Thursday, 13 November 2014

धारा वक्त की बहना है ज़िंदगी


रुक जाना  नही चलना है ज़िंदगी
हर कदम आगे  बढ़ना  है ज़िंदगी
तलाश है यहाँ पर खुशियों की हमें
धारा वक्त  की  बहना  है ज़िंदगी

रेखा जोशी


कट जायेगा जीवन तुम बिन


ख्यालों  में अब  मत आना तुम
रातो    में  मत   तड़पाना   तुम
कट  जायेगा  जीवन  तुम बिन
मत फिर अफ़सोस मनाना तुम

रेखा जोशी

Wednesday, 12 November 2014

बैरी जन्म जन्म का

आँखों में भर कर
अश्क
जी रहे है यह
अभिशप्त ज़िंदगी
न जाने कब से
सौंप दिया जिसे
अपना सब कुछ
चाहा था जिसे
दिल ओ जान से
लेकिन
निकला वह बैरी
जन्म जन्म का
किया ज़ख्मी दिल
हमारा
कदम कदम पर
टूट चुके अब
तार दिल के
रूठ  चुका अब
संगीत
ज़िंदगी का
जिये जा रहे
फिर भी
न जाने क्यों

रेखा जोशी





कैसे रह पायें अनजान हम तुम

दो जिस्म मगर हैं इक जान हम तुम
कैसे   रह   पायें  अनजान   हम  तुम
आओ   करते   मिल  प्यार की  बाते
करें  इक  दूजे  का  सम्मान हम तुम

रेखा जोशी 

Tuesday, 11 November 2014

हाइकु [सूरज पर ]

हाइकु  

है भोर भई
क्षितिज पे सूरज
नभ सिंदूरी
………
गोला आग का
अवतरित हुआ
फैला उजाला
…… ...
मिले जीवन
वरदान धरा को
सम्पदा वन
………
प्राणदायक
शक्तिपुंज भास्कर
जीवनदाता
..........…
करे प्रदान
अरुण की किरणे
शीतल चाँद

रेखा जोशी

खुशबू से उसकी महकने लगा अंगना मेरा

नन्ही परी के आने से खत्म हुई तन्हाईयाँ 
गुनगुनाने लगी गीत अब मेरी खामोशियाँ 
खुशबू से उसकी महकने लगा अंगना मेरा 
गूँजने लगी घर में मेरे उसकी किलकारियाँ 

रेखा जोशी 

उफनती भावनाएँ

उठने लगी आज 
फिर
इक हलचल सी
सीने में मेरे
कसमसाने लगी
उफनती भावनाएँ
था बाँध रखा 
अब तक जिन्हे 
नही रोक पाई मै
जज़्बातों की 
उमड़ती बाढ़ को 
डूब गया मेरा मन 
आज 
तोड़  सब बंधन 
उमड़ पड़ी 
फिर
नैनो से मेरे
वही पगली बाँवरी 
अविरल अश्रुधारा

रेखा जोशी