Tuesday, 16 August 2016

आधार छंद - वाचिक स्रग्विणी

आधार छंद - वाचिक स्रग्विणी 

वाचिक मापनी - 212 212 212 212 

हर घड़ी ज़िंदगी की चहकने लगी
ज़िंदगी अब हमारी  सँवरने  लगी
खूबसूरत  सजी  ज़िन्दगी है  यहाँ 
आप आओ सजन बन्दगी है  यहाँ

रेखा जोशी