रच कर सुन्दरता को वह स्वयं इसमें खो गया है फिर स्वयं को खोज रहा यह उसे क्या हो गया है मन ही मन आनंद ले है सुन्दरता ही परम सत्य सत्य ही शिव है शिव ही सुन्दर भान यह हो गया है
वह
दौड़ रहां है
इस
दुनिया में
अंतहीन दौड़
लेकिन
तन्हा
पूरे करने है
उसे
सपने
जो देखे है
उसके पिता ने
खरा उतरना है
उसे
उम्मीदों पर
अपनी माँ
पत्नी और
बच्चों की
पर
उसके
अपने सपने
दफन है
उसके
सीने में
थक कर
हांफने
लगा
लेकिन
वक्त नही है
रुकने का
जीतनी
है जंग
उसे
ज़िंदगी की
क्योंकि
उसे प्यार है
सबसे
अपने सपनो
से भी
ज्यादा
वक्त
रुकता नही
कभी
चलती है
ज़िंदगी
संग इसके
तुम अकेले
क्यूँ
खड़े हो
रुके हो
क्यूँ तुम
रुकता नही
सूरज
और
न ही
चाँद सितारे
फिर तुम
किसका
इंतज़ार
कर रहे हो
रुकना तो
मृत्यु है
उठो चलो
समझो
अपने
होने का
अस्तित्व
बह जाओ तुम
संग धारा के
खिला सकते
हो तुम
फूल ही फूल
महका सकते
हो तुम
वन उपवन