साक्षर हो सभी जन यहाँ बालक क्या बाला
भंडार है गायन का हमारी पाठशाला
शत शत नमन करते माँ शारदा को हम सब
भर देती जीवन मे उजाला ही उजाला
रेखा जोशी
Friday, 12 January 2018
साक्षर हो सभी जन यहाँ बालक क्या बाला
मुक्तक
मिल कर हमें यहाँ पर अब गीत गुनगुनाना
जब प्यार ज़िन्दगी से तो प्रीत है निभाना
कुछ कुछ कहा हवा ने अब कान में हमारे
तुम जान हो हमारी अब छोड़ कर न जाना
रेखा जोशी
Thursday, 4 January 2018
स्पर्श
स्पर्श
सात दिन बीत चुके थे ,माला अभी तक कौमा में थी ,अस्पताल में जहाँ डाक्टर जी जान से उसे होश में लाने की कोशिश कर रहे थे वहीँ माला का पति राजेश अपने एक साल के बेटे अंकुर के साथ ईश्वर से माला की सलामती की दुआ कर रहा था । उसके लिए हर दिन काली रात सा था l नन्हा अंकुर अपनी माँ का सानिध्य पाने को बेचैन था ,लेकिन उस नन्हे के आँसू राजेश के नयन भी सजल कर देते थे ,आखिर हार कर राजेश उसे अस्पताल में माला के पास ले गया और रोते हुये अंकुर को माला के सीने पर रख दिया ,''लो अब तुम्ही सम्भालो इसे ,इस नन्हे से बच्चे का रोना मुझसे और नहीं देखा जाता ,''यह कहते ही वह फूट फूट कर रोने लगा । इधर रोता हुआ अंकुर माँ का स्नेहिल स्पर्श पाते ही चुप हो गया और उधर अपने लाडले के मात्र स्पर्श ने माँ की ममता को झकझोर कर उसे मौत के मुहँ से खींच लिया ,माला कौमा से बाहर आ चुकी थी । उनके जीवन में नई सुबह का आगमन हो गया था l
रेखा जोशी
Wednesday, 3 January 2018
मूक प्राणी
है प्रिय जीवन
उतना ही
मूक प्राणी को
जितना प्रिय इंसान को
प्रेम और वफादारी
सदा चाहे इंसान
कहाँ मिलेगा
साथी ऐसा
बेहतर है जो मानव से
न करता कोई सवाल
न करे आलोचना कभी
लुटाता है जो प्रेम सदा
क्यों न लुटाएं हम
उन पर अपनी करुणा
मिले उन्हें भी गर्मी
ठंडी शीतल हवाओं से
छुपा कर ओढ़नी में अपनी
उसे बचाएं सर्दी से
करें प्रेम उतना ही
जितना वह करता हमसे
रेखा जोशी
Tuesday, 2 January 2018
तुम मिले ज़िन्दगी को मुस्कुराना आ गया
तुम मिले ज़िन्दगी को मुस्कुराना आ गया
हमें भी अब ख़ुशी से खिलखिलाना आ गया
छाई बहार बाग में फूल भी महक उठे
गीत खुशी के सजना गुनगुनाना आ गया
रेखा जोशी
Monday, 1 January 2018
महिला शक्ति
महिला शक्ति
वाराणसी में एक छोटा सा गांव शंकरपुर और उसमें रहने वाली शन्नो जिसने प्रसव के समय एक साहूकार से दस प्रतिशत की दर से पांच सौ रूपये कर्ज लिए थे। ब्याज ज्यादा होने के कारण दस साल बाद वो रकम सात हजार हो गई, पैसा चुकता न करने के कारण वो साहूकार उसे बंधुआ मंजदूर बनाना चाहता था। तभी उसके जीवन में मधु आई, जिसने शन्नो और कर्ज से दबी कई महिलाओं के साथ मिलकर "महिला शक्ति " नामक संस्था बनाईl
जिसके माध्यम से गरीबों और किसानों का जीवन बेहतर हो lसके।"
हर महिला के सहयोग से हर महीने थोड़े थोड़े पैसे जमा होने लगे, धीरे धीरे आस पास के गावों में भी महिला शक्ति के समूह बढ़ने लगे, साहूकारों से ली गई उधारी चुकता होने लगी, किसानों को कम ब्याज पर पैसा मिलने लगा l अब महिला शक्ति लोगों को उनकी जरूरत के हिसाब से पैसा देती हैं। पैसा भी वह यह जांचने के बाद देती हैं कि कौन कब कितना पैसा लौटा सकता है, अब तो यह हाल है कि साहूकार भी संस्था से जरूरत पड़ने पर पैसा उधार लेते हैं l
रेखा जोशी
Happy New year
धूम मचाता गाता नाचता नव वर्ष आया
खुशियों से झूम झूम झूमता नव वर्ष आया
नये वर्ष का कर रहे हैं स्वागत सभी मिलकर
है ठंड से ठिठुरता कांपता नव वर्ष आया
रेखा जोशी