को पटक कर सलामी देते है |भारत माता ,वन्देमातरम और हिन्दोस्तान की जय जयकार के जोशीले नारे लगातार हवा में गूंज रहे थे, यह पूरी प्रक्रिया तीन,चार बार दोहराई गयी ,सीमा पार से लगातार ढोलक बजने की आवाज़ आ रही थी |

शंखनाद के साथ श्रीमद भगवत गीता का एक श्लोक ,”यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिरभवति भारत |अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानम सृजाम्यहम || ”की लय पर भारतमाता के जवान प्रहरी कदम मिलाते हुए ,फाटक की ओर बढ़ते हुए उसे खोल दिया गया | रिट्रीट सैरिमोनी में दोनों ओर के सिपाहियों ने ,अपने अपने देश के झंडों को सलामी देते हुए ,ध्वजावरोहन की प्रक्रिया शुरू की |दोनों ओर के दर्शकों की तालियों से वातावरण गूंज उठा |राष्ट्र प्रेम की भावना से ओतप्रोत वहाँ  बैठा हर भारतीय अपने दिल से जय जयकार के नारे लगा रहा था |राष्ट्रीय गान के साथ दर्शकों ने खड़े हो कर सम्मानपूर्वक ,बी एस एफ के जवानो के साथ राष्ट्रीय ध्वज का अवरोहन किया| तालियों और नारों के मध्य दो जवानो ने सम्मानपूर्वक तिरंगे की तह को अपनी कलाइयो और हाथों पर रख कर सम्मान के साथ परेड करते हुए उसे वापिस लेते हुए चल पड़े |अन्य दो जवान मार्च करते हुए फाटक की तरफ बड़े और उसे बंद करने की प्रक्रिया शुरू हो गई |सूर्यास्त होने को था ,आसमान में आज़ाद पंछी सीमा के आरपार उड़ रहे थे ,लेकिन इस आधे घंटे की प्रक्रिया ने सीमा के इस पार हम सबके दिलों को राष्ट्रीय प्रेम के भावना से भर दिया और मै भावविभोर हो नम आँखों से वन्देमातरम का नारा लगते हुए बाहर की ओर चल पड़ी |

Sunday, 14 August 2016

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई


स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई 

भारत सीमा पर खड़े तन कर वीर जवान 
आये न आँच  देश  पर   देते  अपने प्राण   
आन बान  पर  देश की लाखों हुये  शहीद 
अपने भारत  के लिये   हो  जाते   कुर्बान 
रेखा जोशी 

Thursday, 11 August 2016

अरमान सब सँग तुम्हारे चले गये .

जाने  अब  कहाँ   नज़ारे   चले  गये
जीने   के   सभी    सहारे   चले  गये
.
ढल गया दिन भी और छुप गया चाँद
जाने    कहाँ  सब   सितारे  चले  गये
.
मालूम  था  तुम   ना  आओ  गे  यहाँ
फिर  भी  यूँ हि हम   पुकारे  चले गये
दर्द  इस  कदर   भी  सताये  गा  हमें 
अरमान  सब  सँग   तुम्हारे चले गये 
तेरे  बिन   सूना    हुआ  घर   हमारा 
लूट   कर   सब  तुम हमारे चले गये 

रेखा जोशी 

ज़िंदगी को मुस्कुराना आ गया है


प्यार में दिल को लुभाना आ गया है 
आज फिर मौसम सुहाना आ गया है 
मिल गई हमको ख़ुशी आये पिया घर 
ज़िंदगी  को  मुस्कुराना  आ गया  है 

रेखा जोशी 

शह और मात पर टिकी ज़िन्दगी यहाँ

है  सुख  या  दुख  से भरी ज़िन्दगी यहाँ
हार  या  जीत  से   बँधी   ज़िन्दगी यहाँ
पग पग बिछी यहाँ शतरंज की बिसात
शह  और  मात पर टिकी ज़िन्दगी यहाँ

रेखा जोशी

Wednesday, 10 August 2016

राखे राम सदा ह्दय तुलसी


जन जन दास मानस पहुँचाई
आदर्श  राह  की दिशा दिखाई
राखे राम  सदा  ह्दय  तुलसी
घर घर राम की जोत  जलाई

