लावणी छंद
उपवन खिलते फूल फूल जब रंगीन छटा मन भाये
शीतल समीर दे हिचकोले मन मोरे सजन समाये
आये अँगना मोरे सजना हर्षाया हमारा जिया
है नैनो में सपने तेरे साँवरिया सलोने पिया
रेखा जोशी
लावणी छंद
उपवन खिलते फूल फूल जब रंगीन छटा मन भाये
शीतल समीर दे हिचकोले मन मोरे सजन समाये
आये अँगना मोरे सजना हर्षाया हमारा जिया
है नैनो में सपने तेरे साँवरिया सलोने पिया
रेखा जोशी
आजकल मौसम बदल रहा है ,जाड़ा जाने को है और होली आने को है,जैसे जैसे मौसम बदलता है वैसे ही हमारा मूड भी बदलता है ।ग्रीष्म ऋतु का आगमन हो रहा है गर्मी के मौसम में घर की सजावट के लिए कुछ टिप्स
1 इस मौसम में हल्के रंग आँखों को ठंडक देते है ,अपने घर की दीवारों पर सफेद या हल्के रंग का पेंट करवाना चाहिए । हल्के रंगों से घर में रौशनी फैलती है और घर का माहौल भी खुशनुमा रहता है।
2 अपने घर को अनावश्यक सामान से मत भरिये , केवल आवश्यक वस्तुएँ ही रखे,ऐसा करने से घर में खुलापन रहता है।
3अपने घर के विभिन्न कमरों के लिए फर्नीचर खरीदते समय इस बात का ध्यान रखें कि फर्नीचर कमरे के हिसाब से बड़ा न हो ।
4 अपने घर के कमरों के खिड़की दरवाजों के पर्दों के लिए भी हल्के और दीवारों के पेंट से कंट्रास्ट रंग कमरे की सजावट में निखार लाते हैं।
5 अपने घर में लाइट्स का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए।
6अपने घर के कमरों के कोनो की सजावट का भी ध्यान रखना चाहिए जैसे कि घर के ड्राईंग रूम के कोने में कोई आकर्षक डेकोरेटिव पौधा या कोई आर्टिफिशियल पौधा भी ड्राईंग रूम की सजावट में चार चाँद लगा सकता है ।
सजावट के साथ साथ सबसे महत्वपूर्ण है घर की सफाई ,साफ़ सुथरा घर देखने में सुंदर लगता है और शांति भी प्रदान करता है
रेखा जोशी
उड़ायें गे पतंग लिये हाथ में डोर
मुस्कुराया बसन्त गली गली में शोर
उड़ें गी उमंगे छू लेंगी आसमान
लहरायें गगन में चले न कोई ज़ोर
,
गुलाबों का मौसम आया बगिया में बहार
है कुहकती कोयलिया अब अंबुआ की डार
हर्षौल्लास से थिरकते झूम रहे आज सब
है मदमस्त चल रही यहाँ फागुन की बयार
रेखा जोशी
एकांकी
""चक दे इंडिया",
कलाकार
सूत्रधार(पहला,दूसरा)
लक्ष्मी (पत्नी)
रमेश(पति)
दादी
गुड्डी
लाडू
दो व्यक्तियों का प्रवेश
पहला ,आज हम आपको सुनाते हैं
दूसरा ,एक नारी की कहानी
पहला,समाज की बेड़ियों को तोड़ कर आज की नारी
दूसरा ,पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिला कर
पहला ,जीवन के संघर्ष की रणभूमि में उतर आई है
दूसरा,आज वह डॉक्टर है,वकील है,जज है,प्रिंसिपल है,टीचर है
पहला,और वह नेता भी है
दूसरा ,आज 21वीं सदी में भी हमें यह कहना पड़ रहा है
पहला,नारी तेरी यही कहानी
दूसरा,आँचल में ममता आँखों में पानी
एक औरत का प्रवेश ,गोद में बच्ची,आँखों मेआँसू
पहला ,क्या हुआ बहन?तुम रो क्यों रही हो?
