Friday, 7 February 2014

सत्य ही शिव है



रच कर  सुन्दरता को वह स्वयं इसमें खो गया है
फिर स्वयं को खोज रहा यह उसे  क्या हो गया है
मन ही मन आनंद ले है सुन्दरता ही  परम सत्य
सत्य ही शिव है शिव ही सुन्दर भान यह हो गया है

रेखा जोशी

अंतहीन दौड़

वह
दौड़ रहां  है
इस
दुनिया में
अंतहीन दौड़
लेकिन
तन्हा
पूरे करने  है
उसे
सपने
जो देखे है
उसके पिता  ने
खरा उतरना है
उसे
उम्मीदों पर
अपनी माँ
पत्नी और
बच्चों की
पर
उसके
अपने सपने
दफन है
उसके
सीने में
थक कर
हांफने
लगा
लेकिन
वक्त नही है
रुकने का
जीतनी
है जंग
उसे
ज़िंदगी की
क्योंकि
उसे प्यार है
सबसे
अपने सपनो
से भी
ज्यादा

रेखा जोशी

Thursday, 6 February 2014

प्रभु के नाम का कर जाप रे बन्दे

प्रभु के नाम का कर जाप रे बन्दे 
बने गे बिगड़े सब काम रे बन्दे 
कर ले भरोसा तू नाम का उसके 
नाम में है चारो धाम रे बन्दे 

रेखा जोशी

Tuesday, 4 February 2014

खिला सकते हो तुम फूल ही फूल

वक्त
रुकता नही
कभी
चलती है
ज़िंदगी
संग इसके
तुम अकेले
क्यूँ
खड़े हो
रुके हो
क्यूँ तुम
रुकता नही
सूरज
और
न ही
चाँद सितारे
फिर तुम
किसका
इंतज़ार
कर रहे हो
रुकना तो
मृत्यु है
उठो चलो
समझो
अपने
होने का
अस्तित्व
बह जाओ  तुम
संग धारा के
खिला सकते
हो तुम
फूल ही फूल
महका सकते
हो तुम
वन उपवन

रेखा जोशी


जाने अब कहाँ नज़ारे चले गए

जाने  अब  कहाँ  नज़ारे  चले  गए
जीने   के   सभी   सहारे  चले  गए

दिन तो ढल चूका औ चाँद भी  नही
जाने  सब  कहाँ  सितारे  चले  गए

उठ के जा  चुके वे तो  कभी  के  थे
जाने  क्यूँ   हमीं   पुकारे  चले  गए

शायद  वो अभी  लहरेँ  हो मचलती
जिन को छोड़ हम किनारे चले गए

महेन्द्र जोशी 

Sunday, 2 February 2014

दिन का सुकून और रातों की नींदे उड़ गई

तुम्हारी चाहत लिये   हम पल पल मरते रहे
पथ   में  पलक   बिछाये  इंतज़ार करते  रहे
दिन  का सुकून और रातों  की नींद  उड़ गई
अनजान बने  तुम्ही इस दिल में धड़कते रहे

रेखा  जोशी 

Saturday, 1 February 2014

दूर हो बहुत दूर मुझसे

बहुत 
करीब 
हो तुम मेरे 
फिर भी 
बहुत दूर हो 
क्यों 
नही समझ 
पा रहे 
मेरे अंतस 
की पीड़ा 
क्यों 
नही सुन 
पा रहे 
शोर 
मेरे दिल में 
जो मचल 
रहे है 
मचा रहे 
हलचल 
उन अनकहे 
जज़बातों का 
मौन हूँ मै 
क्यों
नही सुन  
पा रहे 
मेरी 
आँखों की 
भाषा तुम 
क्योंकि 
तुम पास
हो कर भी 
दूर हो 
बहुत दूर 
मुझसे 

रेखा जोशी