रेखा जोशी 

तुम निभाना साथ साजन अब यहाँ आकर अभी

2122 2122 2122 212
जिंदगी   होती   हजारों   रंग   से  सबकी  सजी
पर  उदासी  हो  हृदय  में  तो न कुछ भाता कभी
जी रहे हम आस को दिल में बसा कर अब सजन 
तुम  निभाना साथ साजन अब यहाँ  आकर अभी 

रेखा जोशी 

याद दिलाये प्यारा बचपन

रंग    बिरंगे    प्यारे     प्यारे
नीले    पीले     हरे     गुब्बारे
याद   दिलाये  प्यारा बचपन
थे वह  दिन मस्ती भरे न्यारे

रेखा जोशी

Tuesday, 9 August 2016

अन्नपूर्णा

”ट्रिग ट्रिन ”दरवाज़े की घंटी के बजते ही मीता ने खिड़की से झाँक कर देखा तो वहां उसने अपनी ही पुरानी इक छात्रा अनन्या को दरवाज़े के बाहर खड़े पाया ,जल्दी से मीता ने दरवाज़ा खोला तो सामने खड़ी वही मुधुर सी मुस्कान ,खिला हुआ चेहरा और हाथों में मिठाई का डिब्बा लिए अनन्या खड़ी थी । ”नमस्ते मैम ”मीता को सामने देखते ही उसने कहा ,”पहचाना मुझे आपने। ”हाँ हाँ ,अंदर आओ ,कहो कैसी हो ”मीता ने उसे अपने घर के अंदर सलीके से सजे ड्राइंग रूम में बैठने को कहा ।
 अनन्या ने टेबल पर मिठाई के डिब्बे को रखा और बोली ,”मैम आपको एक खुशखबरी देने आई हूँ मुझे आर्मी में सैकिड लेफ्टीनेंट की नौकरी मिल गई है ,यह सब आपके आशीर्वाद का फल है ,मुझे इसी सप्ताह जाईन करना है सो रुकूँ गी नही ,फिर कभी फुर्सत से आऊं गी ,”यह कह कर उसने मीता के पाँव छुए और हाथ जोड़ कर उसने विदा ली ।
 अनन्या के जाते ही मीता के मानस पटल पर भूली बिसरी तस्वीरे घूमने लगी, जब एक दिन वह बी एस सी अंतिम वर्ष की कक्षा को पढ़ा रही थी तब उस दिन अनन्या क्लास में देर से आई थी और मीता ने उसे देर से कक्षा में आने पर डांट दिया था और क्लास समाप्त होने पर उसे मिलने के लिए बुलाया था । पीरियड खत्म होते ही जब मीता स्टाफ रूम की ओर जा रही थी तो पीछे से अनन्या ने आवाज़ दी थी ,”मैम ,प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो ,”और उसकी आँखों से मोटे मोटे आंसू टपकने लगे । तब मीता उसे अपनी प्रयोगशाला में ले गई थी ,उसे पानी पिलाया और सांत्वना देते हुए उसके रोने की वजह पूछी ,कुछ देर चुप रही थी वो ,फिर उसने अपनी दर्द भरी दास्ताँ में उसे भी शरीक कर लिया था उसकी कहानी सुनने के बाद मीता की आँखे भी नम हो उठी थी ।उसके पिता का साया उठने के बाद उसके सारे रिश्तेदारों ने अनन्या की माँ और उससे छोटे दो भाई बहनों से मुख मोड़ लिया था ,जब उसकी माँ ने नौकरी करनी चाही तो उस परिवार के सबसे बड़े बुज़ुर्ग उसके ताया जी ने उसकी माँ के सारे सर्टिफिकेट्स फाड़ कर फेंक दिए,यह कह कर कि उनके परिवार की बहुएं नौकरी नही करती।
 हर रोज़ अपनी आँखों के सामने अपनी माँ और अपने भाई बहन को अपमानित होते देख अनन्या का खून खौल उठता था ,न चाहते हुए भी कई बार वह अपने तथाकथित रिश्तेदारों को खरी खोटी भी सुना दिया करती थी और कभी अपमान के घूँट पी कर चुप हो जाती थी ।पढने में वह एक मेधावी छात्रा थी ,उसने पढाई के साथ साथ एक पार्ट टाईम नौकरी भी कर ली थी ,शाम को उसने कई छोटे बच्चों को ट्यूशन भी देना शुरू कर दिया था| हर महीने पैसे बचा कर माँ की हथेली में रख दिया करती थी |
 फाइनल परीक्षा के समाप्त होते ही मीता को पता चला कि उनका परिवार कहीं और शिफ्ट कर चुका है ।धीरे धीरे मीता भी उसको भूल गई थी ,लेकिन आज अचानक से उसके आने से मीता को उसकी सारी बाते उसके आंसू ,उसकी कड़ी मेहनत सब याद आगये और मीता का सिर गर्व से ऊंचा हो गया उस लडकी ने अपने नाम को सार्थक कर दिखाया अपने छोटे से परिवार के लिए आज वह अन्नपूर्णा देवी से कम नही थी |

