Saturday, 1 August 2015

क्षणिकाएँ


संग  मेरे
चलती रही मेरी अर्धांगिनी
निभाती रही सात वचन
साथ मेरा सदा
 निभाती रही वह रात दिन
हूँ खुशनसीब
संवर गई ज़िंदगी मेरी
पा कर हमसफ़र
हसीन
…………
चाहते इच्छाएँ
बरसों  से जिन्हे
था दबा रखा मैने
न जाने क्यों
मचल मचल कर सीने में
पूरा होना
अब चाह रही
जब से देखा
तुमको
.......... ……
हाथों से
फिसल रही
लम्हा लम्हा
रेत की तरह
ज़िंदगी हमारी
दो दिन के जीवन में
बाँट लो खुशियाँ
सबके संग
लौट कर न आएंगे
फिरसे
यह पल

रेखा जोशी


रूठा यार मनाऊँ मै

अपने राँझे  की हीर मै
रूठा  यार मनाऊँ मै
बलिहारी जाऊँ  मै  उस पे
वारी जाऊँ   मै  उस पे
.
सहती गर्म लू के थपेड़े
तपती दोपहरी आई खेत मै
करने  बाते राँझे  से दो चार
लेकर रोटी बाजरे की लोटा भर छाछ
साथ लिये ढेर सा प्यार
पोंछ पसीना पेशानी से उसके
रूठा  यार मनाऊँ मै
बलिहारी जाऊँ  मै  उस पे
वारी जाऊँ   मै  उस पे
.
राँझा क्या रूठा
रूठा है अब रब मुझसे
चैन न पाऊँ पल भर भी मै
दिल की बाते  रही दिल में ही
कैसे उसे बताऊँ मै
रूठा  यार मनाऊँ मै
बलिहारी जाऊँ  मै  उस पे
वारी जाऊँ   मै  उस पे

रेखा जोशी

Friday, 31 July 2015

गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं

गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर आप सभी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं

दीप ज्ञान का 
प्रज्जवलित  कर उसने 
राह दिखाई 
उजाले की 
अर्पित करती हूँ मै
श्रद्धासुमन
अपने गुरुवर को
शत शत नमन  

करती हूँ मै  
अपने गुरुवर को  

रेखा जोशी

पर उपदेश कुशल बहुतेरे

जीवन में
बहुत से जन
ऐसे भी मिल जायेगे
भूले से गर  कुछ पूछो उनसे
प्रवचन देंगे वह अनेक
भीतर से कायर बुज़दिल
देंगे  भाषण वीरता का
कंजूस मक्खीचूस भी
बन जाता बातों में
दानवीर कर्ण
सदाचार पर
दुराचारी भी दे देगा उपदेश
युधिष्ठर जैसे
मिलते  विरले कहानियों में
सत्य ढाला आचरण में
फिर उसका पाठ सुनाया
लेकिन  भरा पड़ा जग सारा
उनसे जिनकी
कथनी करनी में अंतर बहुतेरे
है जो
पर उपदेश कुशल बहुतेरे
जे आचरहिं ते नर न घनेरे

रेखा जोशी 

Thursday, 30 July 2015

जश्न मनाती बुराई सोती अच्छाई है

यहां   हँसती   बुराई   रोती  अच्छाई है 
जश्न  मनाती  बुराई  सोती अच्छाई है 
क्या  करें सोते रहे या मनायें हम जश्न 
पर ज़िंदगी में खुशियाँ बोती अच्छाई है 

रेखा जोशी 

Wednesday, 29 July 2015

नैना सूनें राह निहारें ,देखूँ पथ कब से तेरा

सावन बरसा आँगन मेंरे , चलती मस्त बयार लिखें 
मिलजुल कर अब रहना सीखें प्यारी इक बौछार लिखें 
....
भीगा  मेरा  तन  मन सारा ,भीगी  मलमल  की चुनरी 
छाये काले बादल नभ पर , बिजुरी अब   उसपार लिखें 
…
झूला झूलें मिल कर सखियाँ ,पेड़ों पर है हरियाली 
तक धिन नाचें मोरा मनुवा ,है चहुँ ओर बहार  लिखें 
.... 
गरजे बदरा धड़के जियरा ,घर आओ सजना मोरे 
बीता जाये सावन साजन ,अँगना अपने प्यार लिखें 
.... 
नैना सूनें राह निहारें ,देखूँ पथ कब से तेरा 
आजा रे  साँवरिया मेरे ,मिल कर नव संसार लिखें 

रेखा जोशी 

गौरी नंदन करना मंगल

तुम ही भक्तों के रखवारे
हर पल साथ रहते  हमारे 
गौरी  नंदन करना मंगल 
विघ्न  हरते   देते   सहारे 

रेखा जोशी