Monday, 28 November 2016

तारों की छाया मेँ मिल के ,आ दूर कहीं अब चल दें हम

प्रदत्त छंद - पदपादाकुलक चौपाई (राधेश्यामी)


जब चाँद छुपा है बादल मेँ, तब रात यहॉं खिल जाती है
घूँघट ओढ़ा है अम्बर मेँ, चाँदनी यहाँ शर्माती है
तारों की छाया मेँ मिल के ,आ दूर कहीं अब चल दें हम
हाथों में हाथ लिये साजन,ज़िन्दगी बहुत अब भाती है
रेखा जोशी

जीवन भर का यह रिश्ता निभायें हम तुम

धरती  अम्बर  पर  उड़ते  साथी हम  तुम 
मिल जुल कर  बाते करते साथी  हम तुम 
गाना   गा   इक  दूजे  का   दिल  बहलाते 
है   पंछी   इक   दूजे  के  साथी  हम  तुम
....
नील  नभ में भरते  उडारी सँग  हम तुम 
ठंडी  हवा  के सँग  सँग  खेलते  हम तुम 
आओ    नाचें   गायें  अब    धूम  मचायें 
जीवन भर का यह रिश्ता निभायें हम तुम 
रेखा जोशी 

Sunday, 27 November 2016

मन ही देवता मन ही ईश्वर[पूर्व प्रकाशित रचना ]

मन ही देवता मन ही ईश्वर

मन ,जी हाँ मन ,एक स्थान पर टिकता ही नही पल में यहाँ तो अगले ही पल न जाने कितनी दूर पहुंच जाता है ,हर वक्त भिन्न भिन्न विचारों की उथल पुथल में उलझा रहता है ,भटकता रहता है यहाँ से वहाँ और न जाने कहाँ कहाँ ,यह विचार ही तो है जो पहले मनुष्य के मन में उठते है फिर उसे ले जाते है कर्मक्षेत्र की ओर । जो भी मानव सोचता है उसके अनुरूप ही कर्म करता है ,तभी तो कहते है अपनी सोच सदा सकारात्मक रखो ,जी हां ,हमें मन में उठ रहे अपने विचारों को देखना आना चाहिए ,कौन से विचार मन में आ रहे है और हमे वह किस दिशा की ओर ले जा रहे है ,कहते है मन जीते जग जीत ,मन के हारे हार ,यह मन ही तो है जो आपको ज़िंदगी में सफल और असफल बनाता है ।

ज़िंदगी का दूसरा नाम संघर्ष है ,हर किसी की ज़िंदगी में उतार चढ़ाव आते रहते है लेकिन जब परेशानियों से इंसान घिर जाता है तब कई बार वह हिम्मत हार जाता है ,उसके मन का विशवास डगमगा जाता है और घबरा कर वह सहारा ढूँढने लगता है ,ऐसा ही कुछ हुआ था सुमित के साथ जब अपने व्यापार में ईमानदारी की राह पर चलने से उसे मुहं की खानी पड़ी ,ज़िंदगी में सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ने की जगह वह नीचे लुढ़कने लगा ,व्यापार में उसका सारा रुपया डूब गया ,ऐसी स्थिति में उसकी बुद्धि ने भी सोचना छोड़ दिया ,वह भूल गया कि कोई उसका फायदा भी उठा सकता ,खुद पर विश्वास न करते हुए ज्योतिषों और तांत्रिकों के जाल में फंस गया ।

जब किसी का मन कमज़ोर होता है वह तभी सहारा तलाशता है ,वह अपने मन की शक्ति को नही पहचान पाता और भटक जाता है अंधविश्वास की गलियों में । ऐसा भी देखा गया है जब हम कोई अंगूठी पहनते है याँ ईश्वर की प्रार्थना ,पूजा अर्चना करते है तब ऐसा लगता है जैसे हमारे ऊपर उसका सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है लेकिन यह हमारे अपने मन का ही विश्वास होता है । मन ही देवता मन ही ईश्वर मन से बड़ा न कोई ,अगर मन में हो विश्वास तब हम कठिन से कठिन चुनौती का भी सामना कर सकते है |
रेखा जोशी 

Saturday, 26 November 2016

न मिलने का बहाना और ही था

1222 1222 122

तिरा साजन  फ़साना और ही था 
न मिलने का बहाना और ही था 
.. 
चले तुम छोड़ कर महफ़िल हमारी 
कभी  फिर रूठ जाना और ही था 
... 
रही हसरत अधूरी प्यार में अब 
वफ़ा हम को दिखाना और ही था 
.... 
शमा जलती रही है रात भर अब
मिला जो वह दिवाना और ही था 
... 
न बदला रूप अपना ज़िन्दगी ने  
जिया  दिल से  ज़माना  और ही था 

रेखा जोशी 

ग़ज़ल

ग़ज़ल

मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन फ़ऊलुन
1222 1222 122
 काफिया आना
रदीफ़ और ही था

तिरा साजन  फ़साना और ही था
न मिलने का बहाना और ही था
..
न जाना छोड़ कर महफ़िल हमारी
तिरा फिर रूठ जाना और ही था
...
रही हसरत अधूरी प्यार में अब
वफ़ा हमसे निभाना और ही था
....
शमा जलती नही है रात भर अब
हमारा वह  ज़माना और ही था
...
बदल कर रूप अपना ज़िन्दगी अब
हमारे  पास  आना  और ही था

रेखा जोशी

Tuesday, 22 November 2016

प्रेम कर ले ज़िन्दगी वरदान है



प्रेम करले ज़िंदगी वरदान  है 
प्रीत सबसे जो करें इंसान है 
..... 
ज़िंदगी में सुख  मिले दुख भी मिले 
नाम प्रभु का जो जपे वह ज्ञान है 
..... 
दीन दुखियों की यहाँ सेवा  करें 
जान वह   प्रभु की यहाँ संतान है 
....... 
ज़िंदगी की डोर उसके हाथ में 
वह निभाता साथ हम  अंजान है 
.......  
हाथ जोडे हम करें वंदन यहाँ 
मुश्किलें जो  समझता भगवान है 

रेखा जोशी 




Friday, 18 November 2016

दर्द ऐ दिल के सिवा कुछ न मिला हमें

खूब  दिया  तुमने  प्यार  का सिला हमें
नहीं  तुमसे  कोई  भी  अब  गिला  हमें 
चैन  न  मिला  साजन  खाते   रहे चोट 
दर्द ऐ दिल के सिवा  कुछ न मिला हमें

रेखा जोशी