Tuesday, 21 November 2017

शादी जी हाँ शादी

शादी जी हाँ शादी
था सुना करते
यह तो है बरबादी
,
कहते थे बड़े बुजुर्ग
कर लो मौज अभी
पता चलेगा
आटे दाल का भाव
जब होगी शादी
मत पड़ना इस चक्कर में
यह तो है बरबादी
,
लेकिन नहीं माना मन
ललचा गया
बेताब हो उठा
खा ही लिया शादी का लड्डू
बंध गए विवाह के बंधन में
सोचा अब तो पड़ेगा पछताना
क्योकि
यह तो है बरबादी
,
नहीं सोचा था कभी
खूबसूरत प्यारे इस बँधन से
मिलेंगी खुशियाँ हज़ार  हमेँ
बदल देगा दुनिया हमारी
मिला जीवन साथी इक प्यारा
बना वह सुख दुख का सहारा
वह तो निकला
जन्‍म जन्‍म का साथी
कर दी सुबह और शाम
हमने उसके नाम
नहीं समझे जो
प्यारे इस बँधन को
वोही है कहते
यह तो है बरबादी

रेखा जोशी