Friday, 7 October 2016

मांग रहे जो सबूत होता देख कर अचम्भा

अपनों  से  दूर वह  मरते  देश की आन पर
वीर  सिपाही जो मर मिटे देश की शान पर
मांग रहे जो  सबूत होता देख कर अचम्भा
सेक  रहे वह  रोटियाँ  शहीदों  की जान पर

रेखा जोशी



खिला आज मौसम रँगी है बहारे

खिला आज मौसम रँगी है बहारे 
बुलायें हमें आज दिलकश नज़ारे 
चलो हाथ में हाथ लेकर चलें हम 
कहीं दूर अब प्यार साजन पुकारे 

रेखा जोशी 


Thursday, 6 October 2016

दुख हम सब के मैया हरती, जय जय हे जगदम्बे

सार छंद पर आधारित ''गीतिका ''

इस दुनिया की मैया तुम ही,  जय जय हे जगदम्बे
करते हम सब भक्ति तेरी, जय जय हे जगदम्बे
....
है  यश गाते माता तेरा  ,तारे  गौरी  मैया
पूजा  हम सब करते जननी , जय जय  हे जगदम्बे
....
अर्पित करती फूलों को मै ,वारु तन मन अपना
दुख हम सब के मैया हरती,  जय जय  हे जगदम्बे
....
खुशियाँ जीवन में लाती तुम ,  तुम हो जीवन दाती
झोली  सबकी मैया भरती , जय जय  हे जगदम्बे
.....
जयकारा ज्योता वाली माँ ,आये तेरे दर पर
ऊँचे  पर्वत  पर तुम  रहती ,जय जय  हे जगदम्बे

रेखा जोशी

मिल जाये जो यहाँ मनचाहा प्यार ज़िन्दगी में

किसी को यहाँ  ज़िन्दगी की इनायत नही मिलती 
दिल  में  ना  हो ज़ुर्रत तो  मोहब्बत  नहीं मिलती 
मिल  जाये  जो यहाँ  मनचाहा  प्यार ज़िन्दगी में 
हर किसी को  जहाँ  में ऐसी किस्मत नहीं मिलती 

रेखा जोशी 

Wednesday, 5 October 2016

जग की हो शक्ति हो तुम माँ जगदम्बे


जग की हो शक्ति हो तुम माँ जगदम्बे 
वर दो शक्ति का दो तुम माँ जगदम्बे
नाम तेरा ले ध्याय हम सब यहाँ
मेरी परम भक्ति हो तुम माँ अम्बे


रेखा जोशी 

भीगा आँचल भरती सिसकियाँ

चेहरा कहता  दिल की बतियाँ 
नोचते  कौवे   रोती  अखियाँ 
चेहरा  वही  और  तड़प वही 
भीगा आँचल भरती सिसकियाँ 

रेखा जोशी 

Saturday, 1 October 2016

बहरे- मुतदारिक मुसम्मन सालिम
अर्कान= फ़ाइलुन, फ़ाइलुन, फ़ाइलुन, फ़ाइलुन
तक़्तीअ= 212, 212, 212, 212 पर...
हाल दिल का सजन अब कहें  कम से कम
बात  दिल  की  न दिल में रहे कम से कम 
.....
चाँद आया उतर अब गगन में पिया
चांदनी रात में हम मिलें  कम से कम
....
साथ तेरा मिला ज़िन्दगी मिल गई
ज़िन्दगी ने मिलाया हमें कम से कम
....
यह नज़ारें सजन अब  पुकारे हमें
चाँद तारे सजे आ  चलें कम से कम
....
अब  बुलाते हमें  फूल बगिया सजन
लूट ले ज़िन्दगी के मज़े कम से कम
....
यह हसीं वादियाँ है  बुलाती   हमें
आज आओ सनम हम मिले कम से कम

रेखा जोशी