Monday, 29 August 2016

चांदनी रात है कहाँ हो तुम


शौक से आप दिल यहाँ रखिए 
प्यार में आप बस वफा रखिए

...
चाँद भी आज ढूँढता तुम को 
रात तेरे लिए सजा  रखिए
....
बात दिल की किसे बताए हम
दर्द दिल मे सदा छुपा रखिए
....
साथ तेरा हमें मिला साजन 
आस से यूँ  भरा जहाँ रखिए 
... 
चांदनी रात है कहाँ हो तुम 
खूबसूरत यहाँ फ़िज़ा  रखिए 

रेखा जोशी 

मन ही देवता मन ही ईश्वर

मन ,जी हाँ मन ,एक स्थान पर टिकता ही नही पल में यहाँ तो अगले ही पल न जाने कितनी दूर पहुंच जाता है ,हर वक्त भिन्न भिन्न विचारों की उथल पुथल में उलझा रहता है ,भटकता रहता है यहाँ से वहाँ और न जाने कहाँ कहाँ ,यह विचार ही तो है जो पहले मनुष्य के मन में उठते है फिर उसे ले जाते है कर्मक्षेत्र की ओर । जो भी मानव सोचता है उसके अनुरूप ही कर्म करता है ,तभी तो कहते है अपनी सोच सदा सकारात्मक रखो ,जी हां ,हमें मन में उठ रहे अपने विचारों को देखना आना चाहिए ,कौन से विचार मन में आ रहे है और हमे वह किस दिशा की ओर ले जा रहे है ,कहते है मन जीते जग जीत ,मन के हारे हार ,यह मन ही तो है जो आपको ज़िंदगी में सफल और असफल बनाता है ।
ज़िंदगी का दूसरा नाम संघर्ष है ,हर किसी की ज़िंदगी में उतार चढ़ाव आते रहते है लेकिन जब परेशानियों से इंसान घिर जाता है तब कई बार वह हिम्मत हार जाता है ,उसके मन का विश्वास  डगमगा जाता है और घबरा कर वह सहारा ढूँढने लगता है ,ऐसा ही कुछ हुआ था सुमित के साथ जब अपने व्यापार में ईमानदारी की राह पर चलने से उसे मुहं की खानी पड़ी ,ज़िंदगी में सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ने की जगह वह नीचे लुढ़कने लगा ,व्यापार में उसका सारा रुपया डूब गया ,ऐसी स्थिति में उसकी बुद्धि ने भी सोचना छोड़ दिया ,वह भूल गया कि कोई उसका फायदा भी उठा सकता ,खुद पर विश्वास न करते हुए ज्योतिषों और तांत्रिकों के जाल में फंस गया ।
जब किसी का मन कमज़ोर होता है वह तभी सहारा तलाशता है ,वह अपने मन की शक्ति को नही पहचान पाता और भटक जाता है अंधविश्वास की गलियों में । ऐसा भी देखा गया है जब हम कोई अंगूठी पहनते है या ईश्वर की प्रार्थना ,पूजा अर्चना करते है तब ऐसा लगता है जैसे हमारे ऊपर उसका सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है लेकिन यह हमारे अपने मन का ही विश्वास होता है । मन ही देवता मन ही ईश्वर मन से बड़ा न कोई ,अगर मन में हो विश्वास तब हम कठिन से कठिन चुनौती का भी सामना कर सकते है |

रेखा जोशी 

Sunday, 28 August 2016

बैर भाव त्याग कर ले सब से प्यार

छोटा सा जीवन दिन गिनती के चार
बैर भाव  त्याग  कर ले  सब से प्यार
दीन  दुखी  को  अपने  गले  लगा ले
प्रीत   प्रेम  से  तू    जीवन  ले  सँवार

रेखा जोशी 

Saturday, 27 August 2016

सूरज निकला जब ,है पुष्पित उपवन ,बगिया उड़ी तितली ,खिलती कली कली

हुई रौशनी इधर,उजियारा आसमान,महका आँगन अब, यहाँ बगिया खिली
सूरज निकला जब ,है पुष्पित उपवन  ,बगिया उड़ी तितली  ,खिलती कली कली
दस्तक दी सुबह ने , नभ में उड़ते पंछी ,चिड़िया चहक रही , अब सखियाँ मिली
आया दिवाकर अब   ,हर्षित लालिमा लिये ,आसमान  मुस्कुराया  , पवन मनचली


रेखा जोशी


Friday, 26 August 2016

तुम बिन जी पायेंगे कैसे , तुमसे ही मेरा जीवन

तुम बिन  जी  पायेंगे कैसे  , तुमसे  ही मेरा जीवन
दोनों की इक मंज़िल साथी  तुम ही हो मेरे साजन  
धीरे  धीरे  बन  जायेगी ,तेरी मेरी फिर जोड़ी 
जीतेंगे  हम तब  जग सारा, सबसे प्यारा यह बन्धन 

रेखा जोशी 

हाइकु [बाढ़ पर ]

हाइकु [बाढ़ पर ]

जल प्रलय
टूट गई उम्मीद
बहते घर
...
जाये किधर
मंज़िल न ठिकाना
उजड़ा घर
....
दिल में अग्न
रक्षा करो हमारी
हे  भगवन
....
साथी बिछड़े
कोई नही अपना
ढूंढते उन्हें
...
 पानी बहता
बह गई दुनिया
दिल दुखता
...
रेखा जोशी




Thursday, 25 August 2016

आधार छंद --- चौपाई मात्रा भार --- 16 
मापनी मुक्त
अंत में जगण (121) वर्जित |
अंत में गुरु गुरु ( अर्थात 22 / 1111 / 112 / 211) अनिवार्य |

मुरली मधुर भाये मुरारी
श्याम पर गोपियाँ  बलिहारी
..
मोर पँख  पीताम्बर सोहे
राधा लगे कृष्णा  को प्यारी
..
गोपियों संग रास रचाये
गोकुल में गिरधर  गिरधारी
..
गेंद खेलन ग्वाले आये
कालिया पर कन्हैया भारी
...
माखनचोर माँ को  सताये
कान्हा पर यशोदा वारी

रेखा जोशी