Monday, 17 December 2012

पिया के घर

सात समुद्र पार कर,
आई पिया के द्वार ,
नव नीले आसमां पर,
झूलते इन्द्रधनुष पे  ,
प्राणपिया के अंगना ,
सप्तऋषि के द्वार ,
झंकृत हए सात सुर,
हृदय में  नये तराने |
.........................
उतर रहा वह नभ पर ,
सातवें आसमान  से ,
लिए रक्तिम लालिमा
सवार सात घोड़ों पर ,
पार सब करता हुआ ,
प्रकाशित हुआ ये जहां
अलौकिक , आनंदित
वो आशियाना दीप्त
...............................
थिरक रही अम्बर में ,
अरुण की ये रश्मियाँ,
चमकी धूप सुनहरी सी
अब आई  मेरे अंगना ,
है स्फुरित मेरा ये मन ,
खिल उठा ये तन बदन
निभाने वो सात वचन ,
आई अपने पिया के घर |