Sunday, 9 December 2012

धर्मान्धता में बंधे हम लोग

जब से मनुष्य इस धरती पर आया है तभी से यहाँ कई देवी देवताओं का भी आगमन हो गया ,जिसे स्वयं मानव ने ही आमंत्रित किया है,भयभीत होना तो मानव के स्वभाव में समाया हुआ है  ,बारिश तूफ़ान से डर गए तो इंद्र देवता की पूजा शुरू हो गई ,आग से डर लगा तो अग्नि देवता क्रोधित हो गए | कालान्तर ऐसे कई देवी देवताओं को मनुष्य अपने भीतर के भय को मिटाने के लिए उन्हें पूजने लगा ,शायद मानव अपने अंदर समाये भय के कारण ही ईश्वर के अस्तित्व को मानने लगा और शायद उसके इसी भय ने ही उसे धर्मान्ध भी बना दिया है | धर्म हमारी जीवन शैली का मूल आधार है ,हमारा हिन्दू धर्म हमे जिंदगी जीने का सही मार्ग दिखाता है ,इस में कोई दो राय नही कि हमारे जीवन में व्याप्त विपरीत परस्थितियों में धर्म ही हमे सशक्त संबल प्रदान करता है ,ईश्वर के प्रति हमारी आस्था से हमारे मनोबल में वृद्धि होती है जो विषम से विषम परिस्थिति का सामना करने की हमें हिम्मत देती है ,लेकिन जब हम अपना विवेक छोड़ अंधाधुंध धर्म का अनुसरण करने लगते है तब मानव धर्म के मार्ग पर न चल कर अधर्म की राह पर चलना शुरू कर देता  है ,मानवीय न हो कर अमानवीय बन जाता है | अभी  हाल ही में विभिन्न अखबारों की सुर्ख़ियों और टेलीविजन के सभी चेनल्स पर एक खबर काफी चर्चा में रही ,आयरलैंड में भारतीय मूल की एक महिला दन्त चिकित्सक सविता हलपन्नवार की मौत जिसे कैथोलिक धर्मान्धता के कारण बलि पर चढ़ा दिया गया ,उसने अपने प्राण इसलिए खो दिए क्योंकि डाक्टर उसके गर्भ में पल रहे बच्चे को गिराने के लिए मना कर रहे थे। यह जानते हुए भी कि सविता की  प्रेगेनेंसी उसकी जान के लिए खतरा हो सकती है ,वहां के चिकित्सकों  ने गर्भपात के लिए मना कर दिया वह इसलिए क्योंकि कैथोलिक धर्म गर्भपात की इजाजत नहीं देता। इस धर्म के अंतर्गत जीवित भ्रूण को मारना अक्षम्य पाप है,उनके अनुसार जब तक बच्चे का दिल धड़कता रहता है वह गर्भपात नही कर सकते ,जब कि उनके सामने सुनीता तिल तिल कर के मर रही थी ,उसके जिस्म में नितन्तर जहर फैल रहा था और वह बार बार वहां के डाक्टरों से अपने जीवन की  गुहार लगा रही थी ,''मुझे यह बच्चा नही चाहिए मै मर रही हूँ ,मुझे बचा लो ,''उसने यह भी कहा कि वह कैथोलिक नही बल्कि हिन्दू धर्म को मानती है और हिन्दू धर्म में किसी के भी प्राण सबसे अधिक मूल्यवान है लेकिन धर्मान्धता में बंधे उस अस्पताल के डाक्टर जैसे बहरे हो गए थे,किसी ने भी उसकी फ़रियाद को नही सुना और उस बेचारी ने धर्म में अंधे कानून के चलते तड़प तड़प कर अपने पति और जीवन देने वाले डाक्टरों के देखते ही देखते अपने प्राणों की आहुति दे दी,कुछ इस प्रकार की घटना आयरलैंड में बीस वर्ष पहले भी हुई थी जब बलात्कार से पीड़ित एक अविवाहित लडकी अपने बच्चे को पैदा नही करना चाहती थी लेकिन इस अंधे कानून के चलते डाक्टरों ने उसके बच्चे को गिराने से इनकार कर दिया था,उस बेचारी लडकी ने बिन ब्याही माँ बन कर अपमानित जिंदगी जीने से बेहतर विकल्प अपनाया और आत्महत्या कर इस दुनिया को ही सदा के लिए अलविदा कह दिया  | वह मासूम लड़की धर्मान्धता से बंधे उनके अंधे कानून की बलि चढ़ गई थी ,उसकी मौत के बाद भी इस कानून में कोई सुधार नही किया गया|यह केवल एक देश की घटना नही बल्कि हमारे भारत सहित पूरी दुनिया में ऐसी अनेक घटनाएँ होती रहती है जो खबरों की सुर्खियाँ नही बन पाती , कई लोग आँखों पर धर्म का चश्मा चढ़ा कर न जाने कितने ही ऐसे काम करते है जो धर्म पर नही धर्मान्धता पर आधारित होते है | इतिहास गवाह है कि धर्मान्धता में बंधे कई लोगों  ने न जाने कितने ही मासूमों की बलि ली है ,कितनो की जिंदगी तबाह करके रख दी , जबकि ईश्वर की नजर में सभी जन बराबर है,हमारे वेदों में भी यही लिखा है ''मानव बनो, ''वह इसलिए कि मानवता ही श्रेष्ठ धर्म है और हर धर्म की शिक्षा मानव कल्याण के लिए है,धर्म मनुष्य को अधात्मिक उत्थान की ओर ले कर जाता है न कि धर्मान्धता की ओर ,धर्म के नाम पर किसी की जान लेना अन्याय ही नही जघन्य पाप भी है |