Saturday, 4 July 2015

यादों में हमने अपनी तुमको बसा लिया है


यादों  में  हमने  अपनी  तुमको बसा लिया है
दुनिया से हमने तुमको दिल में छुपा लिया है
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रातो में आ आ कर अब हमको न तुम जगाना
सपनो में अपने हमने अब घर बना लिया है
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चमका  है  सूरज  भी तेरे चेहरे की दमक से
चन्दा  ने  भी  तेरी आभा को चुरा लिया है
…
शबनम रोई रातों  में यूँ तो उमर यहाँ पे
गुलशन ने भी खुशबू को दिल में बसा लिया है
…
आओ महका दो आँगन अब तुम सजन यहाँ पे
जीवन  में खुशियों को जोशी ने  सजा लिया है

रेखा जोशी 

Friday, 3 July 2015

गज़ब मुहब्बत निभा रहे तुम

नज़र मिला कर झुका रहे तुम 
झुकी निगाहें उठा रहे तुम 
अभी अभी तो सनम मिले हो  
गज़ब मुहब्बत निभा रहे तुम 

रेखा जोशी 

पुकार सुन अब दिल की यहाँ सजन आजा


चली पवन जब शीतल वहाँ  सजन आजा 
मिला न प्यार हमें तुम कहाँ सजन आजा 
कहाँ  कहाँ  हम ढूँढे सजन  इधर  तुम को 
पुकार सुन अब दिल की यहाँ सजन आजा 

रेखा जोशी 

भूख के लिये भटकाती है रोटियाँ


भूख के लिये  भटकाती है रोटियाँ
मंज़र  कैसे  दिखलाती  है रोटियाँ
पेट की आग में यहाँ जल रहे  कई
जाने क्या क्या करवाती है रोटियाँ

रेखा जोशी 

Thursday, 2 July 2015

रुकता नही वक्त कभी

रुकता नही वक्त कभी
चलती है ज़िंदगी संग इसके
तुम अकेले क्यों खड़े
रुके क्यों हो तुम
रुकता नही सूरज
और न ही रुकते
चाँद सितारे
फिर तुम किसका
कर रहे इंतज़ार
रुकना है मृत्यु
उठो चलो समझो तुम
अपने होने का अस्तित्व
बह जाओ संग धारा के
तुम में है वो फन
खिला सकते हो तुम
फूल ही फूल राहों में
महका सकते हो तुम
वन उपवन

रेखा जोशी

Wednesday, 1 July 2015

है खाये इतने ज़ख्म इस दिल ने हमारे

चाहो अगर ख़ुशी के पल तभी  नहीं आते
बीते  हुये  लम्हे  फिर  से कभी नही आते
है  खाये  इतने  ज़ख्म  इस दिल ने हमारे
नैनों    से    हमारे   आँसू   भी  नही आते

रेखा जोशी 

कैसी यह व्यापार ज़िन्दगी


कैसा यह उपहार ज़िंदगी ?
किसका यह प्रतिकार ज़िन्दगी
...
तिल-तिल गलती रही जन्म से,
जन्मजात बीमार ज़िन्दगी 
....
दिल से देखो इस जीवन को 
रिश्ते  है आधार   ज़िन्दगी
…
कैसे बीते दिन रोते अब
आँसू की बौछार ज़िन्दगी
....
लेना देना है यह जीवन
कैसी यह व्यापार ज़िन्दगी
....
देखा जी भर दुनिया को अब
चलते हम  उसपार ज़िन्दगी
....
जीना सीखा हमने साजन
है तेरा आभार ज़िन्दगी

रेखा जोशी