Wednesday, 1 July 2015

कैसी यह व्यापार ज़िन्दगी


कैसा यह उपहार ज़िंदगी ?
किसका यह प्रतिकार ज़िन्दगी
...
तिल-तिल गलती रही जन्म से,
जन्मजात बीमार ज़िन्दगी 
....
दिल से देखो इस जीवन को 
रिश्ते  है आधार   ज़िन्दगी

कैसे बीते दिन रोते अब
आँसू की बौछार ज़िन्दगी
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लेना देना है यह जीवन
कैसी यह व्यापार ज़िन्दगी
....
देखा जी भर दुनिया को अब
चलते हम  उसपार ज़िन्दगी
....
जीना सीखा हमने साजन
है तेरा आभार ज़िन्दगी

रेखा जोशी