Tuesday, 31 May 2016

नम आँखों से हम उन को देखते है


नम आँखों से हम उन को देखते है 
जहाँ वह गये  उस पथ को देखते है 
आखिर वह आये  जीवन  में हमारे 
कभी उनको कभी खुद को देखते है 

रेखा जोशी 

नामुमकिन को मुमकिन अब कर दिया हमने



शीश  अपना  
प्रभु  तुम्हारे चरणो में
हमने अब  रख  दिया 
प्रेम का  प्याला  
लब पर अपने 
अब धर  दिया
पा  ली भक्ति असीम    
तुम्हारी अनुपम  कृपा से 
नहीं चाहिये कुछ और अब 
जीवन में  हमें 
मिल गया सब कुछ हमे 
पाया जो प्यार  तुम्हारा 
नामुमकिन को मुमकिन
अब कर दिया हमने

रेखा जोशी 

Monday, 30 May 2016

इक कहानी मगर अनकही रह गई

बात दिल की हमारे  धरी रह गई 
इक कहानी मगर  अनकही रह गई 
… 
दिल मचलता हुआ कब कहाँ खो गया 
प्यास दिल की अधूरी अभी  रह गई 
… 
यूँ  चले क्यों गये छोड़ कर तुम हमे 
मै सफर में  अकेली खड़ी   रह गई 
 … 
अब न जाना  हमें तड़पा' कर तुम कभी 
ज़िंदगी में अधूरी   ख़ुशी रह गई 
… 
वार दी अब सजन प्यार पर ज़िंदगी 
प्यार बिन कुछ नही ज़िंदगी रह गई 

रेखा जोशी 

सफलता और शुभकामनाएं [पूर्व प्रकाशित रचना ]

सफलता और असफलता ज़िंदगी के दो पहलू है ,लेकिन सफलता की राह में कई बार असफलता से रू ब रू भी होना पड़ता है ,बल्कि असफलता वह सीढ़ी है जो सफलता पर जा कर खत्म होती है ,प्रसिद्ध कवि श्री हरिवंशराय बच्चन जी की जोशीली पंक्तिया किसी में में जोश और उत्साह भर सकती है |
असफलता एक चुनौती है, इसे स्वीकार करो,
क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो।
जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम,
संघर्ष का मैदान छोड़ कर मत भागो तुम।
कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
जी हाँ कोशिश करते रहना चाहिए लेकिन यह इतना आसान भी नहीं है उसके लिए उस व्यक्ति को एक बार फिर से अपनी सारी ऊर्जा एकत्रित कर अपने आप को एक बार फिर से संघर्ष के लिए तैयार करना पड़ता है | ऐसा देखा गया है जब एक बार इंसान भीतर से टूट जाता है तो उसे अपने को उसी संघर्ष के लिए फिर से तैयार करना बहुत कठिन हो जाता है | हम सब जानते है कि किसी भी व्यक्ति की सफलता के पीछे रहती है उसकी अनथक लग्न ,भरपूर आत्मविश्वास और सफलता पाने का दृढ संकल्प ,चाहे कार्य कुछ भी हो छोटा याँ बड़ा ,सफलता की चाह ही उसे उस मुकाम तक पहुंचाती है जहाँ वह पहुंचना चाहता है ,लेकिन कई बार उस मुकाम तक पहुंचने के लिए उसे कई परेशानियों और अड़चनों का सामना करना पड़ता है जिससे प्राय: उसका आत्मविश्वास डगमगा जाता है और वह अपनी मज़िल तक नहीं पहुंच पाता बल्कि वह निराशा और अवसाद की स्थिति में पहुंच जाता है | ऐसी स्थिति में आवश्यकता होती है उसके मनोबल और आत्मविश्वास को मज़बूत करने और जोश भरने की |
सदियों से हमारे देश की यह परम्परा रही है ,जब भी कोई राजा युद्ध के लिए जाता था उसकी रानी उसके माथे पर तिलक लगा कर ईश्वर से उसके लिए विजय हासिल करने की प्रार्थना किया करती थी .उसी परम्परा के चलते , जब अक्सर जब हम कोई परीक्षा देने जाते है तो हमारी माँ याँ दादी हमे दही खिला कर परीक्षा देने भेजती है , या हम अपने घर से किसी यात्रा के लिए निकलते है तो चाहे चीनी के दो दाने ही हो हमारी माँ ,दादी कुछ मीठा खिला कर ही हमे घर से विदा करती है ,तो प्रश्न यह उठता है की क्या मात्र दही खाने से हम परीक्षा में उत्तीर्ण हो सकते है ,याँ फिर चीनी के दो दाने खाने से हमारी यात्रा सफल हो जाती है ? मगर इस परम्परा के पीछे छुपी हुई है हमारे प्रियजनों के मन में हमारी सफलता के लिए शुभकामनायें .उस परमपिता से हमारी इच्छा पूर्ति की प्रार्थना ,जो हमे बल दे कर हमारे मनोबल को ऊँचा कर हमारे भीतर आत्मविश्वास पैदा करती है और इसी आत्मविश्वास के चलते हम ज़िंदगी में सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ पाते है
हमारी संस्कृति ने हमे सदा अपने माता पिता और बड़े बुज़ुर्गों का आदर करना सिखाया है ,उनके आशीर्वाद से हम ज़िंदगी में बड़ी से बड़ी चुनौतियों का सामना आसानी से कर पाते है ,तो क्यों न अपनी संस्कृति की इस धरोहर का मान रखे हुए अपने बच्चों को भी इसका महत्व सिखायें और अपने बड़े बुज़ुर्गों की शुभकामनाएं और आशीर्वाद लेते हुए ज़िंदगी में सफलता की सीढियाँ चढ़ते जायें |