दूसरा,अरे अरे अरे ,तुम्हारी बच्ची तो बहुत सुंदर है,इसके पैदा होने पर आँसू मत बहाओ
औरत( लक्ष्मी) ,आप ही बताओ आँसू न बहाऊँ तो क्या करूँ,इसकी किस्मत भी तो मेरे जैसी ही होगी
पहला ,नारी की दुर्दशा की तो अनेक कहानियाँ है
दूसरा, कभी उसे कोख में ही तो कभी पैदा होते ही मार दिया जाता है
पहला ,कहीं पर उसकी आबरू लूटी जाती है और कहीं उसे ज़िंदा जला दिया जाता है
दूसरा ,इस तरह दिन महीने साल गुज़रते रहे और लक्ष्मी तिल तिल करके मरती रही
लक्ष्मी के पति रमेश का प्रवेश(शराब के नशे में चूर)
रमेश,,अरे लक्ष्मी कहाँ हो, बहरी हो गई हो क्या,सुनाई नही देता ,जल्दी खाना लाओ बहुत जोरों की भूख लगी है
(झूमता हुआ गाता है,मै शराबी नही,मै शराबी नही....) लक्ष्मी का प्रवेश
(गोद में बेटा लाडू और बिटिया गुड्डी का हाथ थाम हुये
लक्ष्मी ,सारी तनखाह तो शराब में उड़ा देते हो ,कैसे जलेगा घर का चूल्हा
रमेश,खबरदार जो शराब के बारे में कुछ बोला
पहला ,यही तो है कहानी
दूसरा शराबी पति
पहला ,घर में गरीबी
दूसरा, खाने के लाले,सुनने को ताने
पहला,और औरत बेबस लाचार ,अपने टूटे हुए घर को सँवारती रही
गुड्डी को लाडू मारता है आवर उसकी किताबें फाड़ देता है
गुड्डी(रोती हुई),माँ माँ देखो लाडू ने मेरी किताबें फाड़ दी है
लाडू (नाचता हुआ) फाडूं गा, फाडूं गा ,ले यह ले ,(किताबें फाड़ताहै)
लक्ष्मी (गुस्से में)ठहर जा ,उसे थप्पड़ दिखारी है
(लाडू भाग कर दादी की गोद में छुप जाता है )
दादी,(पुचकारते हुए) क्या हुआ मेरे राजा बेटे क़ो किसने मारा
(लक्ष्मी को डांटते हुए) भगवान का शुक्र मना जोतुझे बेटे का सुख मिला है
खबरदार जो उसे कुछ कहा (लाडू के सर पर प्यार से हाथ फेरते हुए)
गुड्डी से,तू टुकर टुकर क्या देख रही है,जा रसोई से भाई के लिए मलाई वाला ढूध ले कर आ,देख तो कितना कमजोर हो गया है
(लाडू गुड्डी को जीभ निकाल कर चिढाता है)
पहला,बीता बचपन ,आई जवानी
दूसरा ,है घर घर में गुड्डी की कहानी
पहला,पर कुछ कर दिखाने की
दूसरा,थी गुड्डी ने ठानी
पहला,रंग लाई गुड्डी की मेहनत
दूसरा ,सभी बाधाएं झेलती हुई गुड्डी आगे बढ़ती गई और एक दिन वह डाक्टर बन गई
लाडू काप्रवेश
लाडू (ज़ोर से)माँ ,माँ (वह नीचे गिर जाता है और बेहोश हो जाता है,लक्ष्मी दौड़ कर उसे पकड़ती है)
लक्ष्मी (घबराते हुए) गुड्डी देख तो ज़रा इसे क्या हो गया
गुड्डी(जांचते हुए) माँ यह तो नशे में है ,शराब का नही ययः तो ड्रग्स ले रहा है,शराब से भी ज्यादा खतरनाक
(लक्ष्मी के पति रमेश का प्रवेश)
रमेश,क्या हुआ मेरे लाडले को
गुड्डी,फुर्सत मिल गई बापू,कहाँ थे तुम जब यह आवारागर्दी करता था,कस के दो थप्पड़ लगाये होते तो आज यह सब नही होता
(रोते हुए दादी का प्रवेश) अरे किसकी नज़र लग गई मेरे लाडू को
गुड्डी ,माँ बापू और दादी ,हमे इसका इलाज करवाना होगा,तभी इसे नशे की लत से छुटकारा मिलेगा
मैने फैसला किया है कि में इसी गाँव में अपना अस्पताल खोलूंगी,मेरी पूरी कोशिश रहेगी कि में अपने गांववासियों की सेवा कर सकूं,
दादी,हाँ बेटी तू ठीक कह रही है ,तूने हमरी आँखें खोल दी है
रमेश ,मुझे अपनी बेटी पर गर्व है,में भारत की सभी बेटियों कोगुड्डी की तरह बनने की राय देता हूँ,तभी तो हम शान से कह सकेंगे
"चक दे इंडिया"
सभीगाते हैं "चक दे चक दे इंडिया""
मिल जायें दो किनारे यह कभी सम्भव नहीं
गगन को धरती छू ले यह कभी सम्भव नहीं
रेल की पटरी सा जीवन हमारा है यहां
संग संग चलते हम मिलन कभी सम्भव नहीं
रेखा जोशी
आधार छंद - दिगपाल
221 2122 , 221 2122
समांत- आरा, अपदांत
यह ज़िन्दगी हमारी करती यही इशारा
आओ चलें जहां से हम तुम करें किनारा
,
अब साथ साथ हम तुम चलते रहें हमेशा
मिलता रहे हमें सजना यह संग तुम्हारा
,
तुम प्यार ज़िन्दगी में लाते रहे हमारे
देना सदा हमें तुम अपना यूँही सहारा
,
यह चांदनी पुकारे आओ चलें सजन हम
आओ चलें जहाँ पर मिलते जमीं सितारा
,
अब थाम हाथ दोनों मिल गीत गुनगुनाएं
कैसे कहें सजन दिल बस में नहीं हमारा
रेखा जोशी
उड़ायें गे पतंग लिये हाथ में डोर
मुस्कुराया बसन्त गली गली में शोर
उड़ें गी उमंगे छू लेंगी आसमान
लहरायें गगन में चले न कोई ज़ोर
रेखा जोशी