Tuesday, 28 November 2017

पिंजरे का पंछी

बचपन में माँ एक कहानी सुनाया करती थी कि एक राक्षस किसी देश की राजकुमारी को उठा कर ले गया था लेकिन कहानी का अंत बहुत सुखद होता था, कोई राजकुमार बहुत सी कठिनाइयाँ झेल कर राजकुमारी को राक्षस के चुंगल से बचा लिया करता था l

आज न जाने कितने महीने गुज़र गये मीना को अपने राजकुमार का इंतज़ार करते हुए, उफ़ कितनी भयानक रात थी जब वह रात को आफिस से घर लौट तब किसी राक्षस ने उसे पकड़ लिया था, कितना चीखी थी मीना लेकिन तब से वह उस ज़ालिम की केद में तड़प तड़प कर दिन गुज़ार रही थी, कब इस बंद पिंजरे से उसे आज़ादी मिलेगी, लेकिन आज़ादी उसके नसीब में नहीं थी, नही जानती थी कि उसके राजकुमार ने ही मीना को बेच दिया था उस राक्षस को l

रेखा जोशी