रेखा जोशी 

Sunday, 29 May 2016

नारी शोषण

नारी सशक्तिकरण पर बहुत कुछ लिखा जा चुका है और बहुत कुछ लिखा जा रहा है ,लेकिन नारी की स्थिति को लेकर आज भी कई सवाल है जिनका उत्तर समाज से अपेक्षित है ,इसमें कोई दो राय नही है कि आज की नारी घर की दहलीज से बाहर निकल कर शिक्षित हो रही है ,उच्च शिक्षा प्राप्त कर पुरुष के साथ कन्धे से कन्धा मिला कर सफलता की सीढियां चढ़ती जा रही है l आर्थिक रूप से अब वह पुरुष पर निर्भर नही है बल्कि उसकी सहयोगी बन अपनी गृहस्थी की गाड़ी को सुचारू रूप से चला रही है l बेटा और बेटी में भेद न करते हुए अपने परिवार को न्योजित करना सीख रही है ,लेकिन अभी भी वह समाज में अपने अस्तित्व और अस्मिता के लिए संघर्षरत है ,कई बार न चाहते हुए भी उसे जिंदगी के साथ समझौता करना पड़ता है| 
आज नारी की सुरक्षा को लेकर हर कोई चिंतित है  ,बलात्कार हो या यौन शोषण इससे पीड़ित न जाने कितनी युवतियां आये दिन आत्महत्या कर लेती है और मालूम नही कितनी महिलायें अपने तन ,मन और आत्मा की पीड़ा को अपने अंदर समेटे सारी जिंदगी अपमानित सी घुट घुट कर काट लेती है क्या सिर्फ इसलिए कि ईश्वर ने उसे पुरुष से कम शारीरिक बल प्रदान किया है |यह तो जंगल राज हो गया जिसकी लाठी उसकी भैंस ,जो अधिक बलशाली है वह निर्बल को तंग कर सकता है यातनाएं दे सकता है ,धिक्कार है ऐसी मानसिकता लिए हुए पुरुषों पर ,धिक्कार है ऐसे समाज पर जहां मनुष्य नही जंगली जानवर रहतें है |जब भी कोई बच्चा चाहे लड़की हो या लड़का इस धरती पर जन्म लेता है तब उनकी माँ को उन्हें जन्म देते समय एक सी पीड़ा होती है ,लेकिन ईश्वर ने जहां औरत को माँ बनने का अधिकार दिया है वहीं पुरुष को शारीरिक बल प्रदान किया ।
महिला और पुरुष दोनों ही इस समाज के समान रूप से जरूरी अंग हैं लेकिन हमारे धर्म में तो नारी का स्थान सर्वोतम रखा गया है , नवरात्रे हो या दुर्गा पूजा ,नारी सशक्तिकरण तो हमारे धर्म का आधार है । अर्द्धनारीश्वर की पूजा का अर्थ यही दर्शाता है कि ईश्वर भी नारी के बिना आधा है ,अधूरा है। । इस पुरुष प्रधान समाज में भी आज की नारी अपनी एक अलग पहचान बनाने में संघर्षरत है । जहाँ बेबस ,बेचारी अबला नारी आज सबला बन हर क्षेत्र में पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिला कर चल रही है वहीं अपने ही परिवार में उसे आज भी यथा योग्य स्थान नहीं मिल पाया ,कभी माँ बन कभी बेटी तो कभी पत्नी या बहन हर रिश्ते को बखूबी निभाते हुए भी वह आज भी वही बेबस बेचारी अबला नारी ही है । शिव और शक्ति के स्वरूप पति पत्नी सृष्टि का सृजन करते है फिर नारी को क्यों मजबूर और असहाय समझा जाता है ।
अब समय आ गया है सदियों से चली आ रही मानसिकता को बदलने का और सही मायने में नारी को शोषण से मुक्त कर उसे पूरा सम्मान और समानता का अधिकार दिलाने का ,ऐसा कौन सा क्षेत्र है जहां नारी पुरुष से पीछे रही हो एक अच्छी गृहिणी का कर्तव्य निभाते हुए वह पुरुष के समान आज दुनिया के हर क्षेत्र में ऊँचाइयों को छू रही है ,क्या वह पुरुष के समान सम्मान की हकदार नही है ?तब क्यूँ उसे समाज में दूसरा दर्जा दिया जाता है ?केवल इसलिए कि पुरुष अपने शरीरिक बल के कारण बलशाली हो गया और नारी निर्बल।
हमे तो गर्व होना चाहिए कि इस देश की धरती पर लक्ष्मीबाई जैसी कई वीरांगनाओं ने जन्म लिया है ,वक्त आने पर जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति भी दी है और जीजाबाई जैसी कई माताएं भी हुई है जिन्होंने कई जाबाजों को जन्म दे कर देश पर मर मिटने की शिक्षा भी दी है ,नारी की सुरक्षा और सम्मान ही एक स्वस्थ समाज और मजबूत राष्ट्र का निर्माण कर सकती है ,जब भी कोई बच्चा जन्म लेता है तो वह माँ ही है जो उसका प्रथम गुरु बनती है ,अगर इस समाज में नारी असुरक्षित होगी तो हमारी आने वाली पीढियां भी सदा असुरक्षा के घेरे में ही रहेंगी और राष्ट्र का तो फिर भगवान् ही मालिक होगा |
रेखा जोशी 

आओ जी लें ज़िंदगी प्यार से

मिल कर रहें यहाँ सभी प्यार से
ख़ुशी  से   करें   बंदगी  प्यार से
गुणा  भाग  नहीं  जीवन  हमारा
आओ  जी  लें  ज़िंदगी  प्यार से

रेखा जोशी






Friday, 27 May 2016

ओढ़ कर लाज का आँचल मुस्कुराया वह शर्मीला चाँद

बन प्रियतम  धरा पर उतर आया वह शर्मीला चाँद 
ओढ़ कर लाज का  आँचल मुस्कुराया वह शर्मीला चाँद 
खेल रहा चन्दा आँख मिचोली चाँदनी लिये संग मेरे 
बादलों के झरोखों से खिलखिलाया वह शर्मीला चाँद 

 रेखा जोशी