Thursday, 31 March 2016

जख्म दिल के जो मिले नासूर बन चुके आज

नींद से  तुम हमें जगाते रहे बार बार
ख्वाबों में तुम हमें सताते रहे बार बार
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चैन ओ सकून लेकर कहाँ चले  हमारा
हाल ऐ दिल अपना सुनाते  रहे बार बार
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रात दिन खिलते रहे दिल में कमल यादों के
यादों  में   आकर   रुलाते   रहे   बार   बार
....
जो जख्म दिल को  मिले नासूर  हो गये आज
मुहब्ब्त  में  दिल  को   जलाते  रहे  बार  बार
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क्या करें तुम्हे न भूल पायें गे ज़िंदगी भर
दर्द ऐ दिल अपना छिपाते रहे बार बार

रेखा जोशी 

कर्मयोगी बन करते रहना पुरषार्थ

कर्मयोगी   बन सदा करना  पुरुषार्थ
राह चाहे हो कठिन धीरज रखना  साथ
तकदीर पर न रखना आस ओ मूर्ख मन
रेखायें   बदल  देता   कर्म  करता  हाथ

रेखा जोशी 

Wednesday, 30 March 2016

मनोरम छन्द

ध्यान कर प्रभु वंदना में 
धूप उतरी  अंगना में 
ज़िंदगी फिर मुस्कुराई 
प्यार खुशियाँ घर आई

रेखा जोशी 

बिगाड़ा रूप हमने मिलकर तरंगिनी का

पर्वतों  से  मिला  हमें जल नवल धवल
जहाँ  बहती थी सुन्दर सरिता कल कल
बिगाड़ा रूप हमने मिलकर तरंगिनी का
है प्रदूषित  काला अब  नदिया   का जल

रेखा जोशी 

आओ मिलकर सुलझायें उलझी हुई डोर

जीवन  में  हमारे  आज  आई  नई  भोर
लेकिन तकदीर पर चलता नहीं भई जोर
थे  उलझ  गये   धागे  ज़िंदगी  में हमारे
आओ मिलकर सुलझायें उलझी हुई डोर

 रेखा जोशी

गुलशन की महक संग बागबान ले गया

धरा  के    संग   सारा  आसमान  ले गया
रँग  चुरा  कर  जीने   का  सामान ले गया 
सिसकती  रही कली कली याद  में उसकी
गुलशन की महक  संग  बागबान ले गया

रेखा जोशी 

Tuesday, 29 March 2016

आये यहाँ तेरी महफ़िल में हम भी सनम

बादलों  की  ओट से  मुस्कुराता  है चाँद
तारों के  सँग अम्बर  पे चमकता है चाँद
आये यहाँ तेरी महफ़िल में हम भी सनम
रास्ते पर आज रश्मियाँ बिखेरता है चाँद 
रेखा जोशी