Tuesday, 6 June 2017

है मीत बहुत मिले हमे इस अजीब ओ गरीब दुनिया में

है  मीत बहुत मिले हमें  इस अजीब ओ गरीब दुनिया में
मिला  न हमे   ऐसा  कोई  बने  मेरा  नसीब   दुनिया मे
आज से ,अब से,अभी अभी से,मुझे  तुम्हारा प्यार कबूल
तेरे  सिवा कोई  भी न आया दिल  के करीब  दुनिया में

रेखा जोशी

Saturday, 3 June 2017

वक्त  की धारा  में सदा  बहता जीवन
कहीं दुख के सागर  में  डूबता जीवन
आओ जियें हर ऋतू हर मौसम हम यहाँ
कहीं गागर ख़ुशी से यह भरता जीवन
,
है  शतरंज  की  बिसात  पर  टिकी यह ज़िन्दगी
सोच समझ चलना घात पर टिकी  यह  ज़िन्दगी
न   जाने  कब  चल  दे   कोई    टेढ़ी  चाल  यहां
हमारी शह और  मात पर   टिकी  यह  ज़िन्दगी

रेखा जोशी

Friday, 2 June 2017

न करना कभी अभिमान से तुम प्यार
अपने जीवन  को तुम  लो अब सँवार
तर   जायेगा   इस   जग  से  तू  बन्दे
काम  क्रोध  मद  लोभ का कर संहार

रेखा जोशी

तुमसे  मिले  प्रियतम  हमे जमाना हो गया
प्यार हमारा अब सजन अफसाना हो गया
क्यों अकेले  गये   छोड़   हमें परदेश पिया
रोका  दिल को  कमबख्त दीवाना हो गया

रेखा जोशी

Thursday, 1 June 2017

सुहाना मौसम औऱ नदी का किनारा

सुहाना   मौसम और नदी का किनारा
बहारों   ने   पिया   नाम   तेरा पुकारा
आंखों से हमारी प्यार पढ़ लो  साजन
शायद मिले न फिर यह मौका दोबारा

रेखा जोशी

कैसे जियेंगे मिलकर जहाँ में हंसते हुए

कैसे  जियेंगे  मिलकर जहाँ  में हँसते हुए
टूट जायेंगे  हम  ज़िन्दगी  यह  सहते हुए
बीत जायेगी यह ज़िन्दगी हमारी इक दिन
कभी  दुआ तो कभी बद्दुआ से लड़ते हुए

रेखा जोशी

मुक्तक

है  शतरंज  की  बिसात  पर  टिकी यह ज़िन्दगी
सोच समझ चलना घात पर टिकी  यह  ज़िन्दगी
न   जाने  कब  चल  दे   कोई    टेढ़ी  चाल  यहां
हमारी शह और  मात पर   टिकी  यह  ज़िन्दगी

रेखा जोशी