Thursday, 13 December 2012

नारी तेरी वही कहानी



नारी तेरी वही कहानी सीने में ममता आँखों में पानी |
सदियों से यूं ही सहती आई फिर भी रही तुम बेगानी ||
प्रेम से बांधा इस जग को ममता आँखों से छलका के
प्रीत के बदले इस दुनिया से आखिर क्या पाया तुमने
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जन्म दाती जग की और उसी से तुझे दुःख दर्द मिला
सारे रिश्ते नाते भूला कर बेबस अबला का नाम दिया
फिर भी तुमने बन कर धरा सहशीलता से काम लिया
खुद मिटा के अपने तन को उसको तुमने परिवार दिया
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पूजते है माँ दुर्गा को सब औ नारी का तिरस्कार किया
कूचे बाजारों औ गलियों में क्यों उसका अपमान किया
खतरे में है  उसकी अस्मिता क्यों  ऐसा व्यवहार किया
मार कर कोख में उसे मर्दानगी का कैसा इज़हार किया
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वक्त रहते संभल जायो होश में आयो न हो जाये देर
पछताते रह जायोगे  जब चिड़िया ने चुग लिया खेत
रह जायोगे ठूठ तुम अकेले न होगी जब नारी से भेंट
है स्वर्ग वहीं धरती पर होती सम्मानित बहू बेटी देख