Tuesday, 19 March 2013

इक कसक


बीत गए थे
प्यार भरे वो दिन
बेताब दिल
...................
सिंधूरी रात
हसीन सपनों की
इक कसक
.................
घड़ी दो घड़ी
साथ तुम्हारा चाहा
हूँ बेकरार
...............
तलाश रहा
वो चाहत अपनी
राहें पुरानी
................
इस दिल में
बसेरा तुम्हारा है
तुम ही तुम





14 comments:

  1. वाह...!
    बहुत सार्थक प्रस्तुति!
    आभार!

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    1. प्रोत्साहन हेतु आपका हार्दिक आभार शास्त्री जी

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  2. प्रेम की गहन अनुभूति
    वाह बहुत सुंदर रचना
    बधाई

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    1. प्रोत्साहन हेतु आपका हार्दिक आभार,ज्योति जी

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  3. बधाई हो आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति आज के ब्लॉग बुलेटिन पर प्रकशित की गई है | सूचनार्थ धन्यवाद |

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    1. प्रोत्साहन हेतु आपका हार्दिक आभार ,तुषार जी

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  4. बहुत सुन्दर हाइकू!

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    1. प्रोत्साहन हेतु आपका हार्दिक आभार

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  5. Replies
    1. प्रोत्साहन हेतु आपका आभार

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  6. कसक भरे हाइकू ..
    लाजवाब हैं सभी ...

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    1. आपका हार्दिक आभार

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  7. बहुत ही लाजबाब हाइकू,आभार.

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    1. प्रोत्साहन हेतु आपका आभार

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