है मीत बहुत मिले हमें इस अजीब ओ गरीब दुनिया में
मिला न हमे ऐसा कोई बने मेरा नसीब दुनिया मे
आज से ,अब से,अभी अभी से,मुझे तुम्हारा प्यार कबूल
तेरे सिवा कोई भी न आया दिल के करीब दुनिया में
रेखा जोशी
है मीत बहुत मिले हमें इस अजीब ओ गरीब दुनिया में
मिला न हमे ऐसा कोई बने मेरा नसीब दुनिया मे
आज से ,अब से,अभी अभी से,मुझे तुम्हारा प्यार कबूल
तेरे सिवा कोई भी न आया दिल के करीब दुनिया में
रेखा जोशी
वक्त की धारा में सदा बहता जीवन
कहीं दुख के सागर में डूबता जीवन
आओ जियें हर ऋतू हर मौसम हम यहाँ
कहीं गागर ख़ुशी से यह भरता जीवन
,
है शतरंज की बिसात पर टिकी यह ज़िन्दगी
सोच समझ चलना घात पर टिकी यह ज़िन्दगी
न जाने कब चल दे कोई टेढ़ी चाल यहां
हमारी शह और मात पर टिकी यह ज़िन्दगी
रेखा जोशी
न करना कभी अभिमान से तुम प्यार
अपने जीवन को तुम लो अब सँवार
तर जायेगा इस जग से तू बन्दे
काम क्रोध मद लोभ का कर संहार
रेखा जोशी
तुमसे मिले प्रियतम हमे जमाना हो गया
प्यार हमारा अब सजन अफसाना हो गया
क्यों अकेले गये छोड़ हमें परदेश पिया
रोका दिल को कमबख्त दीवाना हो गया
रेखा जोशी
सुहाना मौसम और नदी का किनारा
बहारों ने पिया नाम तेरा पुकारा
आंखों से हमारी प्यार पढ़ लो साजन
शायद मिले न फिर यह मौका दोबारा
रेखा जोशी
कैसे जियेंगे मिलकर जहाँ में हँसते हुए
टूट जायेंगे हम ज़िन्दगी यह सहते हुए
बीत जायेगी यह ज़िन्दगी हमारी इक दिन
कभी दुआ तो कभी बद्दुआ से लड़ते हुए
रेखा जोशी
है शतरंज की बिसात पर टिकी यह ज़िन्दगी
सोच समझ चलना घात पर टिकी यह ज़िन्दगी
न जाने कब चल दे कोई टेढ़ी चाल यहां
हमारी शह और मात पर टिकी यह ज़िन्दगी
रेखा जोशी