Tuesday, 3 November 2015

क्या मालूम किस पल बदले यहाँ रूप

पल पल जीवन का बदले  यहाँ स्वरूप
है  कहीं पर छाँव  और कहीं  यहाँ  धूप
भर लो झोली खुशियों से इस  जीवन में
क्या मालूम  किस पल बदले  यहाँ रूप

रेखा जोशी



आईना जिंदगी का [गीत]


यह मन तो मेरा पगला है
पर आईना वो जिंदगी का
...
डूब जाता है कभी तो वो
भावनाओं के समन्दर में
उमड़ उमड़ आता है प्यार
कोई अंत नही नफरत का
...
रोता बिछुड़ने से तो कभी
गीत खुशियों के गाता कभी
है आँसू भी बहाता कभी
पर प्याला भी है प्रेम का
...
छोटा सा है यह जीवन रे
हर पल यूँ हाथ से छूटा रे
सुन ओ पगले मनुवा मेंरे
है मोल बहुत रे इस पल का
...
यह मन तो मेरा पगला है
पर आईना वो जिंदगी का

रेखा जोशी

प्रभु करें पूरा यहाँ सपना कभी

काम अच्छा  तुम यहाँ करना कभी 
फिर  करो  मंथन यहाँ अपना कभी 
तब    बने  गी   खूबसूरत   ज़िंदगी 
प्रभु  करें   पूरा  यहाँ   सपना  कभी 

रेखा जोशी 

Sunday, 1 November 2015

पिया के द्वार [पूर्व प्रकाशित रचना ]


सात समुद्र पार कर
आई पिया के द्वार 
नव नीले आसमां पर
झूलते इन्द्रधनुष पर  
प्राणपिया के अंगना 
सप्तऋषि के द्वार 
झंकृत हए सात सुर
हृदय में  नये तराने |
.........................
उतर रहा वह नभ पर 
सातवें आसमान  से 
लिए रक्तिम लालिमा
सवार सात घोड़ों पर 
पार सब करता हुआ 
प्रकाशित हुआ ये जहां
अलौकिक , आनंदित
वो आशियाना दीप्त
...............................
थिरक रही अम्बर में 
अरुण की ये रश्मियाँ
चमकी धूप सुनहरी सी
अब आई  मेरे अंगना 
है स्फुरित मेरा ये मन 
खिल उठा ये तन बदन
निभाने वो सात वचन 
आई अपने पिया के द्वार 

रेखा जोशी 

तू करता चल शुभ कर्म जगत में

है  पाया  जीवन  प्रभु  की  माया
कुछ  करने  ही   दुनिया में आया
तू करता चल शुभ कर्म जगत में
रहे  सभी  पर  उसकी  छत्र छाया

रेखा जोशी 

मुस्कुराता रहे मधुबन प्यारा

है  अपनी  धरती  गगन  हमारा
मिलजुल कर यह उपवन संवारा
खिलती  कलियाँ  दे  रही  संदेश
मुस्कुराता  रहे  मधुबन   प्यारा

रेखा जोशी 

छाँव है कही ,कही है धूप जिंदगी [मेरी पूर्व प्रकाशित रचना ]

''छाँव है कही ,कही है धूप जिंदगी''

शाम का समय था ,न जाने क्यों रितु का मन बहुत बोझिल सा हो रहा था , भारी मन से उठ कर रसोईघर में  जा कर उसने अपने लिए एक कप चाय बनाई और रेडियो एफ एम् लगा कर वापिस आकर कुर्सी पर बैठ कर धीरे धीरे चाय पीने लगी |  चाय की चुस्कियों के साथ साथ वह संगीत में खो जाना चाहती थी कि एक पुराने भूले बिसरे गीत ने उसके दिल में हलचल मचा दी ,लता जी की सुरीली आवाज़ उसके कानो में मधुर रस घोल रही थी ,''घर से चले थे हम तो ख़ुशी की तलाश में ,गम राह में खड़े थे वही साथ हो लिए '', कभी ख़ुशी कभी गम ,कहीं सुख और कहीं दुःख ,इन्ही दोनों रास्तों पर हर इंसान की जिंदगी की गाड़ी चलती रहती है ,कुछ ही पल ख़ुशी के और बाकी दुःख को झेलते हुए ख़ुशी की तलाश में निकल जाते है | 

