Tuesday, 16 April 2013

इंतज़ार

चाँद से आज मै पूछती  हूँ सवाल ?
विरहन को तड़पाते  हो तुम  जहां ,
प्रिय  मिलन को रिझाते क्यों  वहां?
चांदनी से मिले जहां ठंडक किसी को ,
जलाती  वही ठंडक  क्यों विरहन को ?
प्रिय मिलन की आस में बैठी चकोरी ,
निशब्द निहारे एकटक सी ओर तेरी ,
कैसा फैलाया है तूने यह माया जाल 
चाँद से आज मै पूछती हूँ सवाल ?