Thursday, 3 March 2016

तुम निभाना साथ शिव शम्भू मेरा



जलती मन में प्रेम की ज्योति  रहे
मिले  तुमसे  सदा हमें  शक्ति रह
तुम निभाना साथ शिव शम्भू मेरा
चरणो  में  तेरे   सदा   भक्ति  रहे

रेखा जोशी

घर था कभी जो

यादें चिपकी हुई
उस जर्जर  मकान की
दीवारों से
ढह रहा जो
धीरे धीरे
घर था कभी जो
खिलखिलाती थी जहाँ
पीढ़ी दर पीढ़ी
न जाने कितनी
ज़िन्दगियाँ
याद दिलाती होली की
देख
इन पर पड़े लाल गुलाबी
रंगो  के कुछ छींटे
तस्वीर बसी आँखों में
उन ऊँचे बनेरों की 
जहाँ जगमगाई
थी कभी मोमबत्तियाँ
दीपावली की रात को
गूँजती थी जहाँ
बच्चों की किलकारियाँ
गम के आँसू भी
बहते रहे थे जहाँ
आज कैसे सूना सूना
बेरंग सा खड़ा
सिसकियाँ
भरता हुआ

रेखा जोशी

Wednesday, 2 March 2016

था भरता जो उन्मुक्त उड़ान आसमान पर


ढूँढ  रहा  कपोत अपनी प्रिया का प्रोफाइल
करना  शुरू  कर दिया  उसने  भी मोबाईल
था भरता जो उन्मुक्त उड़ान आसमान पर
देख मशीन को अब करता है  वह समाईल

रेखा जोशी 

रस छलकाते दुल्हन के बाँवरे नैना है

चंचल नैना दुल्हन के आँचल की ओट से
मुस्कुराता चाँद जैसे  बादल की  ओट से
रस  छलकाते  दुल्हन  के बाँवरे  नैना है
देखा अपने प्रियतम को पाये न चैना  है

 रेखा जोशी

Tuesday, 1 March 2016

फागुन आया री सखी चली हवायें

फागुन  आया री सखी चली  हवायें
फूल खिले अँगना सजना नहीं आयें
रह गये  सूने  सतरँगी   ख़्वाब  मेरे
पिया के बिना फूल मन के मुरझाये

रेखा जोशी 

उपवन में गुलाब आज महकने लगे


मेरे   अँगना  में  पँछी  चहकने लगे
नज़ारे  भी  आज  यहाँ  बहकने लगे
छाई    खूबसूरत   फूलों   की  बहार
उपवन में गुलाब आज महकने लगे

रेखा जोशी 

भारत के दुश्मन होश में आ जाओ तुम

मत ललकारना  तुम राष्ट्र  की एकता  को
करते  सलाम   हम  अपनी  राष्ट्रीयता को
भारत   के  दुश्मन   होश में आ जाओ तुम
टूटने   न   देंगे   देश   की  अखण्डता   को
जयहिन्द

रेखा जोशी