रितु अपनी ही विचारधारा  में खो सी गई थी ,क्या तलाश करने पर किसी को भी ख़ुशी मिली है कभी,शायद नही ,ख़ुशी तो अपने अंदर से ही उठती है ,जिस दिन उसके घर में ,उसकी बाहों में एक छोटी सी गुड़िया, नन्ही सी परी आई थी ,तब  उसकी और उसके पति राजेश की खुशियों का पारावार मानो सातवें आसमान को छू रहा था ,और हाँ जिस दिन राजेश की प्रमोशन हुई थी उस दिन भी तो हमारे पाँव जमीन पर ख़ुशी के मारे टिक नही रहे थे |हर छोटी बड़ी उपलब्धी से हमारे जीवन में अनंत खुशियों का आगमन होता है ,चाहे हम अपनी मनपसंद वस्तु की खरीदारी करें यां फिर हमारी किसी इच्छा की पूर्ति हो ,अगर हमारी कोई अभिलाषा पूरी नही हो पाती तो हमे क्रोध  आता है ,आक्रोश  पनपता है और हम  निराशा एवं अपार दुःख में डूब जाते है |वह इसलिए कि जैसा हम चाहते है वैसा हमे मिल नही पाता ,ऐसी परिस्थितियों  से कोई उभर कर उपर उठ जाए ,या आशा ,निराशा में सामंजस्य स्थापित कर सके तो हमारा दामन सदा खुशियों से भरा रहे पाए गा |अपने अंतर्मन की ऐसी आवाज़ सुन कर अनान्यास ही रितु के मुख से निकल पड़ा ''नही नही .यह तो बहुत ही मुश्किल है ,जब हम उदास होतें है तब तो हम और भी अधिक उदासी एवं निराशा में डूबते चले जाते है ,''|उन भारी पलों में हमारी विचारधारा ,हमारी सोच केवल हमारी इच्छा की आपूर्ति न होने के कारण  उसी के इर्द गिर्द घड़ी की सुई की तरह घूमती रहती है |

इन्ही पलों में  अगर हम अपनी विचार धारा को एक खूबसूरत दिशा की ओर मोड़ दें तो जैसे  जलधारा को नई दिशा मिलने के कारण बाढ़ जैसी स्थिति को बचाया जा सकता है ठीक वैसे ही विचारों के प्रवाह की दिशा बदलने से हम निराशा की बाढ़ में डूबने से बच सकतें है |हमारी जिंदगी में अनेकों छोटी छोटी खुशियों के पल आते है ,क्यों न हम उसे संजो कर रख ले ?,जब भी वह पल हमे याद आयें गे हमारा मन प्रफुल्लित हो उठे गा |क्यों न हम अपने इस जीवन में हरेक पल का आनंद लेते हुए इसे जियें ? जो बीत चुका सो बीत चुका ,आने वाले पल का कोई भरोसा नही ,तो क्यों न हम इस पल को भरपूर जियें ?इस पल में हम कुछ ऐसा करें जिससे हमे ख़ुशी मिले ,आनंद मिले |जो कुछ भी हमे ईश्वर ने दिया है ,क्यों न उसके लिए  प्रभु को धन्यवाद करते हुए , उसका उपभोग करें |''हर घड़ी बदल रही है रूप जिंदगी ,छाँव है कही ,कही है धूप जिंदगी ,हर पल यहाँ जी भर जियो ,जो है समां कल हो न हो ''रेडियो पर बज रहे इस गीत के साथ रितु ने भी अपने सुर मिला दिए। 

रेखा जोशी