Thursday, 3 January 2019

सदा साथ अपना निभाना पिया

122 122 122 12

सदा  साथ  अपना निभाना पिया
हमें छोड़ तुम  फिर न जाना पिया
...
नहीं  कुछ  हमें   चाहिये  जिंदगी
मिले   प्यार  तेरा   सुहाना  पिया
...
चलें  प्रीत  की  हम गली में सजन
न  करना  नया  तुम  बहाना पिया
...
मिला  के  कदम  संग  चलते चलें
बने  ज़ालिम  फिर  ज़माना  पिया
....
खुशी  जिंदगी    में   हमें  है  मिली
न फिर ग़म कभी तुम बुलाना पिया

रेखा जोशी

Friday, 28 December 2018

है संघर्षरत यह जीवन

सुख दुख की लहरों पर अक्सर
लड़खड़ाती है जीवन नैया
काटना कठिन है जीवन सफर
है संघर्षरत यह जीवन
.
घिर घिर काले घन आते जब
प्रलय की आँधी से फिर तब
रह रह कर उठे बवंडर
ऊंची नीची लहरों से जूझते लड़ते
थक जाता है मानव अक्सर
बाधाओं से घिर जाये मानव तब
है संघर्षरत यह जीवन
.
चमक चमक कर नभ में जब
जिया धड़काती दामिनी
घबराना नहीं डरना भी नहीं
चीर कर घोर तूफानों को तब
बढ़ते रहना तुम निरंतर
पार बाधाओं को कर सारी  

मंजिल पानी है तुम्हें 

उस पार नैया ले जानी तुम्हें 

चलते जाना तुम अविचल
है संघर्षरत यह जीवन

रेखा जोशी

प्यार

हाँ  किया हमने भी प्यार, इंकार नहीं हैं
था  हमें  इंतज़ार  अब  इंतज़ार नहीं  हैं
बेवफा से दिल लगाया बहुत चोट खाई
दर्द  सीनें  में  छुपाया  पर  प्यार नहीं हैं

रेखा जोशी

Thursday, 6 December 2018

छटा प्रकृति की तो मतवारी है

फ़ूलों  से  महकी अब क्यारी  है
अँगना खिली आज फुलवारी है
..
नाचते  झूम  झूम   मोर  बगिया
कुहुके   कोयल   डारी  डारी  है
..
रंगीन   तितली  उड़े  फूलों  पर
गुन गुन भँवरों की अब बारी है
..
ऊँची   ऊँची   पर्वत  शृंखलाएँ
छा  रही   घटा  कारी  कारी  है
..
है  मधुर  स्वर  में   गाते   झरनें
कल कल ध्वनि नदी की जारी है
...
अनुपम  रूप  है छाया चहुं  ओर
छटा  प्रकृति  की  तो मतवारी है

रेखा जोशी

Sunday, 18 November 2018

बुझ गए आस के दीपक

बुझ गए आस के दीपक
खंडहर हुआ उम्मीद का महल
टूटी प्रीत की माला ऐसी
बिखर गया मोती मोती
रूठी मुझसे तकदीर मेरी
पल पल जीना हुआ दुश्वार
ग़मों का छाया इस कदर अंधेरा
नहीं दूर दूर तक
कोई  रोशनी की किरण
घुटेगा दम यहाँ अब मेरा
तन से प्राण निकलने तक

रेखा जोशी

Saturday, 10 November 2018

छठ पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं

छठ पर्व की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं

कर सवार
सात घोड़ों के रथ पर
अपनी लालिमा से
दिवाकर ने रंग दिया आसमान

चलो सखी नदिया के नीर
करने प्रणाम
मिला जिससे हमें जीवन दान

आओ दें अर्ध्य 
सूरज की
प्रथम मचलती रश्मियों को
लहराती झूमती
तरंगिनी की लहरों पर
चलो सखी नदिया के नीर
थाली सजा के पूजने
सूरज के रथ को
प्रणेता जीवन का
जिसके
आगमन से हुई आलौकिक धरा
जीवन दाता हमारा
है उससे ही तन में प्राण

चलो सखी नदिया के नीर
करने प्रणाम
मिला जिससे हमें जीवन दान

रेखा जोशी

Friday, 2 November 2018

न्याय

है हल्ला बोलता दुनिया में अन्याय
आँखों  पे  पट्टी  बांधे  खड़ा  न्याय
घिस जाते  जूते  न्याय की आस में
न्याय मिले जल्दी नहीं कोई उपाय

रेखा जोशी