Monday, 11 March 2013

गरल गरल सुधा सुधा


छिड़ी थी जंग
सुर औ असुर में
 अमृत पाना
.....................
मोहिनी रूप
सागर का मंथन
किया था छल
......................
मस्त असुर
देवों के अधर पे
रख दी सुधा
..................
 गरल आया
 नीलकंठ शंकर
  विश्व बचा
.................
गरल सुधा
मिलते जीवन में
 है यही पाया
 ..................
स्वाती अमृत
 मिल कर जो पियें
ये सुधा सुधा
  ....................
 धरो कंठ में
 ये गरल गरल
 सब के लिए

                     

6 comments:

  1. बहुत ही सुन्दर हाइकू.

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    1. प्रेरणादायक कमेन्ट पर हार्दिक धन्यवाद ,आभार

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  2. बहुत सुंदर हाइकू----
    विषयपरक-----बधाई







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    1. हार्दिक धन्यवाद ज्योति जी ,आभार

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  3. भावनाओ से ओत -पोत बहुत उम्दा प्रस्तुति आभार

    आज की मेरी नई रचना आपके विचारो के इंतजार में
    अर्ज सुनिये

    आप मेरे भी ब्लॉग का अनुसरण करे

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    1. दिनेश जी आपका हार्दिक आभार

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