रेखा जोशी 

ओस की बूंदें

बूँद टपकी
भीगे मेरे नयन
उम्मीद छूटी
....
ओस की बूंदें
पत्तों पर चमकें
रो रही रातें

रेखा जोशी 

समाये हो भगवान तुम तो कण कण में यहाँ

खोज  में   तेरी  तुम्हे  यहाँ  वहाँ  देखते है
कभी हम ज़मीं तो कभी आसमाँ  देखते है
समाये हो भगवान  तुम तो कण कण में यहाँ   
तुम   ही   तुम  दिखाई  देते  जहाँ  देखते है

रेखा जोशी

उतर आई उषा मेरे द्वार

भर उठा नील नभ
अलौकिक आभा से 
शीतल पवन के झोंकों से 
सिहर उठा 
मेरा तन बदन 
सातवें आसमान से 
उतर रहा 
धीरे धीरे दिवाकर 
लिए रक्तिम लालिमा
सवार सात घोड़ों पर
पार सब करता हुआ
अलौकिक आभा से जिसकी
जगमगाने लगा 
सारा जहान  
थिरकने लगी अम्बर में
अरुण की रश्मियाँ
चमकी धूप सुनहरी सी
उतर आई उषा 
मेरे द्वार  
भोर ने दी दस्तक
स्फुरित हुआ मन
खिलखिलाने लगा 
मेरा आँगन 

रेखा जोशी 

दोस्ती --दुश्मनी

मुक्तक 01 
हमने ज़िन्दगी  में तुम्हे अपना  जाना 
चाहा   जी  जान  से और  बना दिवाना 
दोस्त बन तुमने क्यों निभाई  दुश्मनी
हमने  तो तुम्हे प्यार  से  अपना माना 
.... 
मुक्तक 02 
क्यों बैठे  रख कर दिल में कबसे दुश्मनी 
छोडो   यारो   आपस   की अबसे  दुश्मनी 
दो दिन की ज़िन्दगी में कर लो तुम  दोस्ती 
करते जाओ  प्यार   भूल सबसे  दुश्मनी 

रेखा जोशी

Monday, 8 August 2016

वर्ण पिरामिड

ये
कैसा
सावन
आया पिया
आये न तुम
तड़पे जियरा
बिन तेरे सजन
...
लो
अब  
थाम के
संग संग  
हाथ में हाथ
काट लेंगे हम
जीवन का सफर

रेखा जोशी

Saturday, 6 August 2016

ग़ज़ल

बहर:- बहर- ए- रमल मुसम्मिन मख़बून महज़ूफ़
अरकान:- फ़ाइलातुन फ़इलातुन फ़इलातुन फ़ेलुन
वज़्न- 2122- 1122- 1122- 22


