Thursday, 16 June 2022

गाय

देती  अमृत  सा  दूध  हमें  ऐसी  गौ  माता है
दूध दही और घी मक्खन हम सबको भाता है
धन्य  धरती भारत  की पूजी  गाय जाती जहाँ
सेवा  करे  जो  इसकी  भवसागर तर जाता है

रेखा जोशी






  

ओम की गुंजन

ओम की गुंजन

ओम के जाप से हो जाता शान्त मन
गूंज से इसकी  हो जाता कंपित तन

वेदों में  बतलाया ओम का स्वरूप
महिमा ओम की है सदा सत्य सनातन

ओ उ  म में है समाया  सारा ब्रह्माण्ड
गूंगा भी करता है ओम का उच्चारण

जप कर ओम ओम कल्याण होगा सबका
ओम  ही   साकार   रूप   ओम ही  निर्गुण

ओम  नाम  से कट  जाते  सभी के पाप 
है कण कण में  समाई ओम की गुंजन

रेखा जोशी

Thursday, 2 June 2022


शीर्षक  "शर्माता है चाँद"(नवगीत)


रात में चमकता चाँद

चांदनी बिखेरता सागर के आंचल पर 

झिलमिलाता है चाँद

,,

आ गए हम कहाँ

परियों के देश में

धवल चाँदनी यहाँ

राह पर बिखराता है चाँद

..

दीप्त चाँदनी सा दमकता

सुन्दर चेहरा तेरा 

ज्यों गगन पर

जगमगाता है चाँद
..

आये महफ़िल में तेरी सजन

संग संग टिमटिमाते तारे लिए

उतर आया धरती पर

अब मुस्कुराता है चाँद

,,

सुंदर चेहरा

छिपा लिया बंद पलकों में हमने

देख  हमें

यहाँ शर्माता है चाँद

रेखा जोशी

Tuesday, 31 May 2022

मेरी कुछ अधूरी ख्वाहिशें

उड़ रही,रंग बिरंगी तितलिया

मेरी ख़्वाहिशों की बगिया में

झूला रही मदमस्त पवन

फूलों से लदी डालियाँ

महकने लगी 

मेरी  कुछ अधूरी ख्वाहिशें

,,

ठिठकती कभी पेड़ों की झुरमुट पे

पूरा होने पर

थिरकती कभी  नाचती अँगना में 

ख्वाहिशें मेरी ख्वाहिशें

चूमती श्रृंखलाएं कभी पर्वत की

लौट आती कहीं पर  छोड़ गूंज अपनी

मेरी कुछ अधूरी ख्वाहिशें

,

बादलों सी गरजती कभी

बरसती बरखा सी कभी

भिगो जाती तन मन मेरा

बिखर जाती धरा पर कभी

नित नई ख्वाहिशें

बुनती रहती ताना बाना

रंग भरती, रस बरसाती

जीवन में मेरे

मेरी कुछ अधूरी ख्वाहिशें

रेखा जोशी

Monday, 2 May 2022

हाइकू

हाइकु

जय गणेशा

हे सिद्धि विनायक

विघ्न  हरता
,
हे गजानन

हमें दो रिद्धि सिद्धि

अभिनंदन
,
गौरी नंदन

हे गणपति देवा

तुम्हे नमन
,
एक दंत हो

मनभावे मोदक

पूजें तुमको


रेखा जोशी

Thursday, 14 April 2022

क्षणिकाएं

क्षणिकाएं

मौत का 
सामान लिए हम
खेलते रहे
जी भर ज़िन्दगी से
उफ न की कभी
यूँही मुस्कुराते रहे
,
उम्र भर
प्यार किया
आग के शोलों से
चिंगारियों से
जलते रहे
कसम खुदा की
प्यार निभाया हमने

रेखा जोशी

Saturday, 2 April 2022

सभी मित्रों को ''नवरात्रि ,नव संवत नव वर्ष "की हार्दिक शुभकामनाएँ 

जय माता दी

एक नाम ,एक ओमकार ,एक ही ईश्वर और हम सब उस परमपिता की संतान है जिसने हमे इस दुनिया में मनुष्य चोला दे कर भेजा है और धर्म एक जीवन शैली का नाम है ,धर्म के पथ पर जीवन यापन कर हम उस परमपिता परमात्मा को पा सकते है |''|रिलिजियन धर्म  का पर्यायवाची हो ही नही सकता ,जहाँ रिलिजियन में विभिन्न विभिन्न सुमदाय के लोग अपने ही ढंग से ईश्वर की पूजा आराधना करते है ,वहां धर्म जिंदगी जीने के लिए मानव का सही  मार्ग दर्शन कर इस अनमोल जीवन को सार्थक बना देता है |हमारे वेदों में  भी लिखा है ,''मानवता ही परम धर्म है '',और हम सब ईश्वर के बच्चे क्या एक दूसरे के साथ प्रेम से नही रह सकते ?क्यों हम विभिन्न सुमदायों में बंट कर रह गये है ?सोचने का विषय है |

जय माता दी

रेखा जोशी