Wednesday, 7 February 2018

है जब तक इस जीवन में सांस

टूटी   नहीं  ज़िन्दगी  से  आस
है जब तक इस जीवन में सांस
तन  से गर  लाचार  हैं  तो क्या
हमें  खुद  अपने पर है  विश्वास

रेखा जोशी

बगिया में फूलों को मुस्कुराते देखा


बगिया  में फूलों को मुस्कुराते  देखा
भँवरों को भी गुन गुन गुनगुनाते देखा
,
कुहुक रही  कोयलिया यहाँ डार डार
तितली  को  भी उत्सव  मनाते  देखा
,
छाई  बहार भर लो आंचल में खुशी
मुस्कुराती   उमंगों   को   गाते  देखा
,
छिड़े   दिल  के  तार  पुकारती बहारें
दिल की धड़कन को खिलखिलाते देखा
,
नाच रही सखियाँ झूम झूम अंगना
मस्ती   में   झूमते   लहराते   देखा

रेखा जोशी

    

Monday, 5 February 2018

मुक्तक

हाल दिल का किसी से कहा नहीं जाता
बिना बताये  भी  अब  रहा  नहीं  जाता
कब  तक  उठाएँ गे हम बोझ जीवन का
दर्द  अब  और  हमसे  सहा  नहीं जाता

रेखा जोशी

Friday, 2 February 2018

फूल  देख भँवरे को गुनगुनाना आ गया

फूल  देख भँवरे को गुनगुनाना आ गया
महफिल  में तेरी  यहाँ  दीवाना आ गया
जलने की परवाह नहीं पगला  है वह तो
शमा पर मर मिटने को परवाना आ गया

रेखा जोशी

Thursday, 1 February 2018

तुम मिले ज़िन्दगी को सहारा मिला

गीतिका

तुम मिले ज़िन्दगी को सहारा मिला
डूबती नाव को  इक किनारा मिला
,
साथ तेरा मिला हर खुशी है मिली
अब  हमें  खूबसूरत  नज़ारा मिला
,
आ  गए  ज़िन्दगी में हमारी सजन
आपका साथ रब का इशारा मिला
,
साथ  तकदीर  ने  है दिया ज़िन्दगी
प्यार हमको पिया अब हमारा मिला
,
थी  अँधेरी  पिया  रात  काली बहुत
दूर  अंबर सजन इक सितारा मिला

रेखा जोशी

ग़ज़ल

प्यार तुमसे है किया हमने निभाने के लिए
छोड़ हमको क्यों गए तुम दिल दुखाने के लिए
,
रात रोती रह गई है चाँद खोया आसमां
इक सितारा है चमकता ग़म भुलाने के लिए
,
चाहतें रूठी हमारी आस भी कोई नहीं
जिंदगी है बोझ अपना अब उठाने के लिए
,
जिंदगी से दर्द ही हमको मिले किससे कहें
और मत लो इम्तिहाँ अब आज़माने के लिए
,
खूबसूरत ये नज़ारे अब बुलाते हैं हमें
गर न आओ तुम यहां  है  दिल जलाने के लिए
,
देखते हैं रात भर हम ख्वाब तेरे जिंदगी
गीत लब पर आ गए हैं गुनगुनाने के लिए
,
आरज़ूएँ हज़ार रखते हैं जिंदगी से हम
आज फिर उड़ने  लगे है मुस्कुराने के लिए

रेखा जोशी

पतझड़

ओ पिया भूल गए
क्यों अपना अंगना
जानें कहाँ
चले गए तुम
रूठ कर हमसे
हुआ जीवन
अब पतझड़ बिन तेरे
जानें कैसी चली हवा
टूट कर डाली से
बिखर गए सभी पत्ते
यहाँ वहाँ
था कभी जो हरा भरा
अपना अंगना
सूना सूना सा लगे अब
बिन तेरे
आ भी जाओ पिया
बन के बहार
जीवन में हमारे
पुकारे तुम्हें हम
बिन तेरे
ओ पिया
लागे न जिया

रेखा जोशी