Tuesday, 10 June 2014

ग़ज़ल

ग़ज़ल 
 बहर --2 1 2 2 2 1 2  2 2 1 2

तुम मिले खुशियाँ मिली सजदा करें 
इश्क  तुम नहीं  समझे अब क्या करें 

मिल गये है जब हमें अपने सनम 
वह समझ नहीं पाये  अब क्या करें 

दी हमे थी चोट जब तुमने  बहुत 
वही सज़दा कर रहे  अब क्या करें 

ज़ख्म जो नासूर बन तड़पा रहा 
ताउम्र वह  नही भरे अब क्या करें 

थे बनाने हम चले किस्मत सनम 
है बिछुड़ गई राहें  अब क्या करें 

 था  सहारा प्यार का जोशी सदा 
जब न चाहें वो हमें अब क्या करें 

रेखा जोशी 



दर्द ए दिल बयाँ न कर सकी प्रियतम


दर्द ए दिल बयाँ न कर सकी प्रियतम 
पीड़ा मन  की दिखा  न सकी प्रियतम 
खिले  गुल   छाई   बहार  बगिया  में 
आस मिलन की छिपा न सकी प्रियतम 

रेखा जोशी 

Thursday, 5 June 2014

दोहे [वीर रस ]



उठो  देश  के  सपूतो,  भारत  रहा  पुकार ।  
भारत पर तुम मर मिटो ,हो जाओ तैयार ॥ 

आन बान पर देश की  ,लाखों हुये  शहीद । 
सीमा पर उत्सव मने  ,क्या होली क्या ईद ॥ 

भारत सीमा पर खड़े ,तन कर वीर जवान । 
आँच  देश  पर  न आये ,हो  जायें  कुरबान ॥ 

हमारी  जन्म भूमि  की ,माटी है अनमोल ।
तिलक  लगाएँ  माटी से ,नाही इसका मोल  ॥ 

रेखा जोशी 

पूछती है सवाल अक्सर मेरी तन्हाईयाँ मुझसे

पूछती है सवाल
अक्सर
मेरी तन्हाईयाँ
मुझसे
गुनगुनाती जब
धूप आँगन में
गुमसुम सी तब
क्यों खोयी खोयी सी
तन्हाईयों में अपनी
भीतर  ही भीतर
सुलगती रही

जीवन के सफर में
साथी मिले
कुछ अपने कुछ पराये
पराये अपने बने
कभी अपने पराये
पर पीड़ा अंतस  की
तन्हाईयों में अपनी
भीतर ही भीतर
सुलगती रही

महकते रहे फूल
मुस्कुराती रही कलियाँ
बगिया में
पर मुरझाती रही
लेती रही सिसकियाँ
तन्हाईयों में अपनी
भीतर ही भीतर
सुलगती रही

पूछती है सवाल
अक्सर
मेरी तन्हाईयाँ
मुझसे
जीवन में
न ख़ुशी न गम
क्यों फिर
तन्हाइयों में अपनी
भीतर ही भीतर
सुलगती रही

रेखा जोशी


रात चाँदनी शीतल पवन[गीत ]


रात  चाँदनी  शीतल पवन
घर  आजा  तू  मेरे  सनम

तुझको  बुलाए  ठंडी हवाएँ
आँचल मेरा उड़  उड़  जाए
शीतल पवन अगन लगाये
घर  आजा तू   मेरे  सनम

सूने नैना तुम  बिन सजन
राह  निहारे  पागल  नयन
अब तो तू आ भी जा बलम
घर  आजा  तू   मेरे  सनम

रात  चाँदनी   शीतल पवन
घर  आजा  तू   मेरे  सनम

रेखा जोशी




Tuesday, 3 June 2014

माना कि बहुत कठिन डगर है प्यार की

धीरे  धीरे  मुहब्बत  में सरूर  आना है
राह ए इश्क में तुम्हे भी जरूर आना है
हमने माना कि बहुत कठिन डगर है प्यार की
वफ़ा ए दीपक जलाने भी जरूर आना है

रेखा जोशी 

Sunday, 1 June 2014

गरजत बरसत काले मेघा आये न पिया

रिम झिम रिम झिम
गरजत बरसत
काले मेघा
आये न पिया 

टप टप टिप टिप 
बरस रही 
बूंदे बारिश की 
पिया गये परदेस सखी री 
मोहे छोड़ अकेला
सूना अंगना बिन पिया
जले जिया
आये न पिया 

रिम झिम रिम झिम
गरजत बरसत
काले मेघा
इक बरसे बदरिया
दूजे मोरे नयना 
आये न पिया

बिजुरी चमके
धड़के जिया घर आजा
मोरे सावरियाँ
गरजत बरसत
काले मेघा
आये न पिया 

चारो ओऱ
जलथल जलथल
तरसे प्यासे नयना
पीर न जाने
इस दिल की
धड़के मोरा जिया

रिम झिम रिम झिम
गरजत बरसत
काले मेघा
आये न पिया

रेखा जोशी