Thursday, 24 October 2013

उसका नसीब यही है

मार 
महंगाई की 
झेल रहे हम 
जब प्याज़ 
अस्सी रू 
और 
चालीस की 
मेथी 
पर बेचारा 
गरीब दुखिया
क्या खाए 
कहाँ रहे 
पेट भर 
भोजन नही 
रहने को 
छत नही 
सोच रहा
सडक किनारे
लेट कर 
बेचारा  
यूँही दुःख
झेलने है
क्या उसे 
उम्र भर 
उसका नसीब
यही है 
याँ 
है फिर 
कुछ और ,,,,,,,,,,,

रेखा जोशी 

Wednesday, 23 October 2013

दुत्कार


किसी चौराहे की 
लाल बत्ती पर 
पिघलने लगता 
है यह मन 
गंदे बिखरे बाल 
हाथ में गंदा 
फटा कपड़ा 
और कार का 
शीश पोंछते 
दो नन्हे से हाथ 
आखों में लाचारी 
बेबस निगाहें 
मांग रही 
कुछ सिक्के 
दौलत वालों से 
लेकिन उन्हें 
लम्बी लम्बी गाड़ी 
में बैठे लोगों से 
जब मिलती है 
 दुत्कार 

रेखा जोशी 

हसरतें

करने दे पूरी अपनी हसरतें मुझे 
भरने दे जिंदगी में सुंदर रंग मुझे 
व्याकुल हूँ छूने को आसमान अब 
बांधना मत बंधन में अब तुम मुझे

रेखा जोशी

Tuesday, 22 October 2013

हमारी यह जिंदगी

पल पल यूँ ही गुज़र जाती है हमारी यह  जिंदगी
छोड़ पुराना नये पल में ढल जाती है यह जिंदगी
जीतें  है यहाँ हम सब ख़ुशी और गम के अनेक पल
पल पल में छुपी मौत है याँ हँसती है यह जिंदगी

रेखा जोशी

Sunday, 20 October 2013

प्रियतम मेरे

प्रियतम मेरे 
फिर वही शाम वही तन्हाई 
दिल में मेरे वही दर्द ले कर आई 
....................................

प्रियतम मेरे 
ढूँढ़ रही है बेचैन निगाहें 
कहाँ खो गये दुनिया की भीड़ में
......................................

प्रियतम मेरे
मजनू बना प्यार में तेरे 
आईना भी नही पहचानता मुझे
............................................

प्रियतम मेरे 
दर्देदिल ने कुछ ऐसा किया 
हो गया मै तुम्हारा उम्र भर के लिए
......................................... 

प्रियतम मेरे
हो न जाऊं कहीं पागल मै 
स्वाती अमृत की बूंद मुझे दे 

रेखा जोशी 

Saturday, 19 October 2013

सपने

सपने 
देखे थे जो कभी 
तेरी मेरी आँखों ने 
हो रहे पूरे आज 
इक घरौंदा बना कर 
प्रेम से उसे 
सजाया मिल कर 
कब कैसे हो गये 
वह तेरे सपने 
यह मेरे सपने 
बँट गए वह 
अपने अपने में  
खुली अखियाँ 
गुम हो गए कहीं 
बंद आँखों से 
देखे थे जो कभी 
वह सुन्दर प्यारे 
सपने 

रेखा जोशी 

शरद पूर्णिमा पर सभी मित्रों को हार्दिक शुभकामनाएँ

शरद पूर्णिमा पर सभी मित्रों को हार्दिक शुभकामनाएँ 

धरती पर हूँ मै और शरद का चाँद आसमां पर 
है लेती अंगड़ाईयाँ दुधिया चांदनी यहाँ पर 
है संग तुम्हारा और ठंडी हवा के झोंकों से 
महकने लगा रात की रानी से आंगन यहाँ पर

रेखा जोशी