Saturday, 4 April 2015

आता दिवाकर लिये हर दिन उम्मीद नई



पल पल यूँ ही  हमारी  गुज़रती  ज़िंदगी 

हर पल यहाँ  नये पल में ढलती ज़िंदगी 

आता दिवाकर लिये हर दिन उम्मीद नई 

रोशनी  दामन   हमारे   भरती  ज़िंदगी 


 रेखा जोशी 

फूल खिलते उपवन में महक उठा संसार

सुमन पर  भँवरा डोले   है  चहुँ  ओर   बहार
छटा   रंगीन   बिखेरे   चलती  मस्त  बयार
कुहुकती   कोयलिया  पँछी  चहके डाल डाल
फूल  खिलते  उपवन में   महक  उठा संसार

रेखा जोशी

Friday, 3 April 2015

तन्हा

संघर्ष है यह जीवन
कब गुज़रा बचपन
याद नही
आया होश जब से
भाग रहा तब  से
संजों रहा  खुशियाँ
सब के लिए
थे  कुछ अपने
कुछ थे पराये
आज निस्तेज
बिस्तर पर पड़ा देख रहा
समझ रहा
अपनों और परायों को
था कल भी
और
हूँ आज भी
संघर्षरत
तन्हा सिर्फ तन्हा

रेखा जोशी




Thursday, 2 April 2015

जुदाई प्यार में साजन मिली जब

वक्त  ने  साथ  अब छोड़ा हमारा 
रहेगा  दिल   सदा   तन्हा  हमारा 
जुदाई प्यार में साजन मिली जब 
खत्म अब हो गया किस्सा हमारा 

रेखा जोशी 

Wednesday, 1 April 2015

चौपाइयाँ


जय गोपाला  जय जय  रामा  । राम नाम घट घट में बसता
राम का नाम तारे सबको । राम का नाम सुमिरन कर लो ॥ 

नभ पर किसने रंग भरें है ।  आसमान में दीप जड़ें है॥ 
चंदा  सूरज   घूम रहे है     ।  आसमान  में झूम रहे है ॥ 

उपवन महका सुमन रहे है । भंवरे गुंजन कर रहे है
छाई बगिया  में  बहार है    । दिल में भी छाया खुमार है

है रंगीन छटायें छाये  ।    मन को मेरे  बहुत लुभायें॥ 
मोह लेते दिलकश नज़ारे।  खिली यहाँ मदमस्त बहारें॥ 

अपने  ह्रदय राम  बिराजिये । गुणगान प्रभु का ही कीजिये ॥ 
झोली भर भर सब है पायें  । खाली हाथ कोई न जाये 

रेखा जोशी 


ढलते ही शाम के छिप गये सब नज़ारे


ढलते ही शाम के छिप गये सब नज़ारे 
टिमटिमाने लगे नभ  में  असंख्य तारे 
आसमान में लहराया आँचल निशा ने 
जगमगाने  लगे गगन में चाँद सितारे 

रेखा जोशी 


समाये कण कण में तुम ही तुम भगवान

लेना   तेरा   नाम   सुबह  शाम  कर  दिया
अपना  सब  कुछ  अब  तेरे नाम कर दिया
समाये  कण  कण में तुम ही तुम भगवान
प्रभु चरण पर शीश झुका प्रणाम कर दिया

रेखा जोशी