.2122 - 1122 -1122 - 22 
आज आये प्रभु  तेरे हम  दर  पे  भगवन
नाथ उपकार करो अब  हम पर हे भगवन 
...
हाथ अपने हम सब जोड़ नवायें माथा
साथ देना तुम अब जीवन भर हे भगवन 
....
रात दिन सर प्रभु धरते चरणों में तेरे 
अब सफल जीवन मेरा प्रभु कर हे भगवन 
... 
आज आशीष मिला सब कुछ हमने पाया 
छुप गया दूर कहीं पर अब डर हे भगवन 
... 
आप का प्यार मिला आज मिली दुनिया सब 
आज आये  प्रभु  मेरे तुम  घर हे भगवन 

रेखा जोशी



साथ देना तुम अब जीवन भर हे भगवन

आज  आये प्रभु  तेरे अब   दर  हे भगवन
नाथ उपकार करो अब  हम पर हे भगवन 
हाथ  अपने  हम  सब  जोड़  नवायें माथा
साथ देना  तुम अब जीवन भर हे भगवन 
रेखा जोशी

Friday, 5 August 2016

महकी बगिया तेरे आने से साजन

है तोडा यह दिल मेरा प्रियतम तुमने
बैठे थे दिल में रख कर हर गम अपने
महकी  बगिया   तेरे  आने  से साजन
आये  जो  तुम  पूरे   होंगे   सब सपने

रेखा जोशी 

है दिल बहुत उनका काला

है   चेहरा   भोला     भाला
देख उनको  दिल  दे डाला
सूरत  उनकी भोली  मगर
है दिल बहुत उनका काला

रेखा जोशी 

Thursday, 4 August 2016

आजा पिया परदेसी मेरे जब जिया न जाए

कारे कारे बदरा
छाये  आज नभ पर
धड़के जिया मोरा
चमकी जब नभ में बिजुरी
आये याद सजना मोहे
जब हुई बरसात
भीगा मोरा तन मन सारा
भीगी  चुनरिया मोरी
भीगे  नैना राह निहारे
घर आजा साँवरिया
भीगे से इस मौसम में
याद तिहारी आये
कटे न पल पल अब हमसे
नैना भीग भीग जाए
पथरा गई अखियाँ
इंतज़ार में तेरी
नैना पथ निहारे
आजा पिया परदेसी मेरे
जब जिया न जाए

रेखा जोशी



Wednesday, 3 August 2016

सलामत रहे भाई बहन का प्यार

 है सबसे न्यारा
बहन भाई का प्यार
बँधा हुआ रिश्ता ये प्यारा
स्नेहिल धागों से
भाई की कलाई पर
है बांधती प्यार बहना
दिन रात माँगे  दुआ
सलामती
अपने भैया  की
वचन निभाता रक्षा का
भैया अपने बहना की
सलामत रहे
भाई बहन का प्यार
जब तक है सँसार

रेखा जोशी


विश्व विजेता बनेगा भारत हमारा

सबसे   ऊँचा    रहेगा    भारत  हमारा
विश्व   को   संवारेगा   भारत   हमारा
मिलकर चलेंगे जब हम सभी संग संग
विश्व   विजेता  बनेगा   भारत  हमारा

रेखा जोशी 

कर दो अवनी का आँचल हरा

श्वेत बादल
तुम नील नभ पर
आज तुम
क्यों खड़े हो अविचल
आओ रंग भर दूँ  गहरे
बना दूँ मै बदरा कारे कारे
दूर जोह  रहे बाट  तेरी
पुत्र  धरती के
तेरे दरस  को तरस रहे
है नैना उनके
अंर्तघट  तक  जहाँ
है प्यासी प्यासी धरा
उड़ जाओ संग पवन के
बरसा दो अपनी
अविरल जलधारा
तृप्त कर दो  धरा वहाँ
कर दो  अवनी  का
आँचल हरा
धरतीपुत्र को हर्षित कर
बिखेर दो खुशियाँ वहाँ

रेखा जोशी


भर चुका दुनिया में अब घड़ा पाप का

खत्म  कब  होगा  नारी पर अत्याचार
करो खत्म   यह अमानवीय  व्यवहार
भर चुका दुनिया में अब घड़ा पाप का
चुन चुन  मारो जो  रहे कर बलात्कार

रेखा जोशी