Thursday, 31 July 2014

चोका

चोका [सावन ]

घटायें काली
पानी बरसा जाती
बरखा आई
झूले पर सखियाँ
बोले पपीहा
छा गई हरियाली
मोर नाचता
भीगती चुनरिया
उमंग लाया
नभ पर बदरा
नाचता तन
मदमस्त हवायें
याद आये पिया की

रेखा जोशी

वीर (आल्हा) छंद

वीर (आल्हा) छंद 

जागो माँ के वीर सपूतो ,डूब रहा है भारत आज ।

इसे लूटते तेरे भाई  , क्यों न गिरायें उन पर गाज || 

धधक रही लालच की ज्वाला ,पनप रहा है भ्रष्टाचार।

नोच खा रहे कपूत माँ के ,बंद करो ये अत्याचार ॥ 

रेखा जोशी 

खत्म सब कुछ हो जायेगा जब न रहेगी ज़िंदगी

गीतिका

अधूरी चाहतें अधूरे ख़्वाब  अधूरी  ज़िंदगी
इंतज़ार है  न जाने  कब होगी पूरी ज़िंदगी

डोल रही देख मंझधार में यह कश्ती  हमारी
गिरा दिये तुमने  हाथों से पतवार भी  ज़िंदगी

थक गये  नैन मेरे यहाँ राह तकते तुम्हारा
बेचैन आँखों को है  इंतज़ार अब भी ज़िंदगी

राह ज़िंदगी की मुश्किल होंगी इस कदर हमारी
सोचा न था यह हमने  ख़्वाब में भी कभी ज़िंदगी

उखड़ रही यहाँ साँसे  भी लम्हा लम्हा हमारी
खत्म सब कुछ हो जायेगा जब न रहेगी ज़िंदगी

रेखा जोशी





Wednesday, 30 July 2014

जा रहा तोड़ सभी रिश्ते नाते मोह माया के


ढल गया दिन अन्धेरा शाम का बढ़ा जा रहा है
रात के आगोश में सूरज  अब  छुपा जा रहा है
जा  रहा  तोड़ सभी  रिश्ते  नाते  मोह माया के
बंधन मुक्त वह  राही  अकेला  चला जा रहा है

रेखा जोशी 

Tuesday, 29 July 2014

Sometimes life smiles and sometimes it weeps


Very often
I see dreams
With my eyes open
Feeling good
When my heart
Flies in the sky 
With golden wings
And my mind starts
Dancing
With the divine music emitted
By the strings of
Rainbow
And all my imaginations
Become reality
Where sometimes life
Smiles or laughs
And sometimes
It weeps in pain 

Rekha Joshi


जो अवतरित हुआ इस धरती पर

है सुरक्षा कवच
ज़िंदगी का
साया सिर पर
जो है
माँ बाप का
हूँ निर्भय मै
जो है आपार स्नेह
मुझ पर
माँ बाप का
मिलता  बल मुझे
जब हाथों ने उनके
है थामा मेरा हाथ
शत  शत नमन
उस  ईश्वर का
जो अवतरित हुआ
इस धरती पर
दिखाया जिसने
अपना रूप
बन कर मेरे
माँ बाप

रेखा जोशी



सौरी ,विद लव'

मीना की अपनी अंतरंग सखी दीपा से किसी बात को लेकर अनबन हो गई  |दोनों बचपन की सखियाँ जब भी एक दूसरे को देखती तो मुहं मोड़ लेती ,मन आक्रोश से भर जाता ,महीने बीत गए एक दूसरे से बात किये ,मीना अंदर ही अंदर बहुत  दुखी थी और वह अपनी प्यारी बचपन की सहेली से बात करना चाहते हुए भी नही कर पाती थी बल्कि उसे दीपा पर और भी अधिक गुस्सा आता ,''आखिर वह अपनी गलती मान क्यों नही लेती'' ,दीपा भी मीना से बहुत प्यार करती थी लेकिन वह भी उसके आगे झुकना नही चाहती थी ,नतीजा क्या हुआ दोनों सहेलियाँ अपने दिलों में एक दूसरे के प्रति क्रोध लिए भीतर ही  भीतर सुलगती रही और उन दोनों ने  सदा के लिए एक दूसरे को खो दिया |

अगर दोनों ने आपसी मनमुटाव  को समाप्त करने के लिए एक दूसरे से क्षमा मांग ली होती या किसी एक सखी ने पहल कर दूसरी से  क्षमा मांग ली होती और उसने भी उसे दिल से माफ़ कर दिया होता तो दोनों बचपन की सखियाँ यूँ  एक दूसरे से नही बिछुड्ती बल्कि वह दोनों एक दूसरे के और अधिक करीब आजाती |मीना की मौसी ने उसे दुखी देख कर उसका कारण पूछा और सारी घटना जानने पर उसे समझाया कि बहुत ही  खुशनसीब होते है वह लोग जो रिश्तों की  गरिमा को पहचान कर उसे सजों कर रखना जानते है | अपने से हुई गलती पर क्षमा मांग लेने से कोई छोटा नही हो जाता और किसी को उसकी गलती पर माफ़ कर देना तो बड्पन की निशानी है हम अंपने जीवन में जाने अनजाने कितनी ही गलतियां करतें है ,कितनो का दिल दुखातें है लेकिन किसी से हुई कोई गलती को हम अनदेखा नही कर सकते बस क्रोधित हो कर उस पर बरस पडतें है  ,कई बार तो किसी की क्षमा याचना करने पर भी  ताउम्र  हम उसे क्षमा नही कर पाते और मन ही मन सदा के लिए बैर भाव की गाँठ बाँध कर रख लेते है |जब कभी भी उस के बारे में मन में विचार आता है , तब एक अजीब सी कडवाहट भर जाती है हमारे दिल में जो हमे बेचैन कर देती है और न जाने हमारे भीतर उठ रही वह क्रोधाग्नि अनगिनत रोगों को निमन्त्रण दे देती है |

असल में जब हम किसी से क्षमा मांगते है या किसी को क्षमा करते है तो किसी दूसरे  से अधिक हम अपने उपर उपकार करते है |क्षमा हमारे भीतर उठ रही क्रोधाग्नि के ज्वालामुखी को शांत कर हमारे अंतर्मन को ठंडक प्रदान कर उसे शुद्ध बना देती है |क्षमा का अर्थ है किसी की गलती को दिल से माफ़ कर दो और उसके बाद उसकी उस गलती को सदा के लिए भूल जाना |सभी धर्मो ने क्षमा के महत्व को पहचाना है ,जिन्होंने ईसामसीह को सूली पर चढाया उनके लिए ईसामसीह ने परमात्मा से क्षमा करने के लिए प्रार्थना की |स्वामी दयानंद जी ने उस पुरुष जगन्नाथ को क्षमा कर वहां से भागने के लिए पैसे थमा दिए,जिसने उन्हें दूध में  संखिया घोल कर पिलाया था |अपनी मौसी की बातों को सुनाने के बाद  मीना ने  दीपा को मनाने का फैसला लिया ,उसने एक सुंदर सा कार्ड बनाया और उस पर बड़े बड़े अक्षरों से लिखा ''सौरी ,विद लव''और उस कार्ड को दीपा के पास जा कर उसके हाथ में थमा दिया |

रेखा जोशी