Saturday, 12 April 2014

विनाश को आमंत्रण



पांच वर्ष बाद इन सुन्दर पहाड़ियों में मीरा का  आना हुआ ,टेढ़ी मेढ़ी सर्पाकार सड़कों पर उनकी  गाडी फर्राटे भरती हुई निकल रही थी कि अचानक ड्राईवर ने गाडी रोक दी ,देखा तो ठीक गाड़ी के सामने एक बड़ा सा पत्थर पड़ा हुआ था ,शायद ऊपर पहाड़ों से से टूट कर कोई चट्टान लुढ़क कर नीचे सड़क पर गिर गई थी । मीरा और उसका पति दोनों गाडी से नीचे उतर कर सड़क पर आ गए ,अब आगे कैसे जायें गे ,वह दोनों इसी दुविधा में थे कि वहीँ का रहने वाला एक व्यक्ति वहां पहुंच गया ,''साहब जी यह तो यहां अक्सर होता रहता है ,आप देखो ऊपर पहाड़ को ,सारे पेड़ कट चुके है ,बारिश होते ही पहाड़ टूटने लगते है ,आये दिन ऐसा नज़ारा देखने को मिल जाता है ,ख़ैर आप चिंता  न करो मे अपने साथियों के साथ मिल कर इसे हटा देता हूँ ,''। तीन आदमियों के साथ वह व्यक्ति पत्थर हटाने में जुट गया ,लेकिन मीरा के मन में उथल पुथल शुरू हो गई ,''क्यों काटते है पेड़ ,मानव क्यों खिलवाड़ करता है प्रकृति से ,जब पेड़ ही काट दिए जाएँ गे तो पानी के बहाव को कैसे रोका जा सकता है ,मानव खुद ही विनाशलीला को आमंत्रित कर रहा है '', तभी उसे उस पहाड़ी व्यक्ति की आवाज़ सुनाई दी ,''लीजिये साहब जी ,आपका रास्ता साफ़ हो गया ,अब आप आराम से आगे जा सकते है । मीरा अपने पति के साथ कार में बैठ गई और साथ में अनेक प्रश्न लिए वह आगे बढ़ गए ।

रेखा जोशी