कह मुकरियाँ
मत लो और मेरी परीक्षा
कर रही हूँ तेरी प्रतीक्षा
रहता सदा तेरा ही ध्यान
का सखि साजन, न सखि भगवान
..
राह निहारूं मैं बार बार
आने से है आये बहार
खिले मनवा भरी दोपहरी
का सखि साजन, ना सखि महरी
रेखा जोशी
कह मुकरियाँ
मत लो और मेरी परीक्षा
कर रही हूँ तेरी प्रतीक्षा
रहता सदा तेरा ही ध्यान
का सखि साजन, न सखि भगवान
..
राह निहारूं मैं बार बार
आने से है आये बहार
खिले मनवा भरी दोपहरी
का सखि साजन, ना सखि महरी
रेखा जोशी
जगदंबिका जगत जननी
समझ सकती हूँ पीड़ा तेरी
इक दूजे के खून के प्यासे
दो भाईयोँ को देख
दर्द से तिलमिला उठी कोख मेरी
.
ममतामयी माँ हो तुम
रचना जो की जग की
महसूस कर सकती हूँ मै
तड़प तुम्हारे मन की
क्या गुज़रती होगी सीने में तुम्हारे
रक्त से सनी लाल धरा देख कर
बमों के धमाको से जब गूँजता आसमान
दम तोड़ती जब तेरी सन्तान
.
हे माँ अब सुन पुकार
आज अपने गर्भ की दिखा दे ममता
आँसू पोंछ उनके खून बन जो टपक रहे
सुख की साँस ले सकें सब
फिर नीले अम्बर तले
घृणा आपस की मिटा कर
दिखा शक्ति अपने प्रेम की
रेखा जोशी
वास्तु शास्त्र के हिसाब से बेड के सिरहाने की दिशा दक्षिण होनी चाहिए, हमें मालूम है कि हमारी धरती में चुम्बकीय शक्ति है, चुंबकीय नॉर्थ पोल भौगोलिक साउथ पोल को तरफ होता है और चुंबकीय साउथ पोल भौगोलिक नॉर्थ पोल की तरफ होता है l चुंबकीय बल की रेखाएँ सदा नॉर्थ पोल से साउथ पोल की होती है, इसलिए अगर हमारा सर भौगोलिक साउथ की ओर होगा तो चुम्बकीय रेखाएँ हमारे सर से पांव की ओर गुज़रे गी, यानि कि चुम्बकीय रेखाओं की दिशा हमारे खून से बहाव के साथ होगी जबकि अगर हमारा सर उत्तर दिशा में होगा तो चुम्बकीय रेखाएँ हमारे खून के बहाव से उल्टी दिशा में प्रवाहित होगी, जिससे हम खून से संबंधित बीमारियों से ग्रस्त हो सकते हैं l
इसलिए सिरहाने की दिशा सदा दक्षिण की ओर होनी चाहिए l
रेखा जोशी
मुझे तुम से है कुछ कहना
बिन तेरे नहीं अब रहना
…
अकेले हैं जीवन में हम
ग़म जुदाई का नहीं सहना
..
चलेंगे हम अब साथ साथ
संग तेरे ही है रहना
…
जीवन है चलने का नाम
ज्यों नदिया में नीर बहना
..
तुमसे है सिंगार जीवन
तुम हो सजन मेरा गहना
रेखा जोशी
हे
शिव
शंकर
महादेव
देवों के देव
सुन लो पुकार
शम्भू पालनहार
....
हे
राम
दयालु
भगवन
शीश झुकाएं
करते प्रणाम
प्रभु कृपानिधान
रेखा जोशी
करीब बीस वर्ष पहले की बात है जब मैं अपने कार्यकाल के दौरान महाविद्यालय की छात्राओं का एक ट्रिप लेकर शिमला गई थी, मेरे साथ तीन और प्राध्यापिकायें भी थी, हम ल़डकियों के सथ कालका से शिमला टोय ट्रेन से जा रहे थे, गाड़ी खचाखच भरी हुई थी हमारी सीट के सामने एक युवा दंपति आ कर खड़ा हो गया, युवती की गोद में एक गोल मटोल सुन्दर सा बच्चा था जिसे चलती गाड़ी में बच्चे के साथ खड़े रहने में उस युवती को बहुत असुविधा हो रही थी चूंकि मैं सीट पर बैठी हुई थी मैंने उस युवती से कहा जब तक आपको सीट नहीं मिलती आप बच्चे को मुझे पकडा दें, तो उसने अपने बच्चे को मुझे पकडा दिया और उस बच्चे के साथ छात्राएँ खेलने लगी, वह दंपति भी हम सबके साथ घुलमिल गया, बातों ही बातों में उनका स्टेशन आ गया और वह दोनों झटपट गाड़ी से उतर गए और हमें बाय बाय करने लगे, गाड़ी वहाँ बहुत ही कम समय के लिए रुकती है मैंने जोर से चिल्ला कर कहा, "अरे अपना बच्चा तो लेते जाओ" किसी तरह जल्दी जल्दी बच्चे को उन्हें सौंपा की गाड़ी चल पडी, गाड़ी में बैठे सभी लोग हँस रहे थे और उनके साथ हम सब भी हँसने लगे l
रेखा जोशी
इस मोड़ से जाते हैं
अभिनंदन कर रहा सामने
रंगीला इंद्रधनुष
अभिवादन कर रहे हैं
नीले अम्बर पर सफेद बादल
बरस चुकी बरखा रानी
धुल गया है मैल सारा
चहचहाने लगी बुलबुल मन की
..
इस मोड़ से जाते हैं
झुक गया जहां सतरंगी आसमाँ
अंगना मेरे
लहराने लगा आंचल मेरा
शीतल हवा के झोंकों से
चली प्रीत की ऐसी लहर
डूब गया जहां तन मन मेरा
आते ही इस मोड़ पर
रेखा जोशी