Thursday, 4 December 2014

तलाश रही तुम्हे

वीरान यह दिल 
बिन तुम्हारे 
है मालूम
नही आओगे तुम 
फिर भी 
न जाने  क्यों 
इंतज़ार है तुम्हारा 
महक रहे 
यह हसीन लम्हे 
और 
गुनगुनाती हुई 
यह सुहानी शाम 
बुला रही तुम्हे 
अब तो 
चाँद भी उतर आया 
अंगना में मेरे 
गुम है यह दिल 
यादों में तेरी 
और 
तलाश रही तुम्हे 
मेरी भीगी ऑंखें

रेखा जोशी 

हमारी है संस्कृति

गुरु महिमा
हमारी है संस्कृति
करें  सत्कार
………
राम भरत
भाई भाई सम्मान
प्रेम मिलाप
………
कृष्ण सुदामा
मित्रता का बंधन
स्नेह अपार
…………
माँ बाप नेह
है श्रवण कुमार
बेटा इधर
............. …
भाई बहन
है प्यार का बंधन
रक्षाबंधन

रेखा जोशी

मिल साथ हमें करनी सब दूर बुराईयाँ

मापनी- 221 1222 221 1222 


अब राह अमन पर चल कर देश बनाना है 
अब   प्यार   हमारे  ने  संसार  सजाना  है 
मिल साथ  हमें  करनी  सब  दूर  बुराईयाँ 
अब  दीन दुखी सब को इन्साफ दिलाना है 

रेखा जोशी 




Wednesday, 3 December 2014

हाइकु [दहेज अभिशाप ]

हाइकु [दहेज अभिशाप ]

बेटा अपना
बेटी पराया धन
दान कन्या का
………....
छूटा मायका
दहेज अभिशाप
रोती चूड़ियाँ
…………
टूटे सपने
जल रही दुल्हनें
छूटे अपने
..........…
माथे बिंदिया
मेहंदी भरे हाथ
रोती अखियाँ
…………
बहू बिटिया
बदलता समाज
प्यारा संसार

रेखा जोशी


तड़प रही है जिंदगी मेरी

ओ मेरे खुदा मेरी आवाज़ सुन
लब पे आई है जो फरयाद तो सुन
तड़प रही है  जिंदगी मेरी
भर दे इसमें अपने प्यार की धुन

रेखा जोशी 

रिमझिम रिमझिम बरसती घनघोर घटायें

झूला  झूलती  सखियाँ  लो  आया सावन
बरसात  लाई  खुशियाँ  लो  आया सावन
रिमझिम रिमझिम बरसती घनघोर घटायें
धड़काये   मेरा  जिया   लो  आया  सावन

रेखा जोशी 

Tuesday, 2 December 2014

हो सवार सात घोड़ों के रथ पर भानु देव

हर सुबह  सुनहरी रश्मियाँ बिखेर देता है
हटा तम जगत को वह प्रकाशित कर देता  है
हो सवार सात घोड़ों के रथ पर  भानु देव
कण कण में धरा  के नवजीवन भर देता है

रेखा जोशी