यूँ ही आता है ख्याल कभी कभी
उर में उठे ये सवाल कभी कभी
गर तुम न होते कैसे जीते हम
कौन पूछता फिर हाल कभी कभी
रेखा जोशी
Friday, 3 August 2018
यूँ ही आता है ख्याल कभी कभी
Saturday, 28 July 2018
हर घड़ी खुशियाँ मनाना सीख लो
प्यार के नाम चलो आज इक जाम हो जाये
देखते रहें तुम्हें सुबह से शाम हो जाये
उम्र भर चलें सदा हम थामें हाथों में हाथ
ख़ुदा करे ज़िंदगी यूंही तमाम हो जाये
...
ज़िन्दगी में मुस्कुराना सीख लो
गीत अब तुम गुनगुनाना सीख लो
दर्द से यह जिन्दगी माना भरी
हर घड़ी खुशियाँ मनाना सीख लो
रेखा जोशी
Wednesday, 25 July 2018
छलकते रहे नयन बहते रहे आँसू
छलकते रहे नयन
बहते रहे आँसू
खाते रहे कसमे हम
ज़िन्दगी भर
देते रहे दुहाई हम
अपनी वफ़ा की
लेकिन
गहराती शक की
खाईयों में
मिट गई उल्फत मेरी
देख उनको
कभी
थी बजा करती दिल मे
शहनाईयां
पर मिली ज़िन्दगी में हमे
रुसवाईयाँ
लेकिन गहराती रही
शक की खाईयां
वक्त चलता रहा
फासले बढ़ते रहे
दूर दिल होते रहे
पास रहते हुये भी उनसे
जुदा हो गये
हम आजकल
रेखा जोशी
प्रेम ही है मधुबन
अजब पहेली
है यह जिंदगी हमारी
जितना भी इसे सुलझाए
उतनी ही उलझती जाये
टेढ़ी मे मेढ़ी राहें इसकी
हर मोड़ पर इसके
जिया घबराये
न जाने
क्या लिखा है आगे
तकदीर में हमारी
कर भरोसा खुद पर अपने
राह पकड़ लो प्रेम की
जला कर दीपक नेह का
फैला उजियारा पथ पर
प्रेम ही है जीवन
प्रेम ही है मधुबन
प्रेम गीत
प्रेम ही है संगीत
डूब कर प्रेम सागर में
लहर लहर कर प्रेममय
रेखा जोशी
Friday, 20 July 2018
शत शत नमन नीरज जी को
हस्ती थी वह दुनिया में इक जानी मानी
गीतों में बहती सदा प्रेम की रवानी
सो गये चिरनिन्द्रा में चले गये वह दूर
लिख गये नीरज जी जीवन की कहानी
रेखा जोशी
Thursday, 19 July 2018
बाढ़
ऊफ यह बाढ़
रह जाती है अखबार की
इक खबर बन कर
या दिखते टेलीविजन पर
डूबे हुए घर
चहुं ओर जलथल
है पढ़ते देखते हम
बाढ़ से पीड़ित लोगों की
बेबसी लाचारी
फिर फेंक अखबार को एक ओर
टेलीविजन बंद कर
है भूल जाते उनकी व्यथा
नहीं महसूस कर पाते हम
उनकी भूख उनकी पीड़ा
डूबे हुए घरों में तैरती गंदगी
कितने असंवेदनशील
हो जाते हैं हम
बस छोड देते उनको
हाल पर उनके
इक आम खबर की तरह
रेखा जोशी
बुत हूँ मैं
सिर पर बैठे
चील, चिड़िया या कबूतर
क्या अंतर पड़ता है मुझे
मै तो बुत हूँ इक
नहीं उड़ा सकता किसी को भी
टुकर टुकर रहता हूँ देखता
सोचता हूँ आखिर
क्यों निर्माण किया मेरा
नाचते कूदते कभी वह सिर पर मेरे
झेलता हूँ कभी गंदगी भी उनकी
और मै बस
टुकर टुकर रहता हूँ देखता
आंधी के थपेड़े खाता
बारिश में भीग जाता
सर्दी हो या गर्मी
चाहे तपती हवाएं चलें
मुझे तो है यहीं खड़े रहना
और मैं सब
टुकर टुकर रहता हूँ देखता
रेखा जोशी