Wednesday, 31 July 2013

गरीब की भूख

गरीब की भूख

मैली कुचैली फटी पुरानी धोती में माला अपने नंग धडंग एक साल के बच्चे को गोदी में लिए एक शादी के विशाल  पंडाल  के पीछे अपने सीने से चिपकाए बैठी थी ,दो दिन की भूखी माला को आज पेट भर के खाना मिलने वाला था  l पंडाल के सामने लम्बी गाडियों का आना जाना शुरू चुका  था और माला ललचाई आँखों से उस भव्य पंडाल को निहार रही थी l रंग बिरंगे कपड़ों में सज धज कर तरह तरह के लोग पंडाल के भीतर प्रवेश कर रहे थे ,गीत संगीत के साथ माहौल रंगीन बना हुआ था ,कई मन के काले सफेदपोश सत्ता के भूखे तो कई मनचले युवक सुंदर चेहरों को देख अपनी आँखों की भूख मिटाने के लिए पंडाल में जा रहे थे ,लेकिन  माला को तो वहां पक रहे स्वादिष्ट व्यंजनओं की भीनी भीनी खुशबू परेशान कर रही थी जो  उसके पेट की आग को और भड़का रही थी l हाय यह भूख भी कितनी नामुराद है  ,क्या क्या नही करवाती ,कोई तो पापी पेट की खातिर गुनाह के रास्ते को अपना लेता है तो कोई भीख मांगने पर मजबूर हो जाता है तो कोई पापी पेट की खातिर पैसे कमाने के चक्कर में जिंदगी भर भटकता ही रहता  है इस दुनिया में  हर कोई पागल बना  किसी न किसी तरह की भूख के पीछे भटक रहा है,लेकिन किसी गरीब से पूछ कर देखो कि  भूख किस बला का नाम हैl  न जाने कितनी तक देर माला वही बैठी रही ,तभी पंडाल के बाहर जूठी प्लेटों से भरे हुए बड़े बड़े टब आने लगे  ,माला वहां से फुर्ती से उठी और भाग कर उन टबों के पास पहुंच गई ,वह जल्दी जल्दी लोगों का बचा हुआ जूठा खाना इकट्टा करने लगी l आज  उसने अपने घर जा कर अपने घरवालों के साथ मिल कर पार्टी मनानी थी वह जूठन इकट्ठा करने में इतनी व्यस्त थी की उसे आभास ही नही था कि उसके साथ साथ एक कुत्ता भी जूठी प्लेटे चाट रहा था ,हाय री  विडम्बना गरीब की भूख उसे किस हद तक गिरा   देती है ,पेट की अग्नि को शांत करने के लिए वह कितना मजबूर हो जाता है |

रेखा जोशी

Tuesday, 30 July 2013

सावन

घिर आये बदरा सखी छाई घटा घनघोर है
रिम  झिम बरसे सावन की मधुर फुहार है
बन बदली उमड़ पड़ी आँखों से बिरहन  के
मधुर नही फुहार यह अगनकणों की धार है


Saturday, 27 July 2013

तारों की बरात

तारों की बरात

ऊँचे ऊँचे पेड़ों पर हसीं शब ने ली अंगड़ाई है ,
दिल को थाम लो यारो तारों की बरात आई है |
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मस्ती का आलम है दिल में बजती शहनाई है ,
हुस्न तेरा है और प्यार मेरा दुहाई है दुहाई है |
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लहरें प्यार भरी जब से इस दिल में लहराई है ,
लहराती हुई इन लहरों में मेरे प्यार की गहराई है
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दिल दीवाने मत जाना उधर वह इक परछाई है ,
धोखा और फरेब यहाँ पर हरपल देता रुसवाई है |
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आंसू मत बहाना तुम पल दो पल की जुदाई है ,
अच्छा तो अब चलते है घड़ी विदा की आई है |

रेखा जोशी 



Thursday, 25 July 2013

मन मंदिर

ढूँढ़ते  प्रभु हम सब  तुझे कहाँ  कहाँ 
बसाया  तुम्हे  अपने   दिल  में यहाँ
मन को ही हमने मंदिर  बना लिया 
आरती   उतारते  सुबह   शाम  वहाँ

रेखा जोशी 


Tuesday, 23 July 2013

चाहत

चाहत
तुम्हारी चाहत लिए  हम पल पल मरते रहे
जीने  की  तमन्ना दिल में लिए तड़पते  रहे
दिन का सुकून और रातों  की नींदे  उड़ गई
अनजान बने  तुम्ही इस दिल में धड़कते रहे

मुक्तक

कभी रूकती नही बस चलती ही जाती है जिंदगी
घूमे सदा वक्त का पहिया चाहे बेबस हो जिंदगी
तलाश  सबको यहाँ बस खुशियों ही खुशियों की
सुख  हो याँ दुःख सब पीछे छोड़ जाती है जिंदगी

रेखा जोशी 

और चाँद छुप गया [बाल कथा ]

और चाँद छुप गया [बाल कथा ]


आज चाँद बहुत खूबसूरत  दिखाई दे रहा था ,उसे देखते ही पिंकी उछलने लगी और राजू को आवाज़ दे कर बुलाने लगी ,''देखो भैया आसमान में चाँद कितना बड़ा और सुंदर दिखाई दे रहा है l ''अपनी छोटी बहन की आवाज़ सुन राजू भी चाँद को देखने लगा ,''अरे मेरी प्यारी बहना ,आज पूर्णिमा है और चन्द्र  ग्रहण भी है ,बस अभी कुछ देर में चाँद पर हमारी धरती की छाया पड़ने वाली है l''पिंकी ने हैरानी से राजू की तरफ देखते हुए पूछा ,''यह चन्द्र ग्रहण क्या होता है भैया ,बताओ न ?''देखो पिंकी तुम आसमान को देखती रहो , बस अभी कुछ समय बाद   हमारी धरती सूरज के गिर्द घूमते घूमते सूरज और चाँद के बीच एक सीधी रेखा में आ जाए गी और तब सूरज की रौशनी धरती के एक हिस्से पर पड़ेगी उसकी परछाई धीरे धीरे पूरे चाँद को ढक लेगी और उसे पूर्ण ग्रहण लग जायेगा ,वैसे अगर धरती की छाया पूरे चाँद को न ढककर उसके कुछ हिस्से को ढके तो उसे खंड चन्द्र ग्रहण कहते है ,लेकिन आज तो धरती की छाया  पूरे चाँद पर पड़ने वाली है l'' ''हाँ भैया देखो चाँद पर धरती की गोलाकार छाया पड़ने लगी है ''पिंकी जोर से चिल्लाई,क्या भैया यह छाया पूरे चाँद को छुपा देगी और फिर पूरा अँधेरा हो जाएगा ,''हाँ मेरी बहना तुम देखती रहो अब चाँद धीरे धीरे धरती की परछाई के कारण छुप रहा है ''पिंकी बहुत घबरा कर बोली ''भैया क्या चाँद छिपने के बाद फिर कभी भी दिखाई नही देगा ?'' ''नही नही पिंकी डरने की कोई बात नही ,बस जैसे ही  धरती और चाँद घूमते हुए एक सीधी  रेखा से हट कर अपना स्थान बदल लेंगे चाँद हमे फिर से दिखाई देने लगेगा l''आसमान की ओर हैरानी से देखते हुए पिंकी और राजू दोनों के सामने ही चाँद धरती की परछाई में छुप गया l